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चारों तरफ मलबा ही मलबा: नेपाल में ऐसे बचाई जा रही जिंदगियां, भूल नहीं पाएंगे गोद में मासूमों की ये तस्वीरें
Sat, 29 Aug 2026 08:03 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, पीटीआई/ काठमांडो।
एएनआई, पीटीआई/ काठमांडो।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 29 Aug 2026 08:03 PM IST
सार
नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें 600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 2,400 से ज्यादा लोग लापता हैं। सुरक्षा बलों के 11,000 से अधिक जवान राहत और बचाव कार्य में मुस्तैदी से जुटे हुए हैं। इस भयावह आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए मुंबई के 61 श्रद्धालुओं का दल भी सीमावर्ती इलाके से लापता है, जिससे उनके परिवारों में चिंता और भय का माहौल बना हुआ है।
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नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अस्पतालों के बाहर की दीवारों पर चिपकी अपनों की तस्वीरें, मलबे और कीचड़ में सामान ढूंढते बिलखते परिवार, टूटी इमारतों के बीच बच्चे को गोद में लिए बेबस मां और चारों तरफ बिखरे सामान। नेपाल में आई आकस्मिक बाढ़ ने तबाही का ऐसा खौफनाक मंजर छोड़ा है, जिसने हर किसी की रूह कंपा दी है। बुधवार को आए पानी, कीचड़ और मलबे के तेज बहाव ने बस्तियां, गाड़ियां, सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स सब कुछ एक झटके में तबाह कर दिया।
रेस्क्यू ऑपरेशन और बढ़ता मौत का आंकड़ा
शनिवार तक इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की तादाद 600 को पार कर चुकी है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। अब तक 163 विदेशी नागरिकों समेत करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपाली सेना के 5,000 से अधिक जवानों सहित 11,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव कार्य में दिन-रात जुटे हैं। ऊपरी त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे 350 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि कीचड़ में दबे अन्य लोगों की तलाश जारी है।
कहां गए मुंबई के 61 श्रद्धालु?
नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई इस तबाही के बाद मुंबई के 61 श्रद्धालुओं का एक दल भी लापता है, जिससे उनके परिजनों की सांसें अटकी हुई हैं। प्रसिद्ध ट्रैकर डॉ. मिलिंद चितले के नेतृत्व में यह दल कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 23 अगस्त को रवाना हुआ था। 25 अगस्त की शाम को टिमुरे पहुंचने के बाद से इनका परिवारों से संपर्क टूट चुका है। कुछ सदस्यों की आखिरी डिजिटल लोकेशन 26 अगस्त की सुबह बॉर्डर चेकपोस्ट के पास की मिली थी, जिसके बाद से कोई खबर नहीं है।
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यह भी पढ़ें: नेपाल बाढ़ की डरावनी आपबीती: आंखों के सामने बहे घर और अपने, किसी ने पकड़ा तार तो किसी ने जंगल में भाग बचाई जान
अस्पतालों के बाहर अपनों का इंतजार
प्रभावित इलाकों और अस्पतालों के बाहर लोग घायलों और मृतकों की सूचियों में अपनों के नाम और तस्वीरें तलाश रहे हैं। त्रिशूली में सेना का रिलीफ कैंप प्रभावितों का सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है, जहां बुजुर्गों, बच्चों और घायलों का इलाज चल रहा है। इस बीच मौसम विभाग ने फिर से मध्यम बारिश की आशंका जताई है, जिससे आने वाले दिनों में बचाव दल की चुनौतियां और ज्यादा बढ़ने की आशंका है।
हेलिकॉप्टर से बचाए गए लोग, सेना कैंप में मिली पनाह
वहीं, रेस्क्यू अभियान जारी है। सेना के हेलिकॉप्टर दूर-दराज इलाकों में पहुंच रहे हैं। वहां फंसे लोगों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है। रेस्क्यू किए गए लोगों को नुवाकोट के मैतिली आर्मी कैंप लाया गया। यहां जवानों ने उन्हें टेंट में ठहराया। लोगों को जरूरी मदद भी दी जा रही है।
किसी का घर गया, किसी का पूरा परिवार
