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US: पीयूष गोयल ने भारत में मल्टी-ब्रांड रिटेलिंग के प्रवेश की संभावना को किया खारिज; कहा- हमारी नीति एकदम साफ

Fri, 04 Oct 2024 07:59 AM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, वॉशिंगटन
पीटीआई, वॉशिंगटन Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 04 Oct 2024 07:59 AM IST
सार

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में लगभग 100 बिलियन छोटे-छोटे स्टोर हैं। आप जिस भी गांव में जाएंगे, वहां आपको अलग-अलग तरह के उत्पाद बेचने वाली 10 या 12 छोटी दुकानें मिलेंगी। अलग-अलग सेवाएं देने वाली 10 या 12 छोटी दुकानें होंगी। लगभग हर कोने में एक फार्मेसी होगी। हमारा मानना है कि वे सभी बहुत अहम भूमिका निभाते हैं।

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Piyush Goyal Rules Out Possibility of Multi Brand Retail in India Emphasizes Clear Policy in US Visit
Piyush Goyal - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को भारत में मल्टी-ब्रांड रिटेलिंग के प्रवेश की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि शायद ऐसा करने से अमेरिका की तरह पॉप-एंड-मॉम स्टोर्स खत्म हो जाएंगे। इसके अलावा भारत देश को तेजी से विकास की ओर ले जाने के लिए सभी प्रकार के जरूरी आर्थिक सुधारों के लिए तैयार है। 

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केंद्रीय मंत्री गोयल ने सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज थिंक टैंक में एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो हम इनमें से किसी नीति पर फिर से विचार कर सकते हैं। सरकार के पास कैबिनेट की मंजूरी के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी हिस्सेदारी को बढ़ाने की अनुमति देने का अधिकार है। हम संसद में जाकर इसमें बदलाव भी कर सकते हैं। इसमें कोई समस्या नहीं है, हालांकि मुझे नहीं लगता कि इनमें से किसी के लिए संसदीय बदलाव की जरूरत है।
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'देश भर में छोटे-मोटे स्टोर लगभग खत्म हो गए'
उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देशों में मुझे एक चीज अक्सर सुनने को मिलती है और वह है- मल्टी-ब्रांड रिटेल। ऐसी आवाजें अमेरिका के अलावा कई जगहों पर सुनाई देती हैं। यह बिल्कुल भी उचित नहीं है। मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि मल्टी-ब्रांड रिटेल पर हमारी नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। अमेरिका को बड़ी तकनीक और बड़े रिटेल के दुष्परिणाम भुगतने पड़े हैं। इन दोनों के परस्पर प्रभाव के कारण देश भर में छोटे-मोटे स्टोर लगभग खत्म हो गए हैं।
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'अमेरिका की जनसंख्या भारत की तुलना में बहुत कम'
गोयल ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ऐसा कर भी सकता है, क्योंकि यहां की जनसंख्या भारत की तुलना में बहुत कम है। इसके साथ ही लोगों के लिए नौकरी करने के लिए वैकल्पिक रास्ते भी मौजूद हैं। शायद आपने इस बात को भी स्वीकार कर लिया है कि बाकी युवा अब सिर्फ बिक्री डिलीवरी बॉय या डिलीवरी गर्ल बनने के लिए ही रह गए हैं। यह हर देश का अपना खुद का फैसला और चुनाव हो सकता है।

ई-कॉमर्स के नियमों को बदलने पर विचार नहीं
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में लगभग 100 बिलियन छोटे-छोटे स्टोर हैं। आप जिस भी गांव में जाएंगे, वहां आपको अलग-अलग तरह के उत्पाद बेचने वाली 10 या 12 छोटी दुकानें मिलेंगी। अलग-अलग सेवाएं देने वाली 10 या 12 छोटी दुकानें होंगी। लगभग हर कोने में एक फार्मेसी होगी। हमारा मानना है कि वे सभी बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। हम चाहते हैं कि वे प्रौद्योगिकी के साथ आगे बढ़ते रहें। अगर वे ई-कॉमर्स के साथ एकीकृत हो जाते हैं या उन्हें ई-कॉमर्स कंपनियों की व्यावसायिक प्रथाओं का सामना करने का मौका मिलता है तो हम खुश हैं, लेकिन हम ई-कॉमर्स के नियमों को बदलने पर विचार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा क्षेत्र में भी भारत में 100 प्रतिशत विदेशी स्वामित्व की अनुमति है।


क्या है ‘मल्टी-ब्रांड स्टोर’ और ‘मॉम-एंड-पॉप स्टोर्स’ में अंतर
‘मल्टी-ब्रांड स्टोर’ एक रिटेल आउटलेट होता है जहां एक ही भौतिक या ऑनलाइन स्थान पर कई ब्रांडों के उत्पाद मिल जाते हैं। वहीं ‘मॉम-एंड-पॉप स्टोर्स’ से तात्पर्य उन छोटी दुकानों से है जो स्वतंत्र या पारिवारिक स्वामित्व वाली होती हैं।

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