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इंटरनेट इस्तेमाल की आजादी के नाम पर बेड़ियों में जकड़ी हुई है पाक की जनता
Wed, 06 Nov 2019 09:08 PM IST
अमित मंडल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमित मंडल
Updated Wed, 06 Nov 2019 09:08 PM IST
सार
- 100 सबसे खराब देशों की सूची में शामिल हुआ पाक का नाम
- समाचार साइटों पर झूठी सामग्री फैलाने और वेबसाइटों को अवरुद्ध करने में आया नाम
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
भारत का कोई भी व्यक्ति पूरी दुनिया पर अपनी नजर रख सकता है, क्योंकि यहां सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर कोई पाबंदी नहीं है। लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान में ऐसा नहीं है। दरअसल पाकिस्तान ने अपनी जनता को इस मामले में बेड़ियों में जकड़ा हुआ है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने पाकिस्तान को लगातार नौवें साल इंटरनेट के इस्तेमाल के मामले में स्वतंत्र नहीं घोषित किया है, देश ने 2019 में पिछले साल से भी बदतर नंबर हासिल किए। जिसके बाद पाक 100 सबसे खराब देशों की श्रेणी (वो देश जहां खुलकर इंटरनेट के इस्तेमाल की आजादी नहीं है) में 100 में से 27वें से 26वें नंबर पर आ गया है।
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अंतरराष्ट्रीय वॉचडॉग, द फ्रीडम हाउस ने मंगलवार को 2019 के लिए अपनी फ्रीडम ऑन द नेट की रिपोर्ट जारी की, इसे ‘द क्राइसिस ऑफ सोशल मीडिया’ का शीर्षक दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, जून 2018 से लेकर मई 2019 के बीच वैश्विक इंटरनेट स्वतंत्रता में भारी गिरावट दर्ज की गई, यानी इंटरनेट की आजादी कम हुई। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान को सबसे खराब देशों की श्रेणी, जिनमें इंटरनेट की आजादी नहीं है, उनमें 26 नंबर पर रखा गया है।
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चीन भी शामिल
वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो पाकिस्तान इंटरनेट और डिजिटल मीडिया की स्वतंत्रता के मामले में सबसे खराब 10 देशों में से एक है। क्षेत्रीय रैंकिंग के मामले में, वियतनाम और चीन के बाद पाकिस्तान तीसरा सबसे खराब देश बन गया है। इंटरनेट की स्वतंत्रता में गिरावट के अलावा, रिपोर्ट में पाकिस्तान में सूचनात्मक रणनीति के माध्यम से चुनाव में हेरफेर पाया गया, जैसे कि समाचार साइटों के समन्वित उपयोग, झूठी या भ्रामक सामग्री फैलाना। इसके साथ ही कनेक्टिविटी पर जानबूझकर प्रतिबंध लगाने और वेबसाइटों को अवरुद्ध करने जैसी बातें सामने आईं।
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डिजिटल फाउंडेशन की रिपोर्ट ने किया खुलासा
पाकिस्तान के लिए ये रिपोर्ट डिजिटल राइट्स फाउंडेशन द्वारा लिखी गई। डीआरएफ के कार्यकारी निदेशक ने कहा, ‘पाकिस्तान में इंटरनेट अधिक असुरक्षित और कम समावेशी है। रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तानी यूजर्स को अपने डेटा को लेकर चिंता सताती रहती है। वहां, ऑनलाइन एक्टिविटी के बाद ब्लैकमेल की बात भी सामने आती रही हैं।