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US-Iran: 'अमेरिका के साथ बातचीत सकारात्मक रही, एक-दूसरे पक्ष के विचारों को सुना', ईरान के विदेश मंत्री का बयान

Fri, 06 Feb 2026 03:39 PM IST
राहुल कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मस्कट
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मस्कट Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 06 Feb 2026 03:39 PM IST
सार

US-Iran: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि उनकी अमेरिकी पक्ष के साथ ओमान की राजधानी में बैठक हुई। यह बैठक सकारात्मक माहौल में हुई और दोनों पक्षों ने अपने-अपने दृष्टिकोण साझा किए। पढ़िए रिपोर्ट-

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Oman says it mediated indirect talks between Iran and the United States over Tehran's nuclear programme
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI

विस्तार

ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इस बैठक को लेकर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है। हमारे हमने अपने दृष्टिकोण एक-दूसरे तक पहुंचाए, जो बेहद जरूरी था। 

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ईरान के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
अराघची ने कहा, हमने अपनी चिंताओं, ईरानी लोगों के अधिकार और हित पर जानकारी साझा की। यह बैठक बहुत अच्छे माहौल में हुई और दूसरे पक्ष के विचारों को भी सुना गया। ईरान के विदेश मंत्री के मुताबिक, ओमान में बातचीत सकारात्मक रही। 
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उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, अगर हम इस सकारात्मक रास्ते पर आगे बढ़ते हैं, तो मैं कह सकता हूं कि ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता पर हम एक सकारात्मक ढांचा बना सकते हैं। ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ओमान की राजधानी में 'कई बैठकें' अप्रत्यक्ष रूप से हुई हैं। उन्होंने कहा, वार्ता  जारी रहेगी, लेकिन विवरणों का निर्धारण राजधानी में हुए सलाह-मशविरों से होगा। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, अगली वार्ता का समय उनके ओमानी समकक्ष के साथ परामर्श से तय किया जाएगा।  
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उन्होंने कहा, जून 2025 में इस्राइल के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका ने ईरान के परमाणु स्थलों पर बमबारी की थी। इसके बाद 'अविश्वास' का माहौल बना हुआ है, जो वार्ता में एक बड़ी बाधा है और इसे पार करना होगा। भरोसा होना चाहिए। लेकिन मैं कह सकता हूं कि आज की बातचीत सकारात्मक रही। 
  
इससे पहले, ओमान ने भी कहा था कि उसने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत में मध्यस्थ की है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों से तनाव बढ़ा हुआ है। हालांकि पश्चिम एशिया के कई देश इस तनाव को कम करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। 

ओमान के विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बताया कि विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पश्चिम एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से अलग-अलग मुलाकात की। पोस्ट के मुताबिक, बातचीत मुख्यत: राजनयिक और तकनीकी वार्ताओं को फिर से शुरू करने के लिए उपयुक्त परिस्थितियां तैयार करने पर केंद्रित थी, क्योंकि दोनों पक्ष स्थायी सुरक्षा और स्थिरता हासिल करने के लिए इनकी सफलता सुनिश्चित करने के वास्ते दृढ़ संकल्पित हैं।

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जून में वार्ता हो गई थी विफल
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत पिछले साल जून में उस समय विफल हो गई थी, जब इस्राइल ने तेहरान पर हमला कर दिया था। दोनों देशों के बीच 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर बम बरसाए थे, जिससे यूरेनियम संवर्द्धन के काम में जुटे कई सेंट्रीफ्यूज संभवत: नष्ट हो गए थे। वहीं, इस्राइली हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और बैलिस्टिक मिसाइल भंडार को निशाना बनाया गया था।

शुक्रवार को अमेरिकी अधिकारियों के काफिले को मस्कट के बाहरी इलाके में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित एक पैलेस में दाखिल होते देखा। काफिले में शामिल वाहनों में से एक पर अमेरिकी झंडा लहरा रहा था। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का काफिला शुक्रवार सुबह मस्कट पहुंचे थे। ईरान के सरकारी टेलीविजन चैनल ने कहा कि अराघची ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी से मुलाकात के लिए मस्कट पहुंचे।
 

  • अमेरिकी विदेश मंत्री  मार्को रूबियो सहित कई शीर्ष अमेरिकी नेताओं का आकलन है कि ईरान का धार्मिक शासन इस समय बेहद कमजोर स्थिति में है।
  • मुद्रास्फीति और मुद्रा के तेज अवमूल्यन के कारण पिछले महीने ईरान में देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन हुए, जिससे शासन की जड़ें और हिला दीं।
  • जानकारों के अनुसार, यह दौर 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
  • वर्षों से जारी छद्म युद्ध, गहरे आर्थिक संकट और बढ़ती आंतरिक अशांति ने ईरान को अस्थिरता के दौर में धकेल दिया है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिस्थितियों का फायदा उठाकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर दबाव बना सकते हैं।
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