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बेकाबू हालात: नॉर्वे की दूरसंचार कंपनी टेलीनोर के म्यांमार छोड़ने के फैसले पर उठे सवाल

Wed, 19 Jan 2022 08:18 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 19 Jan 2022 08:18 PM IST
सार

जानकारों का कहना है कि टेलीनोर का म्यांमार से जाना यहां के सैनिक शासकों के लिए एक बड़ा झटका है। टेलीनोर नॉर्वे की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। ये कंपनी तकरीबन एक दशक पहले म्यांमार आई थी। अपने कारोबार के दौरान उसने यहां एक अरब डॉलर से अधिक रकम का निवेश किया...

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Norwegian telecom company Telenor Group has decided to wind up its business with Myanmar
म्यांमार में तख्तापलट - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

नॉर्वे की कंपनी टेलीनोर ग्रुप ने म्यांमार से अपना कारोबार समेटने का फैसला किया है। कंपनी अपने ज्यादातर शेयर म्यांमार के कंपनी समूह- वेव मनी को बेच देगी। वेव ग्रुप कंपनी समूह में म्यांमार के बड़े कारोबारी सर्गे पुन की कंपनी योमा स्ट्रेटेजिक भी शामिल है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि म्यांमार में बढ़ती अव्यवस्था के कारण टेलीनोर ग्रुप को यहां से जाने का फैसला किया है। लेकिन इससे लोकतंत्र समर्थक गुट भी खुश नहीं हैं।

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ताजा सौदे के मुताबिक टेलीनोर ने अपने 51 फीसदी शेयर योमा स्ट्रेटेजिक को बेच रही है। टेलीनोर म्यांमार में दूरसंचार सेवा देने वाली एक बड़ी कंपनी रही है। सोमवार को कंपनी ने एक बयान में अपने इरादे का एलान किया। ये सौदा दस करोड़ 40 लाख डॉलर में हुआ है। लेकिन जानकारों का कहना है कि म्यांमार के केंद्रीय बैंक- बैंक ऑफ म्यांमार ने अभी इस बिक्री को मंजूरी नहीं दी है।
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जानकारों का कहना है कि टेलीनोर का म्यांमार से जाना यहां के सैनिक शासकों के लिए एक बड़ा झटका है। टेलीनोर नॉर्वे की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। ये कंपनी तकरीबन एक दशक पहले म्यांमार आई थी। अपने कारोबार के दौरान उसने यहां एक अरब डॉलर से अधिक रकम का निवेश किया। म्यांमार में दूरसंचार नेटवर्क बनाने और मोबाइल मनी ट्रांसफर का ढांचा तैयार करने में इस कंपनी की बड़ी भूमिका रही है।

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डाटा राजस्व पर 15 फीसदी का टैक्स

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि टेलीनोर ने ये फैसला उस वक्त लिया है, जब म्यांमार में सैनिक तख्ता पलट का एक साल पूरा होने वाला है। बीते एक साल के दौरान सैनिक शासकों ने वेबसाइटों और एप्स की सख्त निगरानी की है। सेंसरशिप के कड़े नियम इस दौरान लागू किए गए हैं। हाल में सैनिक शासन ने डाटा राजस्व पर 15 फीसदी का अतिरिक्त टैक्स लगा दिया, जिससे मोबाइल इंटरनेट सेवा महंगी हो गई। साथ ही हर नए सिम कार्ड की बिक्री पर 11 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त कर लगा दिया गया है।


विशेषज्ञों का कहना है कि म्यांमार बैंकिंग और नकदी की समस्याओं से भी जूझ रहा है। इसकी वजह से ऑनलाइन पेमेंट के कारोबार के लिए मुश्किलें खड़ी हुई हैं। म्यांमार के स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों ने बीते अगस्त में एक रिपोर्ट में कहा था- वित्तीय संकट लंबा खिंचने की वजह से नकदी से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान की तरफ बढ़ने का रूझान पलट जाएगा। जानकारों का कहना है कि इन सभी स्थितियों से भी टेलीनोर का रुख प्रभावित हुआ।

मानवाधिकार संगठन हुए नाराज

इस बीच मानवाधिकार संगठनों ने टेलीनोर के फैसले की आलोचना की है। पिछले महीने ही ये खबर आई थी कि टेलीनोर अपनी हिस्सेदारी वेव मनी को बेचने की तैयारी में है। तब मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि टेलीनोर अपनी हिस्सेदारी बेच कर म्यांमार के लोगों की जान के लिए खतरा बढ़ा देगी।



सैनिक शासन विरोधी समूहों की तरफ से बनाए गए नेशनल यूनिटी गर्वनमेंट (एनयूजी) के वित्त मंत्री तिन तुन नायंग ने भी कुछ समय पहले इच्छा जताई थी कि टेलीनोर म्यांमार में बनी रहे। टेलीनोर से पहले भारत के अडानी ग्रुप और जर्मनी के मेट्रो ग्रुप ने भी म्यांमार में अपना कारोबार समेटने का इरादा जताया था। लेकिन उनके कंपनी शेयरों को कौन खरीद रहा है, इस बारे में अभी तक जानकारी नहीं मिली है।

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