US: टेक-हेल्थकेयर और फाइनेंस में भारतीय सबसे बड़े हिस्सेदार;अर्थव्यवस्था में है 600 अरब डॉलर से अधिक का योगदान
अमेरिकी स्टार्टअप्स में से एक-तिहाई यूनिकॉर्न भारतीय मूल के संस्थापकों द्वारा स्थापित किए हैं। टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारतीय-अमेरिकियों की सबसे अधिक मौजूदगी है। भारतीय मूल के जय चौधरी की साइबर सिक्योरिटी कंपनी जीस्केलर की मार्केट वैल्यू करीब 25 अरब डॉलर है।
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अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या भले ही कुल जनसंख्या का केवल 1.5% यानी करीब 45 लाख हो, लेकिन उनका योगदान अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अनुपात से कहीं ज्यादा है। यूएस सेंसस ब्यूरो और पीयू रिसर्च सेंटर के अनुसार भारतीय-अमेरिकी परिवारों की औसत सालाना आय लगभग 1,40,000 डॉलर है, जो अमेरिकी औसत का दोगुना है। अनुमान है कि भारतीय मूल के लोगों का वार्षिक योगदान अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 600 अरब डॉलर से अधिक है। इनका सबसे ज्यादा प्रभाव टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, फाइनेंस और उद्यमिता के क्षेत्रों में दिखाई देता है।
नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (एनएफएपी) के अनुसार अमेरिकी स्टार्टअप्स में से एक-तिहाई यूनिकॉर्न भारतीय मूल के संस्थापकों द्वारा स्थापित किए हैं। टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारतीय-अमेरिकियों की सबसे अधिक मौजूदगी है। भारतीय मूल के जय चौधरी की साइबर सिक्योरिटी कंपनी जीस्केलर की मार्केट वैल्यू करीब 25 अरब डॉलर है। साल 2024 में इसका वार्षिक राजस्व लगभग 2 अरब डॉलर रहा और कंपनी में 6,000 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। भारतीय मूल के ही थॉमस कुरियन ने गूगल क्लाउड के प्रमुख रहते हुए कंपनी को तेजी से आगे बढ़ाया। साल 2024 में गूगल क्लाउड की कमाई 36 अरब डॉलर से अधिक रही और इसके कर्मचारियों की संख्या 65,000 से ज्यादा है। इसी तरह अरुण सरीन, जो वोडाफोन के पूर्व सीईओ रहे हैं, अपने कार्यकाल में कंपनी का वार्षिक टर्नओवर 50 अरब डॉलर से अधिक तक ले गए और लाखों कर्मचारियों का प्रबंधन किया।
अमेरिकी जीडीपी में भारतीयों का योगदान 2 फीसदी से अधिक भागीदार
1965 के इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के बाद भारतीय पेशेवरों का अमेरिकी जीडीपी में केवल 0.1–0.2% था। 1990 में अमेरिकी आईटी सेक्टर में बूम आया और एच-1बी वीजा के जरिए बड़ी संख्या में भारतीय पहुंचे। इस दौरान योगदान बढ़कर 0.8–1% तक पहुंचा। सिलिकॉन वैली में भारतीय उद्यमियों और स्टार्टअप्स ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। पिछले एक दशक यानी 2015 से 2025 के बीच प्रवासी भारतीयों ने उद्यमिता क्षेत्र में बढ़-चढ़कर योगदान दिया। आज अमेरिका की जीडीपी लगभग 25 ट्रिलियन डॉलर है और भारतीय मूल के लोगों का अनुमानित आर्थिक योगदान 450 से 600 अरब डॉलर सालाना है यानी हिस्सेदारी 2% से अिधक पहुंच गई है।
भारतीय मूल के दिग्गज कारोबारी
- हेल्थकेयर और फार्मा
भारतीय मूल के उद्योगपति रोमेश वधवानी की कंपनियां सिम्फनी टेक्नोलॉजी ग्रुप और सिम्फनी एआई हेल्थकेयर, हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी के संगम पर काम करती हैं। इनकी पोर्टफोलियो वैल्यू 10 अरब डॉलर से अधिक है। समूह का वार्षिक टर्नओवर 3 से 4 अरब डॉलर के बीच है और इसमें 20,000 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं। दूसरी ओर, भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी ने रोइवांट साइंसेज की स्थापना की, जो बायोटेक और दवा विकास में सक्रिय है। कंपनी का वार्षिक टर्नओवर लगभग 600 मिलियन डॉलर है और इसमें 1,000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। कुल मिलाकर भारतीय मूल के उद्यमियों ने अमेरिका में 100 अरब डॉलर से अधिक का वार्षिक कारोबार खड़ा किया है और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 20 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दिया है।सबसे बड़ा योगदान टेक्नोलॉजी और फाइनेंस सेक्टर से आता है, जिन्हें अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
- फाइनेंस और निवेश
भारतीय मूल के शैलेंद्र सिंह वैश्विक वेंचर कैपिटल फंड सीक्वोया कैपिटल इंडिया-यूएस से जुड़े हैं। उनके प्रबंधन के तहत 80 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति है।
- उद्यमिता और रिटेल
नाथन खोटारी, जो रियल एस्टेट और मल्टी-बिजनेस वेंचर्स से जुड़े हैं, की संपत्ति का आकार 1 से 1.5 अरब डॉलर के बीच आंका जाता है। उनके कारोबार ने अमेरिका में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दिया है।