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वाशिंगटन में आईएसआई: पाकिस्तान की बन रही है अमेरिका से निकटता और चीन से दूरी!

Wed, 25 May 2022 05:12 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 25 May 2022 05:12 PM IST
सार

नदीम अंजुम की यात्रा से ठीक पहले पाकिस्तान के नए विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी ने अमेरिका की यात्रा की थी। बिलावल वाशिंगटन में हुए खाद्य सुरक्षा सम्मेलन में भाग लेने वहां गए थे, लेकिन उसी दौरान बीते 17 मई को वाशिंगटन में उनकी अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन से बातचीत हुई...

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Pakistan intelligence chief Nadeem Anjum visited the US this month secretly
आईएसआई चीफ नदीम अंजुम - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

क्या प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के शासनकाल में पाकिस्तान की चीन से दूरी और अमेरिका से निकटता बन रही है? कई कूटनीति विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा होने के ठोस संकेत हैं। एक ताजा खबर के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी- इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के प्रमुख जनरल नदीम अंजुम ने इसी महीने अमेरिका की यात्रा की, जिसे गुप्त रखा गया। बताया जाता है कि वाशिंगटन में अंजुम की अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान और अमेरिकी खुफिया एजेंसी- सीआईए के निदेशक विलियम बर्न्स से बातचीत हुई।

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पाकिस्तान के कूटनीति पर्यवेक्षक नदीम अंजुम की अमेरिका यात्रा को बेहद अहम मान रहे हैं। कुछ पर्यवेक्षकों ने कहा है कि अंजुम की यात्रा से अफगानिस्तान मसले पर पाकिस्तान और अमेरिका के बीच मेल-मिलाप का नया दौर शुरू हुआ है। इस यात्रा को इस बात से भी जोड़ कर देखा गया है कि गुजरे महीनों में पाकिस्तान के अफगान तालिबान से संबंध बिगड़े हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के पाकिस्तान में किए गए हमलों को लेकर इन दोनों के बीच तनाव बढ़ा है। पाकिस्तान सरकार का आरोप है कि टीटीपी अफगानिस्तान की जमीन से हमले संचालित कर रहा है।

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बिलावल भी गए थे अमेरिका

नदीम अंजुम की यात्रा से ठीक पहले पाकिस्तान के नए विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी ने अमेरिका की यात्रा की थी। बिलावल वाशिंगटन में हुए खाद्य सुरक्षा सम्मेलन में भाग लेने वहां गए थे, लेकिन उसी दौरान बीते 17 मई को वाशिंगटन में उनकी अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन से बातचीत हुई। बताया जाता है कि दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत में भी मुख्य मुद्दा अफगानिस्तान का ही रहा।

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कूटनीति विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका चीन को घेरने की अपनी रणनीति के तहत अब पाकिस्तान को खास अहमियत दे रहा है। चीन ने चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कोरिडोर (सीपीईसी) परियोजना में लगभग 60 अरब डॉलर का निवेश किया है। सीपीईसी चीन की महत्त्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। बताया जाता है कि अमेरिका की रणनीति सीपीईसी के कारण चीन और पाकिस्तान में बने करीबी रिश्तों में पेंच डालने की है।

समझा जाता है कि हाल के समय में चीन और पाकिस्तान के रिश्तों में कुछ कड़वाहट पैदा हुई है। खासकर पाकिस्तान में जिस तरह चीनी नागरिकों को आतंकवादी हमलों का शिकार बनाया गया, उससे चीन खफा हुआ है। पाकिस्तान की संसद के ऊपरी सदन सीनेट की रक्षा समिति के अध्यक्ष मुशाहिद हुसैन सईद ने कहा है- ‘चीन नागरिकों की रक्षा कर सकने की पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की क्षमता में चीन का भरोसा डोल गया है। इससे चीन में स्वाभाविक चिंता पैदा हुई है।’

चीन से नहीं मिली मदद

इस बीच देश में गहरा रहे आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान को चीन से जितनी मदद की उम्मीद थी, वह नहीं मिली है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से सहायता प्राप्त करना उसकी प्राथमिकता बन गई है। पाकिस्तान की नई सरकार की राय है कि बिना अमेरिकी सद्भावना हासिल किए आईएमएफ से जरूरत के मुताबिक सहायता मिलना संभव नहीं है।



पाकिस्तान के एक कूटनीतिज्ञ ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा- ‘चीन या सऊदी अरब से और मदद मिलने की उम्मीद अब नहीं है। ऐसे में आईएमएफ हमारे लिए निर्णायक महत्त्व का हो गया है।’ समझा जाता है कि इन परिस्थितियों के बीच शहबाज शरीफ सरकार ने अमेरिका से निकटता बनाने का फैसला किया है। जानकारों के मुताबिक उसका स्वाभाविक परिणाम चीन से दूरी बढ़ने के रूप में निकलेगा।

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