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रिपोर्ट में खुलासा: चीन की मदद से बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की तैयारी में हूती विद्रोही, निशाने पर सऊदी-इस्राइल?

Thu, 15 Oct 2026 02:31 AM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 15 Oct 2026 02:31 AM IST
सार

यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से चीन से मिले पुर्जों के जरिए उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिशों का दावा एक नई रिपोर्ट में किया गया है। इसमें ईरान की भूमिका, हथियारों की स्थानीय असेंबली और बदलते आपूर्ति नेटवर्क का भी जिक्र है। क्या इससे पश्चिम एशिया का सुरक्षा समीकरण बदल सकता है? आइए, जानते हैं...

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Report: Yemen Houthis Seek Chinese Parts to Build Advanced Ballistic Missiles
हूती विद्रोहियों के निशाने पर सऊदी अरब-इस्राइल? - फोटो : AI Generated

विस्तार

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही अपने हथियारों की क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, समूह चीन से मिले कुछ खास पुर्जों की मदद से उन्नत मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल तैयार करने की कोशिश कर रहा है। इस घटनाक्रम से पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। ऐसी मिसाइलें हूतियों की सऊदी अरब और इस्राइल जैसे देशों को निशाना बनाने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

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ब्रिटेन स्थित संगठन कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च की रिपोर्ट बुधवार को जारी हुई। यह संगठन संघर्ष वाले क्षेत्रों में हथियारों की आपूर्ति और उनके इस्तेमाल पर नजर रखता है। रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने चीन के आपूर्तिकर्ताओं से ऐसे पुर्जे हासिल करने की कोशिश की, जिनका इस्तेमाल ईरान की खैबर शेकन मिसाइल के एक संस्करण को बनाने में किया जा सकता है। इस मिसाइल की मारक क्षमता करीब 2,000 किलोमीटर बताई गई है।
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मिसाइल बनाने की हूतियों की महत्वाकांक्षा पहले से ज्यादा
रिपोर्ट तैयार करने वाले संगठन के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज के मुताबिक, हूतियों की स्थानीय स्तर पर हथियार बनाने की महत्वाकांक्षा पहले के अनुमान से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि बरामद किए गए कुछ पुर्जे बेहद खास प्रकृति के हैं। इनके निर्माण के लिए संबंधित मिसाइल के डिजाइन से जुड़ी जानकारी की जरूरत पड़ सकती है। हिंज के अनुसार, इन उपकरणों को सामान्य नागरिक इस्तेमाल की कई तरह की वस्तुओं की तरह नहीं देखा जा सकता। हालांकि, चीन के दूतावास ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। ऐसी मिसाइलें हूतियों की सऊदी अरब और इस्राइल जैसे देशों को निशाना बनाने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।
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चीन से भेजी गई खेप में मिले मिसाइलों से जुड़े पुर्जे
रिपोर्ट यमन के सरकारी अधिकारियों की ओर से जुलाई में दी गई जानकारी पर आधारित है। अधिकारियों ने उस समय दो ऐसी खेपों को रोका था, जिनमें संदिग्ध उपकरण शामिल थे। ये खेप चीन से रवाना हुई थीं और यमन के होदेदा बंदरगाह पहुंचाई जानी थीं। रिपोर्ट के अनुसार, खेप में मिसाइलों के कामकाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण हिस्से मिले। इनमें मिसाइल को स्थिर रखने वाले फिन के कोर, रॉकेट मोटर के पिछले हिस्से के उपकरण और इग्नाइटर शामिल थे। इसके अलावा फेनोलिक रेजिन नाम का पदार्थ भी मिला, जिसका इस्तेमाल अत्यधिक गर्मी से बचाने वाली परत बनाने में किया जाता है।

चीन से बढ़ती खरीद से ईरान पर निर्भरता घटाने की कोशिश?
हूती विद्रोहियों को लंबे समय से ईरान से हथियारों के डिजाइन और महत्वपूर्ण पुर्जे मिलते रहे हैं। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि अब समूह चीन समेत दूसरे स्रोतों से भी उपकरण जुटाने की कोशिश कर रहा है। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ईरान कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक बेन्हम बेन तालेब्लू के अनुसार, सैन्य योजना में आपूर्ति के वैकल्पिक रास्ते होना महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, ईरान पर नाकेबंदी के दबाव के बीच हूती विद्रोही अपने आपूर्ति नेटवर्क में विविधता ला रहे हैं।


वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक द सेंचुरी फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों का हथियार कार्यक्रम अब अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति नेटवर्क पर अधिक निर्भर होता जा रहा है। इसमें यमन में सक्रिय तस्करों के साथ चीन के पूर्वी हिस्सों में निर्यात केंद्रों से जुड़े कारोबारी भी शामिल बताए गए हैं।

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