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गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत बनाने की पाक की योजना में इस शख्स की है अहम भूमिका

Wed, 23 Sep 2020 05:49 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 23 Sep 2020 05:49 PM IST
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Pakistan NSA Moeed Yusuf is a key player in Gilgit Move that suits China
पाकिस्तान के एनएसए मोइद यूसुफ - फोटो : twitter.com/yusufmoeed

पाकिस्तान की सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने पिछले सप्ताह इस्लामाबाद की योजनाओं को सार्वजनिक करने से पहले देश के राजनेताओं के साथ एक बैठक की थी। इस बैठक में पाकिस्तान के कब्जे वाले उत्तरी क्षेत्रों में विवादित गिलगित-बाल्टिस्तान में एक प्रांत बनाने की कवायद शुरू की गई। हालांकि, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि इस पांचवें प्रांत के निर्माण का काम सेना अकेले नहीं कर रही है। इसमें प्रधानमंत्री इमरान खान के खास एक और शख्स का नाम शामिल है।

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यह नाम है पाकिस्तान के युवा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) मोइद डब्ल्यू यूसुफ का। 39 वर्षीय मोइद यूसुफ राष्ट्रीय सुरक्षा डिवीजन पर प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक रहे हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान की संवैधानिक स्वायत्तता को रद्द करने और उसे पाकिस्तान के पांच प्रांतों में से एक के रूप में शामिल करने के फैसले में उनकी अहम भूमिका रही है।
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पाकिस्तान में गिलगित-बाल्टिस्तान का शामिल होने से चीन को काफी फायदा है। उसने चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में लाखों डालर का निवेश किया है। हालांकि, इसमें से अधिकतर कर्ज है। चीन इस गलियारे का निर्माण मलक्का स्ट्रेट तक एक वैकल्पिक मार्ग बनाने के लिए कर रहा है। यह हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच प्रमुख जहाज मार्ग है। 
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बीते कुछ सालों में सीपीईसी की सुरक्षा के लिए सैन्य तैनाती भी बढ़ाई गई है। स्थानीय लोग इस गलियारे के निर्माण का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और इससे लोगों को कोई खास फायदा नहीं होने वाला है। इस गलियारे के निर्माण के खिलाफ अक्सर रैलियां निकाली जा रही हैं और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। 

गिलगित-बाल्टिस्तान की विवादित स्थिति को बदलने का प्रयास यूसुफ के उस प्रोजेक्ट के साथ भी मेल खाता है जिसके तहत वह भारत के साथ नियंत्रण रेखा (एलओसी) को अंतरराष्ट्रीय सीमा में बदलना चाहते हैं। साल 2009 में यूसुफ ने एलओसी को अंतरराष्ट्रीय सीमा में परिवर्तित किए जाने की वकालत की थी, जिसके तहत दोनों पक्षों द्वारा जम्मू-कश्मीर के संबंधित हिस्सों पर संप्रभु नियंत्रण बनाए रखने की बात कही गई थी।

यूसुफ ने अपनी छवि भारत-पाक शांति और यूनाइटेड स्टेस्ट इंस्टीट्यूट ऑफ पीस (यूएसआईपी) में कश्मीर मुद्दे के प्रस्ताव के समर्थक के रूप में विकसित है। अमेरिकी व्यवस्था पर उनकी समझ और नजदीकी ने उन्हें पाकिस्तानी नेतृत्व के लिए प्रमुख रणनीतिक चिंतक के पद पर पहुंचाया है। हालांकि, राजनीतिक और राजनयिक हितों के लिए आंतकवाद को पाकिस्तान के समर्थन को लेकर उनके विचार अभी साफ तौर पर सामने नहीं आए हैं।

जब इमरान खान ने दिसंबर 2019 में उन्हें अपना विशेष सलाहकार चुना था, उससे कुछ महीने पहले यूएसआईपी में वह विवादों में आ गए थे। इस दौरान सार्वजनिक संस्थानों को पाकिस्तानी अधिकारियों के ठहरने का ठिकाना बनाए जाने पर सवाल उठाए गए थे। दक्षिण एशियाई मामलों की एक विशेषज्ञ डॉ. क्रिस्टीन फेयर ने भी आरोप लगाया था कि यूसुफ यूएसआईपी में अपनी पहुंच और पद का इस्तेमाल करते हुए संवेदनशील जानकारियां पाक एजेंसियों के पहुंचाते रहे हैं।


भारतीय रक्षा अधिकारी कहते हैं कि उन्होंने अभी तक ऐसा कोई घटनाक्रम नहीं देखा है जिसमें मोइद यूसुफ को यह कहते हुए सुना गया हो कि वह भारत में सक्रिय आतंकियों के सहयोग को पाकिस्तान खत्म करना चाहते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हम यह जानते हैं कि वह ऐसे विचार लाए हैं कि पाकिस्तान को कश्मीर मामले पर मध्यस्थता की मांग नहीं करनी चाहिए क्योंकि अगर अमेरिका किसी एकपक्षीय योजना को लाया तो पाकिस्तान के लिए स्थिति ठीक नहीं होगी।

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