COP28 Summit: पूर्व नौसेना कर्मियों को मौत की सजा के बीच कतर के शासक से मिले PM मोदी, क्या हुई बातचीत?
COP28 Summit: कतर की अदालत के द्वारा भारतीय नौसेना क आठ पूर्व कर्मियों को सुनाई गई मौत की सजा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद से मुलाकात की है।
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दुबई में COP28 जलवायु शिखर सम्मेलन के इतर कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब कतर की एक अदालत ने भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अधिकारियों को हाल ही मौत की सजा सुनाई है।
मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, COP28 सम्मेलन के इतर कल दुबई में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद से मुलाकात हुई। हमने द्विपक्षीय साझेदारी की क्षमता और कतर में भारतीय समुदाय की भलाई पर अच्छी बातचीत की।
भारत के आठ पूर्व नौसेना कर्मियों का मामला क्या है
भारतीय नौसेना के सभी आठ पूर्व कर्मियों को 30 अगस्त 2022 की रात को हिरासत में ले लिया गया था। तब से उन्हें एकांत कारावास में रखा गया था। हिरासत में लिए गए लोगों में कमांडर (सेवानिवृत्त) पूर्णेंदु तिवारी भी हैं, जो एक भारतीय प्रवासी हैं, जिन्हें 2019 में प्रवासी भारती सम्मान पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। कंपनी की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार पूर्णंदू तिवारी भारतीय नौसेना में कई बड़े जहाजों की कमान संभाल चुके हैं। इन सभी पर पनडुब्बी कार्यक्रम पर कथित रूप से जासूसी करने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, कतर ने कभी इस बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा।
ये सभी कतर की एक निजी कंपनी में कर रहे थे काम
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेवानिवृत होने के बाद ये सभी नौसैनिक कतर की एक निजी कंपनी में काम कर रहे थे। यह कंपनी कतरी एमिरी नौसेना को ट्रेनिंग और अन्य सेवाएं प्रदान करती है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, कंपनी का नाम दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी एवं कंसल्टेंसीज सर्विसेज है। कंपनी खुद को कतर रक्षा, सुरक्षा एवं अन्य सरकारी एजेंसी की स्थानीय भागीदार बताती है।
कतर ने कार्रवाई को गोपनीय रखा
गिरफ्तारी के कई दिनों तक इस मामले को गोपनीय रखा गया। कतर में भारतीय दूतावास के अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई। एक अक्तूबर 2022 को दोहा में भारत के राजदूत और मिशन के उप-प्रमुख ने इन पूर्व अफसरों से मुलाकात की। तीन अक्तूबर 2022 को पहला काउंसलर एक्सेस दिया गया। 25 मार्च 2023 को सभी आठों अधिकारियों के खिलाफ आरोप तय किए गए और 29 मार्च से मुकदमा शुरू हो गया। 26 अक्तूबर 2023 को सभी को मौत की सजा सुनाई गई।
इन नौसैन्य अधिकारियों को सुनाई गई मौत की सजा
नौसेना के जिन पूर्व अफसरों को कतर में फांसी की सजा सुनाई गई है उनमें कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी, कमांडर सुग्नाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और सेलर रागेश शामिल हैं। जिस कंपनी देहरा ग्लोबल के लिए ये भारतीय काम करते थे, उसके सीईओ खामिल अल आजमी ओमान एयरफोर्स के अफसर रह चुके हैं। आजमी को भी पहले हिरासत में लिया गया था लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था।