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कोरोना महामारी से उबरने में दुनिया को लग जाएंगे कई साल

Wed, 25 Mar 2020 08:03 PM IST
बीबीसी Published by: अनिल पांडेय Updated Wed, 25 Mar 2020 08:03 PM IST
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OECD report says Global economy will suffer for years to come
सुनसान अमेरिकी सड़कें - फोटो : PTI

ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनोमिक को-ऑपरेशन एंड डेवेलपमेंट (ओईसीडी) ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस महामारी से उबरने में विश्व को सालों लग जाएंगे। ओईसीडी के महासचिव एन्केल गुरिया ने कहा है कि कोरोना के कारण लग रहा आर्थिक झटका किसी वित्तीय संकट से कहीं गंभीर है।

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उन्होंने बीबीसी से कहा कि ये मानना सपने जैसा है कि विश्व इस स्थिति से जल्दी उबर जाएगा। ओईसीडी ने सभी देशों की सरकारों से अपील की कि वो अपने खर्च बढ़ाएं ताकि अधिक से अधिक लोगों के टेस्ट और मरीजों के इलाज में जल्दी हो सके।
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एन्केल गुरिया ने हाल में कहा था कि कोरोना ने महामारी का रूप लिया तो विश्व की अर्थव्यवस्था का विकास 1.5 फीसदी धीमा हो जाएगा, लेकिन अब ये अधिक ही लगता है।
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उन्होंने कहा कि इस कारण कितनी नौकरियां खत्म होंगी और कितनी कंपनियां बंद होंगी इस बारे में अभी पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन आने वाले वक्त में इस कारण अर्थव्यवस्था में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

उनका कहना है कि आने वाले महीनों में दुनिया के कई बड़े देशों को मंदी का सामना करना पड़ सकता है जिसका मतलब होगा कि लगातार दो तिमाही तक अर्थव्यवस्था में गिरावट जारी रह सकती है।

उन्होंने कहा, 'अगर पूरी दुनिया में नहीं तो भी दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं में खास कर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में या तो विकास दर में कोई बढ़त नहीं दर्ज की जाएगी या फिर गिरावट दर्ज की जाएगी। इसका मतलब ये है कि न केवल विश्व की विकास दर कम होगी बल्कि भविष्य में पटरी पर लौटने में ज्यादा समय लगेगा।'

बड़ा झटका
एन्केल गुरिया ने कहा आर्थिक मायनों में कोरोना का कहर, 2008 में आई मंदी और 9/11 के चरमपंथी हमलों से कहीं अधिक हो सकता है।

उन्होंने कहा, 'हमें नहीं पता कि इस कारण पैदा हुई बेरोजगारी की समस्या को सुलझाने में कितना वक्त लगेगा क्योंकि हमें ये नहीं पता कि इस कारण कितने लोग बेरोजगार होने वाले हैं। हमें ये भी नहीं पता कि इस कारण कितने बिजनेस मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और बंद होने की कग़ार पर हैं और ऐसे में स्थिति सामान्य होने में कितना वक्त लगेगा।'

कोरोना महामारी से निपटने की कोशिश में पूरी दुनिया में सरकारें अपने व्यवसाय और कर्मचारियों की मदद के लिए अभूतपूर्व कदम उठा रही हैं। यूनाइटेड किंगडम में पॉलिसीमेकर्स ने कहा है कि जो लोग कोरोना वायरस की महामारी के कारण काम नहीं कर पा रहे हैं उनकी तनख्वाह काटी नहीं जाएगी।

गुरिया ने सरकारों से अपील की है कि वो इस संकट से जूझने के लिए जितना संभव हो खर्च करें और जरूरत पड़ने पर सभी संसाधनों का इस्तेमाल करें। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले सालों में इस कारण राजस्व में बड़ा घाटा हो सकता है और सरकारों की लेनदारी भी बढ़ सकती है।

तुरंत नहीं मिलेगी राहत
गुरिया ने कहा कि सप्ताह भर पहले जी20 देशों के समूह में शामिल धनी देशों के पॉलिसीमेकर्स ने कहा है कि उन्हें यकीन है कि कोरोना के कारण हुए नुकसान से भरपाई का कर्व 'वी शेप में' हो सकता है, यानी पहले आर्थिक गतिविधि में तेजी से गिरावट आएगी जिसके बाद तेजी से हलात में सुधार होगा।

उन्होंने कहा, 'वी शेप कर्व की बात से मैं पूरी तरह सहमत नहीं हूं। फिलहाल हम ये जानते हैं कि इससे उबरना 'वी शेप' के कर्व में नहीं होगा। ये शायद 'यू शेप' के कर्व में होगा जहां कोरोना के कारण पैदा हुई स्थिति से निपटने की कोशिशें लंबे वक्त तक करनी होगी जिसके बाद ही इससे उबरने की शुरुआत होगी। हम इस स्थिति से बच सकते हैं लेकिन तभी जब हम सही वक्त पर सही फैसले लें।'

ओईसीडी ने मौजूदा परिस्थिति से निपटने के लिए चार स्तर पर कोशिश करने की बात की है जिसमें (1) वायरस के लिए मुफ्त में टेस्टिंग (2) डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बेहतर उपकरण और सामान (3) कर्मचारियों और काम न कर पा रहे लोगों को कैश ट्रांसफर, और (4) कंपनियों के टैक्स न भर पाने पर उन्हें राहत देना।


गुरिया ने कहा है कि मौजूदा स्थिति में शायद मार्शल प्लान जैसा कुछ लागू करने की जरूर पड़े जिसकी मदद से दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप के पुनर्निमाण में मदद मिली थी।

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