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पाकिस्तान: इस्लामाबाद में औरत मार्च हुआ हिंसक, पुलिस ने महिलाओं पर भांजी लाठियां
Thu, 09 Mar 2023 06:21 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
एएनआई, इस्लामाबाद
एएनआई, इस्लामाबाद
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Thu, 09 Mar 2023 06:21 AM IST
सार
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने ट्वीट इस्लामाबाद पुलिस द्वारा औरत आजादी मार्च में महिलाओं और अन्य पर लाठीचार्ज करने की निंदा की।
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औरत मार्च के दौरान लाठीचार्ज करते पुलिसकर्मी
- फोटो : twitter
विस्तार
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित एक रैली औरत मार्च बुधवार को हिंसक हो गया। इस दौरान पुलिस और प्रदशकारियों के बीच झड़प हो गई। प्रेस क्लब के बाहर विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं और ट्रांसजेंडर के इकट्ठा होने पर हिंसक लड़ाई शुरू हो गई, जहां पुलिस ने उपस्थित लोगों को डंडों से पीटा और रैली को कथित तौर पर "रोकने" की कोशिश की।
पुलिस ने कहा कि रैली में शामिल होने की कोशिश कर रहे ट्रांसजेडर की वजह से बवाल शुरू हुआ। मार्च में शामिल महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रैली को रोकने की बहुत कोशिश की। रैली के दौरान, प्रतिभागियों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए नारे लगाए। कम समय में ही इस्लामाबाद प्रेस क्लब के बाहर गंभीर अव्यवस्था फैल गई और मार्च करने वालों ने सरकार और मीडिया के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए।
महिला पत्रकार को भी आई चोट
कार्यक्रम को कवर करते समय पत्रकारों भी लड़ाई के लपेट में आ गए। एक महिला रिपोर्टर और एक स्थानीय न्यूज चैनल के कैमरामैन को भी चोटें आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संघीय जलवायु परिवर्तन मंत्री शेरी रहमान ने भी रैली में भाग लिया और भड़की हिंसा की कड़ी निंदा की। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर कहा कि औरत आज़ादी मार्च के मित्र सही में परेशान हैं। इस्लामाबाद पुलिस के पास एक छोटे से शांतिपूर्ण जुलूस पर लाठीचार्ज करने का कोई मतलब नहीं था। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, 'मैं इस हिंसा की कड़ी निंदा करती हूं और घटना की जांच की मांग की। विवाद के बाद, कई लोगों और संगठनों ने प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई और क्रूरता की निंदा की।
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मानवाधिकार आयोग ने भी कड़ी निंदा
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने ट्वीट इस्लामाबाद पुलिस द्वारा औरत आजादी मार्च में महिलाओं और अन्य पर लाठीचार्ज करने की निंदा की। औरत मार्च का आयोजन घोटकी में भी किया गया था, जहां मार्च करने वालों ने नारा लगाया, "जब तक महिलाएं मारी जा रही हैं, हम लड़ते रहेंगे।
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पुलिस ने कहा कि रैली में शामिल होने की कोशिश कर रहे ट्रांसजेडर की वजह से बवाल शुरू हुआ। मार्च में शामिल महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रैली को रोकने की बहुत कोशिश की। रैली के दौरान, प्रतिभागियों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए नारे लगाए। कम समय में ही इस्लामाबाद प्रेस क्लब के बाहर गंभीर अव्यवस्था फैल गई और मार्च करने वालों ने सरकार और मीडिया के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए।
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महिला पत्रकार को भी आई चोट
कार्यक्रम को कवर करते समय पत्रकारों भी लड़ाई के लपेट में आ गए। एक महिला रिपोर्टर और एक स्थानीय न्यूज चैनल के कैमरामैन को भी चोटें आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संघीय जलवायु परिवर्तन मंत्री शेरी रहमान ने भी रैली में भाग लिया और भड़की हिंसा की कड़ी निंदा की। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर कहा कि औरत आज़ादी मार्च के मित्र सही में परेशान हैं। इस्लामाबाद पुलिस के पास एक छोटे से शांतिपूर्ण जुलूस पर लाठीचार्ज करने का कोई मतलब नहीं था। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, 'मैं इस हिंसा की कड़ी निंदा करती हूं और घटना की जांच की मांग की। विवाद के बाद, कई लोगों और संगठनों ने प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई और क्रूरता की निंदा की।
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मानवाधिकार आयोग ने भी कड़ी निंदा
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने ट्वीट इस्लामाबाद पुलिस द्वारा औरत आजादी मार्च में महिलाओं और अन्य पर लाठीचार्ज करने की निंदा की। औरत मार्च का आयोजन घोटकी में भी किया गया था, जहां मार्च करने वालों ने नारा लगाया, "जब तक महिलाएं मारी जा रही हैं, हम लड़ते रहेंगे।