फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Nepal Political Crisis: KP Sharma Oli should resign then President will be in a position to start the process of formation of the new government

नेपाल की सियासी उलझनों में कई पेंच, अनिश्चिय का जल्द समाधान नहीं

Thu, 25 Feb 2021 04:49 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 25 Feb 2021 04:49 PM IST
सार

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पास 278 सदस्यीय सदन में 173 सदस्य थे। अब पुष्प कमल दहल-माधव नेपाल गुट के साथ 90 और ओली खेमे के साथ 82 सदस्य हैं। ओली को बहुमत साबित करने के लिए 55 और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी...

विज्ञापन
Nepal Political Crisis: KP Sharma Oli should resign then President will be in a position to start the process of formation of the new government
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

नेपाली संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा को भंग कराने का दांव उलटा पड़ने के बाद अब नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिनिधि सभा को बहाल करने और अगले आठ मार्च तक इसकी अगली बैठक कराने का आदेश दिया है। अब ये लगभग साफ हो गया है कि ओली बैठक के पहले सदन में अपने लिए बहुमत का इंतजाम नहीं कर पाएंगे। इसके बावजूद ओली खुद को पैदा हुए ताजा सियासी हालात से बेअसर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इसीलिए उनके करीबी नेताओं ने कहा है कि प्रधानमंत्री संसद का सामना करेंगे। लेकिन नेपाली मीडिया में छपी रिपोर्टों के मुताबिक ओली खेमे में ये राय बन चुकी है कि प्रधानमंत्री के लिए बहुमत साबित करना लगभग असंभव है।

विज्ञापन


संसदीय सचिवालय ने कहा है कि उसने संसद के नए सत्र को बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रतिनिधि सभा के स्पीकर अग्नि सपकोटा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सदन की 20 दिसंबर से पहले की स्थिति बहाल कर दी है। संसदीय सचिवालय ने अपना काम शुरू कर दिया है। संसद की कार्यवाही उस रूप में चलेगी, जैसा राजनीतिक दल चाहेंगे।
विज्ञापन


चूंकि निर्वाचन आयोग ने अभी सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन को मान्यता नहीं दी है, इसलिए सदन के भीतर भी फिलहाल दोनों गुटों को एक पार्टी ही माना जाएगा। संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक संकट दूर करने का सबसे आसान रास्ता यह है कि ओली इस्तीफा दें। उस हालत में राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की स्थिति में होंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पूर्व अटार्नी जनरल युवराज संग्रौला ने यहां के अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा, अगर ओली सदन में विश्वास मत का सामना करते हैं, तो या तो उन्हें बहुमत साबित करना होगा, या फिर इस्तीफा देना होगा। लेकिन ओली के विश्वास मत पर अड़े रहने की स्थिति में राजनीतिक अनिश्चय मार्च के मध्य तक जारी रहेगा।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पास 278 सदस्यीय सदन में 173 सदस्य थे। अब पुष्प कमल दहल-माधव नेपाल गुट के साथ 90 और ओली खेमे के साथ 82 सदस्य हैं। ओली को बहुमत साबित करने के लिए 55 और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। यह तभी संभव हो सकता है कि अगर विपक्षी नेपाली कांग्रेस उनका समर्थन करे, जिसके पास 63 सीटें हैं। नेपाली कांग्रेस क्या रुख अख्तियार करेगी, यह अभी जाहिर नहीं है।

दहल-नेपाल खेमे की रणनीति यह है कि पहले ओली को प्रधानमंत्री पद से हटाया जाए। इस गुट की स्थायी समिति की सदस्य पम्फा भुसाल ने कहा है- अगर ओली इस्तीफा नहीं देते, तो हम उन्हें हटाएंगे। ऐसा करने के लिए ये खेमा उस अविश्वास प्रस्ताव को सदन में लाने पर जोर देगा, जिसे उसने 20 दिसंबर को सरकार की तरफ से सदन भंग करने की सिफारिश किए जाने के तुरंत बाद दर्ज कराया था।

उस प्रस्ताव में इस गुट ने दहल को अगले प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित किया था। लेकिन ये प्रस्ताव भी तभी पास हो पाएगा, अगर नेपाली कांग्रेस इसका समर्थन करे। ऐसी खबरें हैं कि अगर नेपाली कांग्रेस इसके लिए राजी नहीं होती है, तो दहल-नेपाल खेमा दूसरा अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगा, जिसमें वैकल्पिक प्रधानमंत्री के रूप में नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा के नाम का प्रस्ताव किया जाएगा।

संवैधानिक कानून के विशेषज्ञ चंद्रकांत ग्यावली के मुताबिक नेपाल में अविश्वास प्रस्ताव के साथ वैकल्पिक प्रधानमंत्री का नाम प्रस्तावित करना पड़ता है। इसलिए अगर पुराना अविश्वास प्रस्ताव पास होता है, तो दहल अपने आप अगला प्रधानमंत्री बनने के हकदार हो जाएंगे। इसलिए यह जरूरी नहीं होगा कि पहले नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी उन्हें अपने संसदीय दल का नेता चुने।


तो कुल स्थिति यह है कि नेपाली कांग्रेस किंगमेकर की स्थिति में आ गई है। काठमांडू पोस्ट ने पार्टी के लगभग दर्जन भर नेताओं से बातचीत के बाद लिखा है कि नेपाली कांग्रेस जल्दबाजी में फैसला करने के मूड में नहीं है। वह सावधानी से अपने सारे विकल्पों पर विचार कर रही है। उसके नेताओं को आशंका यह है कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों गुट मेलमिलाप कर सकते हैं। उस हालत में पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा ना हो, इसके मद्देनजर वह अंतिम समय तक अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती। एक समझ यह भी है कि अगर पार्टी ने अपने कार्ड ठीक से खेले, तो मुमकिन है कि किंगमेकर के बजाय खुद वह किंग बनने में कामयाब जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed