Qin Gang Pakistan Visit: अब पाकिस्तान-अफगानिस्तान में मेल कराने में जुटा चीन, BRI प्रोजेक्ट पर काम होगा शुरू
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विस्तार
सऊदी अरब और ईरान में मेल कराने के बाद से दुनिया में अपने को शांति दूत के रूप में पेश करने में जुटे चीन ने अब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मेल-मिलाप कराने की पहल की है। चीन के विदेश मंत्री चिन गांग ने अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान अफगानिस्तान के विदेश मंत्री को भी यहां बुला लिया। उसके बाद रविवार को तीनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई।
बाद में चीन ने दावा किया कि इसके साथ ही अफगानिस्तान-चीन-पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय सहयोग की शुरुआत हो गई है। चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स में इस बारे में एक विशेष टिप्पणी प्रकाशित की, जिसमें कहा गया- ‘यह एक अति महत्त्वपूर्ण घटना है, जिससे पूरे क्षेत्र में स्थिरता आएगी। साथ ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान में आपसी भरोसा बढ़ेगा, जिन्हें पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद का सामना करना पड़ा है।’
यहां पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुट्टाकी के इस्लामाबाद दौरे के समय उनसे पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल सईद असीम मुनीर ने भी मुलाकात की। इस दौरान जनरल मुनीर ने दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग मजबूत करने और आतंकवाद एवं चरमपंथ जैसी साझा चुनौतियों’ का मिल कर मुकाबला करने पर जोर दिया। पाकिस्तान सरकार की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक जनरल मुनीर और मुट्टाकी ने साझा हितों के मसलों पर बातचीत की, जिनमें क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय सुरक्षा व्यवस्था को औपचारिक रूप देना शामिल है।
बाद में जनरल मुनीर की चीन के विदेश मंत्री के साथ भी बातचीत हुई। पाकिस्तान के सत्ता तंत्र में सेनाध्यक्ष की सर्वोपरि भूमिका को देखते हुए इन मुलाकातों को यहां मीडिया में खासी अहमियत दी गई है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि चिन, मुट्टाकी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के की बीच त्रिपक्षीय वार्ता के दौरान अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों ने चीन की तरफ से पेश वैश्विक सुरक्षा पहल (जीएसआई) और वैश्विक विकास पहल (जीडीआई) पर अमल करने का संकल्प जताया। उधर ने चीन आश्वासन दिया कि वह दोनों देशों के साथ त्रिपक्षीय सहयोग को मजबूत करने में अपनी पूरी भूमिका निभाएगा।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल के महीनों में कई मौकों पर गंभीर टकराव हुए हैं। सीमा पर कई बार दोनों देशों की फौज के बीच गोलीबारी भी हुई है। पाकिस्तान ने बार-बार अफगानिस्तान पर आतंकवाद को संरक्षण देने के इल्जाम लगाए हैं। पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के हमलों में बढ़ोतरी के साथ पाकिस्तान की यह शिकायत गहराई है कि टीटीपी को अफगान तालिबान के संरक्षण की वजह से पाकिस्तान में खून-खराबा हो रहा है।
इन्हीं परिस्थितियों के बीच चीन के हस्तक्षेप ने कूटनीतिकों का ध्यान खींचा है। कुछ खबरों में बताया गया है कि चीन जल्द से जल्द अफगानिस्तान में अपनी महत्त्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) परियोजना के तहत निर्माण कार्य शुरू करना चाहता है। उसकी नजर वहां के समृद्ध खनिज भंडार पर भी है। इसलिए अब उसने अफगानिस्तान और पाकिस्तान में मेल-मिलाप कराने को प्राथमिकता दी है, ताकि अफगानिस्तान में राजनीतिक स्थिरता आ सके और चीनी कंपनियों के लिए वहां अनुकूल माहौल बने।