शोधकर्ताओं ने तैयार की एंटीबायोटिक प्रतिरोध से मुकाबले की नई रणनीति
एंटीबायोटिक दवाइयां शरीर में मौजूद जीवाणु को खत्म करने के साथ उन्हें कमजोर बनाती हैं, लेकिन कुछ खास किस्म के जीवाणु समय के साथ एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं। वैज्ञानिकों ने इससे निपटने के लिए एक नया तरीका निकाला है जिसमें जीवाणु एक दूसरे की मदद नहीं कर पाते और कमजोर हो जाते हैं। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इससे आगे चलकर एंटीबायोटिक्स का विकल्प तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
शोध का तरीका- नए रसायन का किया इस्तेमाल
एक नए शोध में बताया गया है कि साल्मोनेला जीवाणुओं में वीर्य के उत्पादन पर लगाम लगाने से दूसरे बैक्टीरिया भी कमजोर होते हैं और फिर उन्हें खत्म करना आसान होता है। नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित शोध के नतीजों में कहा गया है कि वैज्ञानिकों ने वीर्य के उत्पादन को रोकने के लिए एक जीवाणुरोधी रसायन का इस्तेमाल किया।
शोध के प्रमुख लेखक प्रोफेसर स्टीनेकर्स का कहना है कि जीवाणुओं के शरीर पर वीर्य की परत नहीं हो तो उन्हें आसानी से कमजोर किया जा सकता है और एंटीबायोटिक्स की मदद से खत्म भी किया जा सकता है।
नतीजा- कम हो जाती है प्रतिरोध विकसित कर चुके जीवाणुओं की संख्या
वैज्ञानिकों ने इस नए रसायन के प्रति जीवाणुओं में प्रतिरोध की तुलना एंटीबायोटिक्स से की। स्टीनेकर्स ने बताया, जीवाणु इस रसायन को लेकर प्रतिरोध विकसित नहीं कर पाए जबकि एंटीबायोटिक्स के प्रति जल्द ही प्रतिरोध विकसित करने में कामयाब रहे। कुछेक जीवाणु प्रतिरोध विकसित करने में सफल रहे, लेकिन उनकी संख्या बेहद कम थी।
प्रतिरोध विकसित कर चुके जीवाणु हालांकि इसके बाद भी वीर्य का उत्पादन कर सकते हैं और प्रतिरोध विकसित नहीं करने वाले जीवाणुओं के साथ बांट भी सकते हैं, लेकिन इसमें ऊर्जा की खपत होती है। यही कारण है कि प्रतिरोध विकसित नहीं करने वाले जीवाणुओं की संख्या अपेक्षाकृत तेजी से बढ़ती है।
उम्मीद- मिलेगा एंटीबायोटिक का विकल्प
शोध के अनुसार परंपरागत एंटीबायोटिक दवाइयों के विपरीत यह रसायन जीवाणुओं को प्रतिरोध विकसित करने से रोकता है। इलाज की ऐसी पद्धति जो जीवाणुओं को साथ मिलकर काम करने से रोक सके, एंटीबायोटिक्स के प्रतिरोध की समस्या का समाधान उपलब्ध करा सकती है। शोधकर्ता इलाज के ऐसे जीवाणुरोधी तरीकों को लोकप्रिय बनाना चाहते हैं।
उनका मानना है कि संक्त्रस्मण से बचने के लिए इसे दवा या इंप्लांट पर परत चढ़ाकर उपयोग किया जा सकता है। इस रसायन को एंटीबायोटिक्स के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका कृषि, उद्योग और हमारे घरों में भी अलग-अलग तरीके से उपयोग हो सकता है। इतना ही नहीं, शोधकर्ताओं का दावा है कि भविष्य में एंटीबायोटिक्स का विकल्प तैयार करने में भी इनकी अहम भूमिका हो सकती है।