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पाकिस्तान: कट्टरपंथियों के सामने पुलिस ने घुटने टेके, अहमदी समुदाय के तीन पूजा स्थल की मीनारें गिराईं

Mon, 18 Sep 2023 07:03 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 18 Sep 2023 07:03 PM IST
सार

पाकिस्तान के अल्पसंख्यक अहमदी समुदाय ने आरोप लगाया कि कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने पंजाब प्रांत के विभिन्न जिलों में उनके तीन पूजा स्थलों की मीनारों को ध्वस्त कर दिया।

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Pakistan's Ahmadi minority in Punjab province faces fresh attacks on their worship places
अहमदिया समुदाय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

पाकिस्तान में अहमदी समुदाय पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामले में अल्पसंख्य समुदाय ने आरोप लगाया कि कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने पंजाब प्रांत के विभिन्न जिलों में उनके तीन पूजा स्थलों की मीनारों को ध्वस्त कर दिया।  

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इस घटना से एक सप्ताह पहले अहमदी समुदाय के एक पूजा स्थल के मेहराब को नष्ट कर दिया गया था, जो इस तरह की कार्रवाई पर प्रतिबंध लगाने वाले उच्च न्यायालय के 1984 का उल्लंघन था। 

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पाकिस्तान की संसद ने 1974 में अहमदी समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था। यहां तक कि उन्हें खुद को मुसलमान कहने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। 

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जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के आमिर महमूद ने बताया,'अहमदी पूजा स्थलों की मीनारों की पहचान मुस्लिम मस्जिद से करते हुए तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के कार्यकर्ताओं ने पंजाब के शेखूपुरा, बहावलनगर और बहावलपुर जिलों में तीन अहमदी पूजा स्थलों पर धावा बोल दिया और उनकी मीनारों को ध्वस्त कर दिया।'

हालिया घटनाओं के साथ इस साल के दौरान पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में अहमदियों के पूजा स्थलों पर या तो कट्टरपंथी इस्लामवादियों द्वारा हमला किया गया या पुलिस द्वारा आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया गया, हमलों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।

उन्होंने कहा, 'टीएलपी जैसे ही इन तीन अहमदी पूजा स्थलों में घुसी, पुलिस ने इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। अहमदियों को पाकिस्तान में रहने वाले नागरिक के रूप में उनके मूल अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। दुख की बात यह है कि पुलिस इन कृत्यों को अंजाम देने में सबसे आगे रही है।' 

उन्होंने कहा कि लाहौर उच्च न्यायालय के हालिया फैसले में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 1984 से पहले बने अहमदी पूजा स्थलों की मीनारों में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'इन पूजा स्थलों का निर्माण 1984 से पहले किया गया था।'

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने कहा कि अहमदिया पूजा स्थलों के एक हिस्से को नष्ट करना अहमदिया पूजा स्थलों की सुरक्षा के संबंध में लाहौर उच्च न्यायालय के हालिया फैसले का खुला उल्लंघन है। 

जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान ने कहा कि देश में पहले से ही हाशिए पर मौजूद अहमदियों के लिए स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। उन्होंने कहा, 'अहमदियों को बुरे तत्वों के हाथों उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान के विभिन्न इलाकों में पूजा स्थलों को अपवित्र करने की घटनाएं लगातार जारी हैं। यह एक नया मानदंड है और अधिकारी कुछ नहीं कर रहे हैं।'

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