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Hindi News ›   World ›   On January 2, agitation in Kazakhstan began on the issue of raising the price of LPG, Later the demonstrators turned violent

कजाखस्तान का सबक: ऊर्जा की महंगाई बन सकती है बड़े उथल-पुथल की वजह

Mon, 10 Jan 2022 04:09 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नूर सुल्तान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नूर सुल्तान Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 10 Jan 2022 04:09 PM IST
सार

विश्लेषकों का कहना है कि कई देशों में तानाशाह नेताओं ने जरूरत की चीजों को सस्ते दाम पर उपलब्ध करवा कर अपने लिए जन समर्थन बनाए रखा है। लेकिन बढ़ती लागत के कारण अब सरकारी सब्सिडी के जरिए तेल, गैस या बिजली को सस्ती दरों पर मुहैया कराना मुश्किल होता जा रहा है। कजाखस्तान के पास पेट्रोलियम के समृद्ध भंडार हैं...

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On January 2, agitation in Kazakhstan began on the issue of raising the price of LPG, Later the demonstrators turned violent
कजाखस्तान में अशांति - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

कजाखस्तान में पिछले हफ्ते हुई हिंसा ने यह साफ दिया है कि अगर सरकारों ने ऊर्जा की कीमतों को काबू में रखने की कोशिश नहीं की, तो उसके कैसे नतीजे हो सकते हैं। कजाखस्तान में दो जनवरी को जन प्रदर्शन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कीमत बढ़ाने के मुद्दे पर ही शुरू हुए। बाद में प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया। इन प्रदर्शनों के दबाव में कजाखस्तान सरकार को कीमत में बढ़ोतरी वापस लेनी पड़ी।

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कजाखस्तान में पेट्रोलियम के समृद्ध भंडार

विश्लेषकों का कहना है कि कई देशों में तानाशाह नेताओं ने जरूरत की चीजों को सस्ते दाम पर उपलब्ध करवा कर अपने लिए जन समर्थन बनाए रखा है। लेकिन बढ़ती लागत के कारण अब सरकारी सब्सिडी के जरिए तेल, गैस या बिजली को सस्ती दरों पर मुहैया कराना मुश्किल होता जा रहा है। कजाखस्तान के पास पेट्रोलियम के समृद्ध भंडार हैं। वहां ज्यादातर तेल और गैस की खुदाई अमेरिकी कंपनियां एक्सोनमोबिल और शेवरॉन करती हैँ। ये कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए पेट्रोलियम उत्पादों को निर्यात करने को तरजीह दे रही हैँ।  

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वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक कजाखस्तान जैसी समस्या कई दूसरे देशों को भी झेलनी पड़ रही है। सऊदी अरब ने पिछले साल जुलाई में प्राकृतिक गैस की कीमत 2.18 रियाल (50 सेंट) तय कर दी। लेकिन उससे तेल निकालने वाली कंपनियां खुश नहीं हैं। वे तेल और गैस की कीमत तय करने के तरीके में सुधार की मांग कर रही हैं।
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ईरान ने 2019 में गैस की कीमत में तीन गुना बढ़ोतरी कर दी थी। उससे देश भर में व्यापक जन प्रदर्शन भड़क उठे थे। उसके बाद से ईरान सरकार ने तेल या गैस की कीमत बढ़ाने की हिम्मत नहीं दिखाई है।

यूरोप के कई देशों में महंगाई की समस्या

लेकिन समस्या सिर्फ कम विकसित देशों में ही नहीं है। यूरोप के देश भी ऊर्जा की महंगाई की समस्या का सामना कर रहे हैं। फ्रांस में ईंधन के दाम बढ़ाने के सवाल को लेकर ही ‘येलो वेस्ट आंदोलन’ शुरू हुआ था। ये आंदोलन दो साल से भी अधिक समय से जारी है, जिसमें हर हफ्ते के अंत में लोग विरोध प्रदर्शन करते हैं। इस आंदोलन का असर यह हुआ है कि इस बार जब ईंधन के दाम बढ़े, तो राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार ने निम्न आय वाले 58 लाख परिवारों को हर महीने 100 यूरो की नकदी सहायता देने की घोषणा की। ये मसला स्पेन में भी गरम है। कुछ समय पहले वहां की सरकार ने एनर्जी टैक्स पर राहत की अवधि बढ़ाने की घोषणा की थी।



विश्लेषकों का कहना है कि ऊर्जा की महंगाई से चीन सरकार की चिंताएं भी बढ़ी हैं। चीन कोयले की कमी की समस्या का लगातार सामना कर रहा है। बीते गुरुवार को देश में योजना बनाने वाली सर्वोच्च संस्था नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन ने ऊर्जा संकट के बारे में एक लंबा दस्तावेज जारी किया। उसमें उद्योगों को ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है। इसके पहले पिछले साल इस संस्था ने कोयला की सप्लाई में स्थिरता लाने की योजना पेश की थी।

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