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PAK में तेल की किल्लत: पाकिस्तानी मंत्री का छलका दर्द, कर डाली भारत की तारीफ; बोले- पड़ोसी बहुत आगे, हम पीछे
Sat, 02 May 2026 03:24 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 02 May 2026 03:24 AM IST
सार
पश्चिम एशिया संकट के बीच पाकिस्तान ने बार माना है कि उसके पास भारत जैसा रणनीतिक तेल भंडार नहीं है। पेट्रोलियम मंत्री मुसादिक मलिक ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान के पास केवल 5-7 दिनों का कच्चा तेल बचा है।
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मुसादिक मलिक, पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री
- फोटो : @Team_Musadik:X
विस्तार
पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईधन पर मंडराए संकट को लेकर पाकिस्तान ने पहली बार भारत की खूबियां स्वीकार की हैं। पाकिस्तानी पेट्रोलियम मंत्री मुसादिक मलिक ने मौजूदा वैश्विक तेल संकट के प्रति गंभीर संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए कहा है कि उसके पास भारत की तरह रणनीतिक तेल भंडार नहीं हैं, जिनकी मदद से नई दिल्ली ईरान युद्ध के दुष्प्रभाव के चलते कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का प्रभाव को कम कर पाई है।
मलिक ने खुलासा किया कि इस्लामाबाद के पास सिर्फ कुछ दिनों का ही कच्चा तेल भंडार है, जो भारत के अनुमानित 60-70 दिनों के संयुक्त रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार की तुलना में भारी ऊर्जा सुरक्षा घाटे को दर्शाता है। यह स्वीकारोक्ति तेल के दामों में 126 डॉलर प्रति बैरल के उछाल के बाद आई है, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजरानी अभी भी बाधित है। इसका खामियाजा तुलनात्मक रूप से पाकिस्तान को भारत के बजाय काफी अधिक हो रहा है।
मामूली राहत के लिए भी करनी पड़ी गुप्त वार्ता
पाकिस्तानी पेट्रोलियम मंत्री ने खुलासा किया कि उपभोक्ताओं को मामूली राहत दिलाने के लिए इस्लामाबाद को आईएमएफ जैसे दाता निकायों के साथ गुप्त वार्ता करनी पड़ी। दाता एजेंसियों के साथ हुए बजट समझौते के तहत, पाकिस्तान को राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए इंधन पर भारी कर लगाना अनिवार्य है। डीजल दाम भी 3-4 गुना बढ़ने से पूरा बोझ पेट्रोल पर डालना पड़ा। मोटरसाइकल चालकों की सब्सिडी भी देनी पड़ी। इससे काफी नुकसान हुआ।
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ऊर्जा संकट से देश में व्यापक नागरिक अशांति
उर्जा संकट ने पूरे पाकिस्तान में व्यापक नागरिक अशांति को जन्म दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा हाल ही में पेट्रोल की कीमतों में 80 पाकिस्तानी रुपये की कमी करके इसे 378 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर करने के बावजूद इससे पहले 42.7% की मूल्य वृद्धि ने लागत को 321.17 रुपये से बढ़ाकर 458.41 पाकिस्तानी रुपये कर दिया। इससे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और ईंधन की कमी हो गई।
भारत बहुत आगे... हमारे पास एक दिन का भी तेल नहीं
पाकिस्तानी पेट्रोलियम मंत्री मुसादिक मलिक ने स्पष्ट कहा, हम भारत की तरह बहुत आगे नहीं हैं। वह बहुत आगे हैं, उसके पास 60-70 दिनों का तेल. भंडार है, जिसे वह सिर्फ एक हस्ताक्षर से जारी कर सकता है। मंत्री ने आगे बताया कि पाकिस्तान के पास एक दिन के लिए भी पेट्रोल भंडार नहीं है, जिससे देश का ऊर्जा ढांचा बाहरी व्यवधानों के सामने पूरी तरह असुरक्षित हो जाता है। उन्होंने भारत की आर्थिक मजबूती का श्रेय उसकी बेहतर विदेशी मुद्रा स्थिति और रणनीतिक योजना को दिया। कहा-भारत के पास न केवल 600 अरब डॉलर का भंडार है, बल्कि वे रणनीतिक भंडार भी बनाए रखते हैं। इससे उन्हें इस संकट से निपटने में मदद मिलती है।
भारत नहीं आईएमएफ का हिस्सा
