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रूस की कोरोना वैक्सीन पर डब्ल्यूएचओ की चेतावनी, कहा- जल्दबाजी खतरनाक साबित हो सकती है
Wed, 12 Aug 2020 08:56 AM IST
अनवर अंसारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेनेवा
Published by: अनवर अंसारी
Updated Wed, 12 Aug 2020 08:56 AM IST
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तेदरस एदमन गिब्रेसस (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
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रूस ने मंगलवार को एलान किया कि उसने सफलतापूर्वक कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार कर ली है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने घोषणा की, रूस ने कोरोना वायरस के खिलाफ प्रयोग के लिए वैक्सीन तैयार कर ली है और वह ऐसा करने वाला पहला देश बना है। वहीं, रूस के इस दावे के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है उसके पास इस वैक्सीन की जानकारी नहीं है और रूस की वैक्सीन को लेकर जल्दबाजी खतरनाक साबित हो सकती है।
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पुतिन ने वैक्सीन को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि इसे देश में पंजीकृत कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी दो बेटियों में एक बेटी को पहली वैक्सीन लगवाई है और वह अच्छा महसूस कर रही है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि किसी भी कोविड-19 वैक्सीन को संस्थान से अनुमोदन के लिए सुरक्षा डाटा की समीक्षा की जरूरत होती है।
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संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के प्रवक्ता तारिक जसारेविक ने कहा कि हम रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और वैक्सीन को लेकर डब्ल्यूएचओ की समीक्षाओं के संबंध में चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी वैक्सीन की योग्यता की जांच के लिए कठोर समीक्षा और मूल्यांकन की जरूरत होती है।
रूस ने इस वैक्सीन का नाम अपने पहले सैटेलाइट 'स्पुतनिक वी' के नाम पर रखा है। इस वैक्सीन को देश के रक्षा मंत्रालय के साथ समन्वय में गमलेया शोध संस्थान द्वारा विकसित किया गया है। 31 जुलाई को निर्मित नवीनतम डब्ल्यूएचओ अवलोकन के अनुसार, दुनिया भर में कुल 165 वैक्सीन पर काम चल रहा है।
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रूसी स्वायत्त निधि के प्रमुख ने कहा, स्पुतनिक वी वैक्सीन की एक अरब डोज के लिए उन्हें 20 से अधिक देशों से निवेदन मिला है। दूसरी तरफ, डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि रूस ने उसके साथ वैक्सीन और इससे जुड़ी टेस्टिंग की प्रक्रिया की कोई जानकारी साझा नहीं की है।
दरअसल, डब्ल्यूएचओ को इस वैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण को लेकर संदेह है। संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, अगर किसी वैक्सीन को तीसरे चरण के परीक्षण के बगैर ही उसके उत्पादन के लिए लाइसेंस दिया जाता है, तो यह खतरनाक साबित होता है।
दूसरी तरफ, दुनियाभर के वैज्ञानिक भी इस वैक्सीन को लेकर संदेह जता रहे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, रूस ने जितनी तेजी के साथ वैक्सीन तैयार करने की घोषणा की है, उसे लेकर संदेह उठता है। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रॉजेनेका, मॉडर्ना और फाइजर जैसे संस्थानों के वैज्ञानिक का मानना है कि रूस के शॉर्टकट से सेहत को खतरा हो सकता है।
वैज्ञानिकों का तर्क है कि वैक्सीन के मनुष्यों पर ट्रायल में कई वर्ष लगते हैं, जबकि रूस ने ये दो महीने से भी कम में किया है। यूनाइटेड हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज के सचिव एलेक्स अजर ने कहा, वैक्सीन का सुरक्षित होना सबसे अहम है न कि सबसे पहले बनाना। ट्रायल के आंकड़े पारदर्शी तरीके से पेश से उसकी सुरक्षा और असर का पता लगेगा।