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आंकड़ों पर सवाल: क्या अमेरिका में कोविड-19 से डेढ़ गुना ज्यादा मौतें हुई हैं, स्वीकारी ‘अंडर- रिपोर्टिंग’ की बात!

Mon, 10 May 2021 03:34 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 10 May 2021 03:34 PM IST
सार

अमेरिका के सेंटर फॉर डीजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक 1918 में आई इन्फ्लूएंजा महामारी के कारण दुनिया भर में कम से कम पांच करोड़ लोग मरे थे। अमेरिका में उससे 6.75 लाख लोगों की मौत हुई थी...

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Research from the University of Washington claimed more than nine lakh people die from coronavirus in USA
अमेरिका में कोरोना अस्पताल - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिका में कोविड-19 महामारी से आधिकारिक रूप से अभी तक पांच लाख 96 हजार लोगों की जान गई है। लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के अनुसंधान में दावा किया गया है कि असल में इस संक्रमण से मरने वालों की संख्या नौ लाख से ज्यादा है। इस अध्ययन के निष्कर्ष को उस समय और वजन मिल गया, जब अमेरिका सरकार के स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची ने एक टीवी कार्यक्रम में ये टिप्पणी कर दी कि कोविड-19 वायरस उससे कहीं ज्यादा जानलेवा साबित हुआ है, जितना बताया गया है। उन्होंने यह भी माना कि अमेरिका में कोरोना मौतों की ‘अंडर- रिपोर्टिंग’ हुई है। यानी असल संख्या को कम करके बताया गया है।

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टीवी चैनल एनबीसी के एक शो में डॉ. फाउची ने यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के अध्ययन के बारे में सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा- ‘मेरी राय में इसमें कोई शक नहीं है कि हमने अंडर-रिपोर्टिंग की है और अभी भी कर रहे हैं।’ उनसे पूछा गया कि क्या मरने वालों की संख्या नौ लाख से ज्यादा है, तो डॉ फाउची ने कहा- ‘मेरी राय में जितनी अंडर-रिपोर्टिंग हुई है, उसकी तुलना में ये संख्या कुछ ज्यादा है। कई बार जिन मॉडलों के आधार पर ऐसे अनुमान लगाए जाते हैं, वे ठीक होते हैं, लेकिन कई बार वे गलत भी होते हैं।’
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डॉ. फाउची ने इंटरव्यू के आखिर में ये कहा कि यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन का अध्ययन हमें याद दिलाता है कि ये महामारी इतिहास में दर्ज होने वाली है। यह एक ऐसी महामारी के रूप में दर्ज होगी, जैसा दुनिया ने पिछले 100 साल में नहीं देखा था। डॉ. फाउची ने कहा- ‘यह सच है कि मृत्यु की जो असल संख्या होगी, उसके सामने 1918 की महामारी काफी छोटी दिखने लगेगी।’
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अमेरिका के सेंटर फॉर डीजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक 1918 में आई इन्फ्लूएंजा महामारी के कारण दुनिया भर में कम से कम पांच करोड़ लोग मरे थे। अमेरिका में उससे 6.75 लाख लोगों की मौत हुई थी। जानकारों का कहना है कि यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन की एक अध्ययन रिपोर्ट पर महामारी के आरंभ के समय भी विवाद हुआ था। न्यूयॉर्क गवर्नर एंड्रयू कुमो ने आरोप लगाया था कि कोविड-19 महामारी के आरंभ में यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन ने न्यूयॉर्क में अस्पताल बिस्तरों की पड़ने वाली जरूरत का लगभग गलत अनुमान लगाया। महामारी की शुरुआत में यूनिवर्सिटी ने कहा था कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए न्यूयॉर्क में 49 हजार रेगुलर और आठ हजार इन्टेंसिव केयर यूनिट बिस्तरों की जरूरत होगी। लेकिन असल में जब महामारी अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंची, तो वहां 18,825 रेगुलर और 5,225 आईसीयू बिस्तरों की जरूरत पड़ी।

अमेरिका में लॉकडाउन के विरोधी गुट शुरू से यह दावा करते रहे हैं कि कोविड-19 से मरने वालों की संख्या बढ़ा-चढ़ा कर बताई जा रही है। दक्षिणपंथी लेखक एलेक्स बैरनसन ने कहा था कि दूसरी बीमारियों से मर रहे लोगों की गिनती कोरोना से हुई मौतों में की जा रही है। उन्होंने कहा था कि मौतों की कुल संख्या में 94 फीसदी ऐसी है, जिसका कोरोना से संबंध नहीं था। तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पिछले अक्टूबर में कहा था कि कोरोना से हो रही मौतों को बढ़ा-चढ़ा कर बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर और अस्पताल ऐसा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि कोरोना वायरस से हुई मौत बताने पर उन्हें ज्यादा पैसा मिलता है।


लेकिन डॉक्टरों ने ऐसे दावों का खंडन किया है। उनका कहना है कि कुछ मामलों में अगर गलती हुई भी हो, तो उसका यह मतलब नहीं है कि सारी संख्या विवादित हो जाती है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब डॉ. फाउची के अंडर-रिपोर्टिंग की बात मानने से ये सारा विवाद फिर खड़ा हो सकता है।

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