Pakistan: हिंसा और असुरक्षा के माहौल के बीच पाकिस्तान में कैसे आएगा विदेशी निवेश?
Pakistan: कनाडा की बड़ी स्वर्ण कंपनी बैरिक गोल्ड ने पाकिस्तान के अशांत दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में कारोबार शुरू करने की इच्छा जताई है। बलूचिस्तान प्रांत के रेको डिग और चगाई इलाकों के बारे में माना जाता है कि वहां तांबे और सोने का दुनिया का ऐसा सबसे बड़ा भंडार है, जिसे अभी विकसित नहीं किया गया है...
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विदेशी निवेशकों की सुरक्षा का सवाल पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। पहले ये मुद्दा चीन उठा रहा था। लेकिन अब दूसरे देशों के निवेशकों ने भी पाकिस्तान सरकार से असुरक्षा की समस्या को हल करने की मांग की है।
कनाडा की बड़ी स्वर्ण कंपनी बैरिक गोल्ड ने पाकिस्तान के अशांत दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में कारोबार शुरू करने की इच्छा जताई है। बलूचिस्तान प्रांत के रेको डिग और चगाई इलाकों के बारे में माना जाता है कि वहां तांबे और सोने का दुनिया का ऐसा सबसे बड़ा भंडार है, जिसे अभी विकसित नहीं किया गया है। बैरिक गोल्ड ने अभी क्षेत्र में कारोबार की संभावना जानने के लिए अध्ययन कर रही है। लेकिन वो तभी वहां निवेश करेगी, अगर पाकिस्तान सरकार उसे सुरक्षा का भरोसा दे पाई।
कंपनी फिलहाल बलूच अलगाववादियों की हिंसा को लेकर चिंतित है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) नाम के संगठन ने बीते महीनों में इस क्षेत्र में ना सिर्फ चीनी कंपनियों, बल्कि पाकिस्तान के सुरक्षा बलों पर भी घातक हमले किए हैं। बलूच बागी गुटों के मोर्चे बीएआरएस ने बैरिक गोल्ड को चेतावनी दी है कि वह बलूचिस्तान के खनन संसाधनों के अलग रहे, वरना उसे हमलों का शिकार बनना पड़ेगा। बीएलए भी बीएआरएस में शामिल है। इसमें बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) भी शामिल है।
बीएलएफ के नेता अल्लाह नजर ने पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश के जरिए बैरिक गोल्ड के लिए चेतावनी जारी की। अलगाववादी गुटों का कहना है कि विदेशी कंपनियों को पाकिस्तान को लाभ पहुंचाने के लिए उनके इलाके के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं करना चाहिए। इन संगठनों की हाल की गतिविधियों को देखते हुए अल्लाह नजर की चेतावनी को गंभीरता से लिया जा रहा है।
वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक विल्सन सेंटर में एशिया प्रोग्राम के डिप्टी डायरेक्टर माइकल कुगेलमैन ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘हमने हाल के महीनों में देखा है कि बलूच बागियों ने अपनी गतिविधियां किस तरह फैला ली हैं। उनमें निशाना साधने की क्षमता निश्चित रूप से हैं। वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इसलिए बैरिक गोल्ड को चिंतित होना चाहिए।’
लेकिन अभी ऐसा लगता है कि बैरिक गोल्ड जोखिम उठाने के मूड में है। 13 देशों में 16 जगहों पर खनन में जुटी ये कंपनी बलूचिस्तान में निवेश करने के लिए तैयार दिखती है। उसकी योजना पांच वर्षों में रेको डिग क्षेत्र में सात बिलियन डॉलर का निवेश करने की है। पाकिस्तान सरकार उसे खनन के लिए 30 वर्ष की लीज देगी।
पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों की राय है कि रेको डिग में खनन में प्रगति हुई, तो उससे दूसरी विदेशी कंपनियां भी पाकिस्तान में निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगी। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इस राह में कई बड़ी चुनौतियां हैं। सिंगापुर स्थित एस राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में सीनियर फेलॉ जेम्स डॉरसी ने कहा है- ‘पाकिस्तान में विदेशी निवेश का आना राजनीतिक स्थिरता पर निर्भर करेगा, जिसका अभी अभाव है।’
पाकिस्तान में उग्रवाद के विश्लेषक फखर काकाखेल ने वेबसाइट निक्कई एशिया से बातचीत में कहा कि तुरंत तो बैरिक गोल्ड के लिए कोई खतरा पैदा नहीं होगा, लेकिन लंबी अवधि में ऐसा हो सकता है। यह इस पर निर्भर करेगा कि बलूच बागी कितने ताकतवर बन रहते हैं।