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Hindi News ›   World ›   Nepal MP Sarita Giri says that Nepal will become like North Korea if important decisions are not taken

'अगर नेपाली राजनीति में चीनी घुसपैठ नहीं रुकी तो उत्तर कोरिया बन जाएगा हमारा देश'

Wed, 08 Jul 2020 08:21 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 08 Jul 2020 08:21 PM IST
सार

भारत के साथ नक्शा विवाद और नेपाल की राजनीति में चल रही अंदरूनी कलह इस समय साफ देखने को मिल रही है। नक्शा विवाद को लेकर इसकी सांविधानिकता और इसके पीछे तर्क का सवाल उठाने वाली नेपाल की सांसद सरिता गिरी को उन्हीं की पार्टी ने निष्कासित कर दिया और संसद से उनकी सदस्यता भी समाप्त कर दी गई। गिरी ने एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में नेपाल की राजनीति में चीन के दखल और नक्शा विवाद को लेकर खुलकर बात की। 

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Nepal MP Sarita Giri says that Nepal will become like North Korea if important decisions are not taken
सरिता गिरी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पार्टी से निकाले जाने को लेकर गिरी ने कहा कि जिस तरह से उनकी सदस्यता को समाप्त करने का फैसला लिया गया वह कानूनी तौर पर पूरी तरह गलत है। नेपाल का कानून कहता है कि अगर मैं अपनी पार्टी छोड़ती हूं तो मेरी संसद की सदस्यता जा सकती है। जैसा पार्टी कह रही है और व्हिप का सवाल है, मैंने उसके खिलाफ वोट नहीं किया। गिरी कहती हैं कि यह कार्रवाई उनके सवाल उठाने की वजह से हुई है। 

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बता दें कि बीते दिनों भारत ने लिपुलेख दर्रे को धारचुला से जोड़ने वाली एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़क का उद्धाटन किया था। तब से ही ओली सरकार दावा करती आ रही है कि कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा के क्षेत्र नेपाल के हिस्से में आते हैं। इसे लेकर नेपाल की संसद ने नए नक्शे को भी मान्यता दे दी है, जिसमें इन इलाकों को नेपाल का हिस्सा बताया गया है। 

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नेपाल की राजनीति में चीन का दखल

नेपाल की राजनीति में बाहरी ताकतों के दखल की आशंका को गिरी स्वीकार करती हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से इसके पीछे चीन की राजदूत की भूमिका हो सकती है। मैं संसद में उन्हें और नेपाल में चीन की भूमिका पर सवाल उठाती रही हूं। आणविक हथियारों को लेकर जिस तरह नेपाल की संसद में बिल पारित हुआ था, उस पर भी मैंने सवाल उठाए थे। सीमा विवाद की बात करें तो नेपाल की जमीन जो चीन के कब्जे में है उसे लेकर भी मैंने सवाल उठाए थे। 

गिरी कहती हैं कि इस समय अंतरराष्ट्रीय पटल पर चीन जिस तरह से घिरा हुआ है, वह चाहता है कि अपने आसपास एक सुरक्षित माहौल तैयार किया जाए। भारत भी चीन को लगातार जवाब दे रहा है और अमेरिका से साथ चीन के विवाद भी जगजाहिर हैं। ऐसे में नेपाल की राजनीति में एक देश की राजदूत का इतना दखल समझ नहीं आता है। इन सब मामलों पर उठाए गए सवाल भी इस कार्रवाई का कारण हो सकते हैं। 

भारत-नेपाल विवाद बातचीत से हल हो

भारत और नेपाल के बीच नक्शे के विवाद पर गिरी ने कहा कि ये ऐसे मतभेद हैं जो बातचीत के जरिए निपटाए जा सकते हैं। यह देखना पड़ेगा कि दोनों देशों का नक्शा पहले क्या था और अब क्या है। ये ऐसे मामले हैं जो बातचीत की मेज पर ही सुलझ सकते हैं। संसद में मैंने नक्शा बदलने के लिए संविधान संशोधन में सुधार का प्रस्ताव रखा था। सरकार कह रही थी कि यह नया नक्शा नेपाल की वास्तविक सीमा के लिए लाया जा रहा है। यह अच्छा है। लेकिन नेपाल की वास्तविक सीमा क्या है?

इसे तय करने के लिए दस्तावेज होने चाहिए, कोई संधि होनी चाहिए। अगर आप किसी पुराने नक्शे को किसी नए नक्शे से बदलना चाहते हैं तो इसके पीछे कोई तार्किक आधार भी तो होना चाहिए। ये ऐसे फैसले हैं जो अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर बड़ा असर करते हैं और इन्हें केवल भावनाओं के आधार पर नहीं लिया जा सकता है। पहले सरकार इस संबंध में कुछ सुनने को तैयार नहीं थी, लेकिन अब इसे लेकर नौ सदस्यीय समिति बनाई गई है। इस फैसले से साफ पता चलता है कि कहीं न कहीं कोई चूक तो हुई है।  

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नेपाल से समझौते के पीछे चीन की मंशा

गिरी ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नेपाल यात्रा के दौरान नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी और चीन सरकार के बीच 16 सूत्रीय समझौता हुआ था। इसके बाद नेपाल की राजनीति में चीनी राजदूत की सक्रियता में खासा इजाफा देखने को मिला, जो आज भी जारी है। इस समझौते की धाराओं को पढ़ें तो साफ पता चलता है कि यह कोई विकास के लिए भागीदारी नहीं है बल्कि नेपाल की अंदरूनी राजनीति, यहां की नीतियां और चीन के साथ तालमेल बनाए रखने की कोशिशों की खोज भर है। 

इस बारे में कई लोग सवाल उठा रहे हैं। अच्छी बात यह है कि नेपाल का युवा भी इस बात को समझ रहा है और सवाल उठा रहा है। पहले जब कभी भारत की कोई गतिविधि होती थी तो हम जैसे लोग जो भारत और नेपाल के स्वस्थ संबंधों के पक्षधर हैं, आलोचना का शिकार होते थे। अब जब चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं तो यहां का युवा उस पर भी सवाल उठा रहा है। उन्होंने कहा कि नेपाल को स्वतंत्र और संप्रभु होना चाहिए और अपने फैसले स्वविवेक से लेने में समर्थ होना चाहिए। 

अभी नहीं चेते तो उत्तरी कोरिया बन जाएगा नेपाल

गिरी ने आशंका जताई कि अगर समय रहते हम स्थितियों को नहीं समझे तो नेपाल आने वाले समय में उत्तरी कोरिया जैसा बन सकता है। अगर हमने अभी इसे नहीं रोका तो इस आशंका ने इनकार नहीं किया जा सकता है। सत्ताधारी पार्टी के अंदरूनी मतभेज देश के संसद सत्र पर असर डाल रहे हैं, जो बहुत गलत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से संसद का सत्र समाप्त किया गया उसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। 

गिरी कहती हैं कि बिना लोकतंत्र के मैं नहीं रह सकती है। मैं ऐसे किसी भी देश में नहीं रहना पसंद करूंगी, जहां लोकतंत्र नहीं है। वह कहती हैं कि अच्छी बात यह है कि नेपाल में लोग इस बारे में जागरूक हैं। अपनी व्यक्तिगत लड़ाई को लेकर गिरी ने कहा कि स्थिति का आकलन करने के बाद वह कोई कदम उठाएंगी। उन्होंने कहा कि यह निश्चित है कि हम इस लड़ाई को यहीं नहीं रोकेंगे, बल्कि इसे आगे लेकर जाएंगे।

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