मलिक ने अपने नकदी संकट से निपटने के लिए आईएमएफ के आगे हाथ फैलाने के दुष्परिणामों पर इशारा करते हुए कहा, भारत आईएमएफ कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, और तेल की कीमतों में वृद्धि के दौरान उसने कराधान कम करके खुद को सुरक्षित रखा। उनके पास पर्याप्त वित्तीय गुंजाइश है। भारत को वित्तीय आजादी है, वहीं पाकिस्तान आईएमएफ के बंधन में जकड़ा हुआ है।
समा टीवी को एक इंटरव्यू में मलिक ने कहा, हमारे पास रणनीतिक तेल भंडार नहीं, सिर्फ वाणिज्यिक भंडार हैं। हमारे पास 5-7 दिनों का ही कच्चा तेल है। तेल कंपनियों के पास मौजूद परिष्कृत उत्पाद सिर्फ 20-21 दिन ही चल सकते हैं। यानी हालात और बिगड़े तो पाकिस्तान टूट जाएगा
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मलिक ने खुलासा किया कि इस्लामाबाद के पास सिर्फ कुछ दिनों का ही कच्चा तेल भंडार है, जो भारत के अनुमानित 60-70 दिनों के संयुक्त रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार की तुलना में भारी ऊर्जा सुरक्षा घाटे को दर्शाता है। यह स्वीकारोक्ति तेल के दामों में 126 डॉलर प्रति बैरल के उछाल के बाद आई है, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजरानी अभी भी बाधित है। इसका खामियाजा तुलनात्मक रूप से पाकिस्तान को भारत के बजाय काफी अधिक हो रहा है।
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मामूली राहत के लिए भी करनी पड़ी गुप्त वार्ता
पाकिस्तानी पेट्रोलियम मंत्री ने खुलासा किया कि उपभोक्ताओं को मामूली राहत दिलाने के लिए इस्लामाबाद को आईएमएफ जैसे दाता निकायों के साथ गुप्त वार्ता करनी पड़ी। दाता एजेंसियों के साथ हुए बजट समझौते के तहत, पाकिस्तान को राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए इंधन पर भारी कर लगाना अनिवार्य है। डीजल दाम भी 3-4 गुना बढ़ने से पूरा बोझ पेट्रोल पर डालना पड़ा। मोटरसाइकल चालकों की सब्सिडी भी देनी पड़ी। इससे काफी नुकसान हुआ।
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ऊर्जा संकट से देश में व्यापक नागरिक अशांति
उर्जा संकट ने पूरे पाकिस्तान में व्यापक नागरिक अशांति को जन्म दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा हाल ही में पेट्रोल की कीमतों में 80 पाकिस्तानी रुपये की कमी करके इसे 378 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर करने के बावजूद इससे पहले 42.7% की मूल्य वृद्धि ने लागत को 321.17 रुपये से बढ़ाकर 458.41 पाकिस्तानी रुपये कर दिया। इससे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और ईंधन की कमी हो गई।
भारत बहुत आगे... हमारे पास एक दिन का भी तेल नहीं
पाकिस्तानी पेट्रोलियम मंत्री मुसादिक मलिक ने स्पष्ट कहा, हम भारत की तरह बहुत आगे नहीं हैं। वह बहुत आगे हैं, उसके पास 60-70 दिनों का तेल. भंडार है, जिसे वह सिर्फ एक हस्ताक्षर से जारी कर सकता है। मंत्री ने आगे बताया कि पाकिस्तान के पास एक दिन के लिए भी पेट्रोल भंडार नहीं है, जिससे देश का ऊर्जा ढांचा बाहरी व्यवधानों के सामने पूरी तरह असुरक्षित हो जाता है। उन्होंने भारत की आर्थिक मजबूती का श्रेय उसकी बेहतर विदेशी मुद्रा स्थिति और रणनीतिक योजना को दिया। कहा-भारत के पास न केवल 600 अरब डॉलर का भंडार है, बल्कि वे रणनीतिक भंडार भी बनाए रखते हैं। इससे उन्हें इस संकट से निपटने में मदद मिलती है।
भारत नहीं आईएमएफ का हिस्सा
मलिक ने अपने नकदी संकट से निपटने के लिए आईएमएफ के आगे हाथ फैलाने के दुष्परिणामों पर इशारा करते हुए कहा, भारत आईएमएफ कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, और तेल की कीमतों में वृद्धि के दौरान उसने कराधान कम करके खुद को सुरक्षित रखा। उनके पास पर्याप्त वित्तीय गुंजाइश है। भारत को वित्तीय आजादी है, वहीं पाकिस्तान आईएमएफ के बंधन में जकड़ा हुआ है।
समा टीवी को एक इंटरव्यू में मलिक ने कहा, हमारे पास रणनीतिक तेल भंडार नहीं, सिर्फ वाणिज्यिक भंडार हैं। हमारे पास 5-7 दिनों का ही कच्चा तेल है। तेल कंपनियों के पास मौजूद परिष्कृत उत्पाद सिर्फ 20-21 दिन ही चल सकते हैं। यानी हालात और बिगड़े तो पाकिस्तान टूट जाएगा
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