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पाकिस्तान: जनाक्रोश को दबाने के लिए बलूचिस्तान में कार्रवाई तेज; अफगान शरणार्थियों के 28 और शिविर बंद कराए गए
Sat, 18 Oct 2025 05:07 AM IST
शिव शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बवूचिस्तान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बवूचिस्तान
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sat, 18 Oct 2025 05:07 AM IST
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बलूचिस्तानष
- फोटो : ANI
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पाकिस्तान में बलूचिस्तान के भीतर लोगों का विद्रोह लगातार बढ़ रहा है। बलोच यकजेहती समिति (बीवाईसी) ने पाकिस्तान सरकार पर बलोचों के हिरासत में लिए गए नेताओं के प्रति जनाक्रोश दबाने के लिए कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। बलोच नेता और बीवाईसी के नेता सम्मी दीन बलोच ने कहा, बलूचिस्तान में सरकार का विरोध करने वाले कार्यकर्ता छह माह से भी ज्यादा समय से हिरासत में हैं और उनका अज्ञात जगह उत्पीड़न किया जा रहा है।
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इन कार्यकर्ताओं के खिलाफ पाकिस्तान की किसी भी एजेंसी ने कोई औपचारिक आरोप तक दर्ज नहीं किए हैं। हिरासत में लिए गए इन नेताओं के नामों में डॉ. महरंग बलोच, बीबर्ग बलोच, शाह जी बलोच, बीबो बलोच और गुलजादी बलोच जैसी शख्सीयतें शामिल हैं। उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित एफआईआर के तहत अवैध हिरासत में रखा गया है। सरकार ने शुरुआत में इन कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए कानूनों का दुरुपयोग भी किया। अधिकारियों ने अब सभी आगामी सुनवाई क्वेटा जिला जेल में स्थानांतरित कर दी हैं, जो पारदर्शिता को दबाने और जन आंदोलन के दमन की एक सोची-समझी चाल है। इसे लेकर बलोच उग्रवादी संगठनों ने विद्रोह का रास्ता अपनाया है।
संस्थागत दमन के संकेत
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने जानबूझकर अदालती कार्यवाही में देरी की है और सुनवाई तक जनता की पहुंच को भी प्रतिबंधित किया है। बीवाईसी ने कहा, मुकदमों को सलाखों के पीछे ले जाकर, सरकार अपने अन्याय को लोगों से छुपाना चाहती है।
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अफगान शरणार्थियों के 28 और शिविर बंद कराए गए
पेशावर। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अफगान शरणार्थियों के 28 और शिविर बंद करा दिए गए हैं। अवैध विदेशी प्रवासियों के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई तेज करते हुए गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की और पेशावर में आठ, नौशेरा में तीन, हंगू में पांच, कोहाट में चार और मर्दान में दो शिविर बंद कराए। इसी तरह स्वाबी में दो, बुनेर में एक और दीर जिलों में तीन शिविर बंद कराए गए हैं। इससे पहले, प्रांत के डेरा इस्माइल खान, लक्की मरवत और हरिपुर में भी इसी तरह की अधिसूचनाएं जारी की गई थीं। पाकिस्तान में 17 लाख से अधिक पंजीकृत अफगान शरणार्थी हैं जिनमें से कई बिना दस्तावेजों के रह रहे हैं। एजेंसी
पाकिस्तान के काबुल पर ड्रोन हमले
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने एक दिन पहले काबुल में दो ड्रोन हमले किए। ये हमले युद्धविराम की घोषणा के बाद किए गए। काबुल पुलिस प्रमुख के प्रवक्ता खालिद जदरान ने कहा, पहले हमले में एक नागरिक के घर को निशाना बनाया गया, जबकि दूसरा हमला एक बाजार पर हुआ। उन्होंने हताहतों की स्पष्ट संख्या नहीं बताई, लेकिन स्थानीय अस्पतालों के डॉक्टरों ने बताया कि 5 लोगों की मौत हुई व 24 से अधिक घायल हुए हैं। बीवाईसी ने आतंकवाद निरोधी अदालत (एटीसी) के बजाय जेल की चारदीवारी के अंदर सुनवाई करने के सरकार के फैसले की कड़ी निंदा की। सम्मी दीन ने इस कदम को संस्थागत दमन वाला संकेत बताया।
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द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इन कार्यकर्ताओं के खिलाफ पाकिस्तान की किसी भी एजेंसी ने कोई औपचारिक आरोप तक दर्ज नहीं किए हैं। हिरासत में लिए गए इन नेताओं के नामों में डॉ. महरंग बलोच, बीबर्ग बलोच, शाह जी बलोच, बीबो बलोच और गुलजादी बलोच जैसी शख्सीयतें शामिल हैं। उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित एफआईआर के तहत अवैध हिरासत में रखा गया है। सरकार ने शुरुआत में इन कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए कानूनों का दुरुपयोग भी किया। अधिकारियों ने अब सभी आगामी सुनवाई क्वेटा जिला जेल में स्थानांतरित कर दी हैं, जो पारदर्शिता को दबाने और जन आंदोलन के दमन की एक सोची-समझी चाल है। इसे लेकर बलोच उग्रवादी संगठनों ने विद्रोह का रास्ता अपनाया है।
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संस्थागत दमन के संकेत
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने जानबूझकर अदालती कार्यवाही में देरी की है और सुनवाई तक जनता की पहुंच को भी प्रतिबंधित किया है। बीवाईसी ने कहा, मुकदमों को सलाखों के पीछे ले जाकर, सरकार अपने अन्याय को लोगों से छुपाना चाहती है।
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अफगान शरणार्थियों के 28 और शिविर बंद कराए गए
पेशावर। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अफगान शरणार्थियों के 28 और शिविर बंद करा दिए गए हैं। अवैध विदेशी प्रवासियों के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई तेज करते हुए गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की और पेशावर में आठ, नौशेरा में तीन, हंगू में पांच, कोहाट में चार और मर्दान में दो शिविर बंद कराए। इसी तरह स्वाबी में दो, बुनेर में एक और दीर जिलों में तीन शिविर बंद कराए गए हैं। इससे पहले, प्रांत के डेरा इस्माइल खान, लक्की मरवत और हरिपुर में भी इसी तरह की अधिसूचनाएं जारी की गई थीं। पाकिस्तान में 17 लाख से अधिक पंजीकृत अफगान शरणार्थी हैं जिनमें से कई बिना दस्तावेजों के रह रहे हैं। एजेंसी
पाकिस्तान के काबुल पर ड्रोन हमले
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने एक दिन पहले काबुल में दो ड्रोन हमले किए। ये हमले युद्धविराम की घोषणा के बाद किए गए। काबुल पुलिस प्रमुख के प्रवक्ता खालिद जदरान ने कहा, पहले हमले में एक नागरिक के घर को निशाना बनाया गया, जबकि दूसरा हमला एक बाजार पर हुआ। उन्होंने हताहतों की स्पष्ट संख्या नहीं बताई, लेकिन स्थानीय अस्पतालों के डॉक्टरों ने बताया कि 5 लोगों की मौत हुई व 24 से अधिक घायल हुए हैं। बीवाईसी ने आतंकवाद निरोधी अदालत (एटीसी) के बजाय जेल की चारदीवारी के अंदर सुनवाई करने के सरकार के फैसले की कड़ी निंदा की। सम्मी दीन ने इस कदम को संस्थागत दमन वाला संकेत बताया।