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COVID-19: संक्रमितों के सांस छोड़ने के बाद हवा में कितनी देर तक एक्टिव रहता है कोरोनावायरस, स्टडी में हुआ खुलासा

Thu, 13 Jan 2022 05:22 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रिस्टल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रिस्टल Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 13 Jan 2022 05:22 PM IST
सार

अगर कई दोस्त साथ बैठे हों, तो किसे होगा सबसे ज्यादा खतरा, कौन रहेगा संक्रमण के दायरे से दूर, जानें...

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On Coronavirus infection spread study explains the active time of virus in air after exhaled news and updates
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

दुनियाभर में कोरोनावायरस के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के प्रति सतर्कता कम होने की वजह से अब लोग एक-दूसरे से फिर से बिना एहतियात के मिलने लगे हैं, जिससे संक्रमण का बढ़ना फिर शुरू हो गया है। ऐसे में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के महत्व को लेकर चर्चा फिर शुरू हो चुकी है। इस बीच कोरोनावायरस के हवा में सक्रिय रहने और लोगों को संक्रमित करने की क्षमता को लेकर भी एक स्टडी सामने आई है। इसमें दावा किया गया है कि कोरोनावायरस किसी संक्रमित के सांस छोड़ने के बाद हवा में काफी देर तक सक्रिय रहता है। हालांकि, किसी व्यक्ति को संक्रमित करने की क्षमता 20 मिनट बाद ही 90 फीसदी तक कम हो जाती है। 
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स्टडी में कोरोना की सक्रियता को लेकर क्या?
हवा में कोरोना की सक्रियता को लेकर स्टडी ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के एयरोसॉल रिसर्च सेंटर की तरफ से की गई है। इसमें कहा गया है कि किसी संक्रमित व्यक्ति की सांस से कोरोना के बाहर आने के पांच मिनट बाद ही यह वायरस दूसरों को संक्रमित करने की क्षमता खोने लगता है। सेंटर के निदेशक प्रोफेसर जॉनाथन रीड के मुताबिक, "इस स्टडी से साफ है कि आखिर क्यों बाहर निकलने वाले लोगों को मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखना चाहिए।"
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उन्होंने आगे कहा, "लोगों का ध्यान अब तक खराब वेंटिलेशन वाली जगहों पर ही है और उन्हें लगता है कि हवा से यह वायरस किसी कमरे में कई मीटर दूर तक भी फैल सकता है। मैं यह नहीं कह रहा कि ऐसा नहीं होता। लेकिन ऐसा लगता है कि कोरोना फैलने का खतरा तब ज्यादा होता है जब आप किसी संक्रमित के पास होते हैं।"
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स्टडी में मॉडलिंग के जरिए किया गया एक्सपेरिमेंट
बताया गया है कि इस स्टडी के लिए पहली बार रिसर्चर्स ने एक ढांचा तैयार किया, जिसके जरिए किसी बंद जगह पर वायरस वाले कण फैलाए जा सकते थे। इसका इस्तेमाल एक पूरे कमरे में किसी चुनी हुई जगह पर वायरस फैलाने के लिए किया गया और देखा गया कि वायरस के कण किस दूरी तक कितनी देर में पहुंचे और कितनी देर एक्टिव रहे। इसमें सामने आया कि कोरोनावायरस काफी जल्द ही हवा में निष्प्रभावी हो गया। 


स्टडी में सामने आया कि वायरस जैसे ही फेफड़ों के नम माहौल से बाहर निकलता है, उसके संक्रामक कण खत्म होना शुरू हो जाते हैं। इस सूखे वातावरण की वजह से वायरस की सक्रियता जल्द खत्म होने लगती है। इस खोज में सामने आया कि अगर दोस्तों का एक समूह किसी कैंटीन या कैफे में साथ बैठा है और उनमें से एक कोरोना पॉजिटिव है, तो वे लोग जल्दी संक्रमित होंगे, जो उसके करीब बैठे हैं। जबकि कुछ दूरी पर बैठे व्यक्ति के संक्रमित होने की संभावना सबसे कम रहेगी। 
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