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आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तानः बदहाली को तालिबान बना रहा मौका, राजसत्ता पर साध रहा है सीधा निशाना

Mon, 30 Jan 2023 05:06 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 30 Jan 2023 05:06 PM IST
सार

अपनी नई रणनीति के तहत टीटीपी पाकिस्तानी समाज में अधिक पैठ बनाने में जुट गया है। वह यहां खुद को इस्लाम के अग्रिम दस्ते के रूप में पेश कर रहा है।

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pakistan economic crisis Taliban is making plight an opportunity
Pakistan Economy - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान पर एक साथ कई गंभीर मुसीबतें टूट पड़ी हैं। एक तरफ लोग महंगाई और जरूरी चीजों की कमी से परेशान हैं, उसी समय आतंकवादी गुट तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का खतरा गंभीर रूप लेता जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि शहबाज शरीफ सरकार इनमें से किसी चुनौती का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं कर पा रही है। 

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अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपी एक खबर के मुताबिक टीटीपी ने पाकिस्तान को निशाना बनाने की एक नई विस्तृत रणनीति अपना ली है। इसके संकेत हाल इस आतंकवादी संगटन के बयानों से मिले हैं। बताया जाता है कि इस रणनीति को टीटीपी के मौजूदा प्रमुख मौलवी नूर वली मेहसूद ने तैयार किया है। टीटीपी को अफगान तालिबान का समर्थन हासिल है। इसलिए वह अपनी रणनीति को अधिक आक्रामक ढंग से अंजाम दे रहा है। 
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अपनी नई रणनीति के तहत टीटीपी पाकिस्तानी समाज में अधिक पैठ बनाने में जुट गया है। वह यहां खुद को इस्लाम के अग्रिम दस्ते के रूप में पेश कर रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक इस रणनीति के तहत वह मुस्लिम बहुल इस देश में लोगों की धार्मिक भावनाओं का पूरा लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। कुछ समय पहले टीटीपी प्रमुख नूर वली मेहसूद ने तुर्किये एक मीडिया संस्थान को इंटरव्यू दिया। उसमें उसने कहा- ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के मुजाहिदीन इस इस्लामी राष्ट्र की संतान हैं। सरकार चाहे जितनी कार्रवाइयां कर ले, इस इस्लामी समाज में मुजाहिदीन के प्रभाव को वह खत्म नहीं कर सकती।’ 
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पेशावर यूनिवर्सिटी में राजनीतिक समाजशास्त्र की प्रोफेसर नायला काजी ने कहा है- ‘टीटीपी अभी तक पाकिस्तानी समाज में ज्यादा जगह नहीं बना पाया है। पाकिस्तानी समाज में इस्लामिक रुझान है। लोग हर इस्लामी चीज से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। फिर भी आम जन धर्म के नाम पर हिंसा का समर्थन नहीं करते। लेकिन पिछले दो दशकों में पाकिस्तानी समाज में उग्रता बढ़ी है और कुछ मौकों पर धर्म के नाम पर हुई हिंसा को लोगों का समर्थन मिला है। टीटीपी इसी स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश में है।’  

विश्लेषक डॉ. रजा खान के मुताबिक इस बात को समझने की जरूरत है कि टीटीपी ने पाकिस्तान में मौजूद राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों की गहरी समझ हासिल कर ली है। वह इस बात का प्रचार कर रहा है कि जब तक देश में पश्चिमी ढंग की राजनीतिक प्रणाली रहेगी, लोगों की मुसीबत बनी रहेगी। डॉ. खान के मुताबिक पाकिस्तान में संसदीय प्रणाली से कुछ खास समूहों, परिवारों, संस्थाओं और व्यक्तियों को ही फायदा पहुंचा है। इसलिए बहुत से लोगों को टीटीपी की इस दलील में दम नजर आता है। 


पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि टीटीपी अब खुद को एक राजनीतिक ताकत के रूप में उभारने की कोशिश में जुट गया है। यह बात उसके नेता अपने बयानों और मीडिया संस्थानों को दिए इंटरव्यू में खुल कर कह रहे हैं। उसके नेता यह दावा भी कर रहे हैं कि टीटीपी लोगों को मौजूदा राजनीतिक प्रणाली से मुक्ति दिलाने के लिए हिंसक हमले कर रहा है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि टीटीपी की ये नई रणनीति पाकिस्तान के लिए गंभीर खतरा है। मौजूदा बदहाली के बीच यह देश में बड़ी सियासी उथल-पुथल की जड़ बन सकती है।

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