रसुवा की एक महिला ने अपना दर्द बताया। उसने कहा कि उसका घर और सारा सामान बह गया। बेत्रावती में तबाही का मंजर और भी डरावना है। जहां पहले बाजार, मंदिर और स्कूल था। अब वहां कुछ भी नहीं बचा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बाढ़ में पूरा इलाका बह गया। कई लोगों की मौत हुई है। कई लोगों का अब तक पता नहीं है।
बच्चों को भी हेलिकॉप्टर से निकाल रहे
बाढ़ से कटे इलाकों में बच्चे भी फंसे थे। उन्हें भी हेलिकॉप्टर से सुरक्षित निकाला जा रहा है। सेना के कैंप में बच्चों को प्राथमिक इलाज दिया जा रहा है। शनिवार सुबह तक सेना ने 2,265 लोगों को एयरलिफ्ट किया। इनमें 163 विदेशी नागरिक भी हैं। 200 लोगों को जमीन से बचाया गया। वहीं 1,706 घायलों का इलाज किया गया है। राहत अभियान में सेना के करीब 6,700 जवान लगे हैं।
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रेस्क्यू ऑपरेशन और बढ़ता मौत का आंकड़ा
शनिवार तक इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की तादाद 600 को पार कर चुकी है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। अब तक 163 विदेशी नागरिकों समेत करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपाली सेना के 5,000 से अधिक जवानों सहित 11,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव कार्य में दिन-रात जुटे हैं। ऊपरी त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे 350 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि कीचड़ में दबे अन्य लोगों की तलाश जारी है।
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कहां गए मुंबई के 61 श्रद्धालु?
नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई इस तबाही के बाद मुंबई के 61 श्रद्धालुओं का एक दल भी लापता है, जिससे उनके परिजनों की सांसें अटकी हुई हैं। प्रसिद्ध ट्रैकर डॉ. मिलिंद चितले के नेतृत्व में यह दल कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 23 अगस्त को रवाना हुआ था। 25 अगस्त की शाम को टिमुरे पहुंचने के बाद से इनका परिवारों से संपर्क टूट चुका है। कुछ सदस्यों की आखिरी डिजिटल लोकेशन 26 अगस्त की सुबह बॉर्डर चेकपोस्ट के पास की मिली थी, जिसके बाद से कोई खबर नहीं है।
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अस्पतालों के बाहर अपनों का इंतजार
प्रभावित इलाकों और अस्पतालों के बाहर लोग घायलों और मृतकों की सूचियों में अपनों के नाम और तस्वीरें तलाश रहे हैं। त्रिशूली में सेना का रिलीफ कैंप प्रभावितों का सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है, जहां बुजुर्गों, बच्चों और घायलों का इलाज चल रहा है। इस बीच मौसम विभाग ने फिर से मध्यम बारिश की आशंका जताई है, जिससे आने वाले दिनों में बचाव दल की चुनौतियां और ज्यादा बढ़ने की आशंका है।
हेलिकॉप्टर से बचाए गए लोग, सेना कैंप में मिली पनाह
वहीं, रेस्क्यू अभियान जारी है। सेना के हेलिकॉप्टर दूर-दराज इलाकों में पहुंच रहे हैं। वहां फंसे लोगों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है। रेस्क्यू किए गए लोगों को नुवाकोट के मैतिली आर्मी कैंप लाया गया। यहां जवानों ने उन्हें टेंट में ठहराया। लोगों को जरूरी मदद भी दी जा रही है।
किसी का घर गया, किसी का पूरा परिवार
रसुवा की एक महिला ने अपना दर्द बताया। उसने कहा कि उसका घर और सारा सामान बह गया। बेत्रावती में तबाही का मंजर और भी डरावना है। जहां पहले बाजार, मंदिर और स्कूल था। अब वहां कुछ भी नहीं बचा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बाढ़ में पूरा इलाका बह गया। कई लोगों की मौत हुई है। कई लोगों का अब तक पता नहीं है।
बच्चों को भी हेलिकॉप्टर से निकाल रहे
बाढ़ से कटे इलाकों में बच्चे भी फंसे थे। उन्हें भी हेलिकॉप्टर से सुरक्षित निकाला जा रहा है। सेना के कैंप में बच्चों को प्राथमिक इलाज दिया जा रहा है। शनिवार सुबह तक सेना ने 2,265 लोगों को एयरलिफ्ट किया। इनमें 163 विदेशी नागरिक भी हैं। 200 लोगों को जमीन से बचाया गया। वहीं 1,706 घायलों का इलाज किया गया है। राहत अभियान में सेना के करीब 6,700 जवान लगे हैं।