Nepal Election: नेपाल के आम चुनाव पर मंडराया हिंसा का साया, माहौल चिंताजनक
Nepal Election: सरकार ने चुनावों के दौरान शांति बनाए रखने के लिए तीन लाख सुरक्षाकर्मी तैनात करने की घोषणा की है। नेपाल पुलिस के 71 हजार और अस्थायी पुलिस के एक लाख 15 हजार जवान तैनात किए जाएंगे। सशस्त्र पुलिस बलों के 35 हजार जवानों को ड्यूटी पर लगाया जाएगा...
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नेपाल में बीते दिनों राजनीतिक हिंसा की कई घटनाएं होने से आम चुनाव से ठीक पहले चिंता का माहौल बन गया है। सोमवार रात ऐसी ही एक घटना हुई, जिसमें प्रमुख विपक्षी दल- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के नेता हरि काफ्ले घायल हो गए। पालुंगतार नगरपालिका में उन पर होटल में घुस कर हमला किया गया। काफ्ले वहां अपनी पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने गए थे। उनके सिर पर गहरी चोट आई है।
इसके पहले रविवार को चितवन में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और सत्ताधारी गठबंधन के समर्थकों के बीच हिंसक मुठभेड़ हुई थी। बताया जाता है कि झगड़े की शुरुआत सत्ताधारी गठबंधन के समर्थकों ने की। उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के चुनाव प्रचार में लगे वाहन पर हमला बोल दिया। उस चुनाव क्षेत्र से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता रवि लिमिछाने खुद संसदीय चुनाव लड़ रहे हैं।
रविवार को ही नौगंधा ग्रामीण क्षेत्र में यूएमएल और सत्ताधारी गठबंधन के समर्थकों के बीच मुठभेड़ हुई। इस झगड़े में सत्ताधारी गठबंधन के नेता जयभान सिंह धामी बुरी तरह जख्मी हुए, जिन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चुनाव प्रचार के आखिरी हफ्ते में सरगर्मी बढ़ गई है। गरमाते माहौल के बीच हिंसा की घटनाएं भी बढ़ी हैं। इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होने को लेकर अंदेशा गहरा गया है।
नेपाल में संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा और सात प्रांतीय विधायिकाओं की प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सीटों पर मतदान 20 नवंबर को होगा। उस रोज प्रतिनिधि सभा की 165 और प्रांतीय असेंबलियों की 330 सीटों पर पोट डाले जाएंगे। अब मतदान सिर्फ पांच दिन बचे हैं। इससे चुनाव प्रचार चरम पर पहुंच गया है।
सरकार ने चुनावों के दौरान शांति बनाए रखने के लिए तीन लाख सुरक्षाकर्मी तैनात करने की घोषणा की है। नेपाल पुलिस के 71 हजार और अस्थायी पुलिस के एक लाख 15 हजार जवान तैनात किए जाएंगे। सशस्त्र पुलिस बलों के 35 हजार जवानों को ड्यूटी पर लगाया जाएगा। नेशनल इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट के दो सौ अधिकारी सुरक्षा इंतजामों की निगरानी करेंगे।
लेकिन पर्यवेक्षकों इस बात पर असंतोष जताया है कि ऐसी घोषणाओं के बावजूद हिंसा को रोका नहीं जा सका है। चुनाव पर्यवेक्षण समिति के अध्यक्ष प्रदीप पोखारेल ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘अगर नेताओं पर हमलों, गुंडागर्दी और विभिन्न दलों के समर्थकों के बीच झगड़ों को ये लोग नहीं पाते हैं, तो बड़े पैमाने पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती को कोई फायदा नहीं है। अगर ऐसी घटनाएं जारी रहती हैं, तो मतदान के दिन भय का माहौल बना रहेगा।’ पोखारेल ने कहा कि हिंसा की बढ़ी घटनाएं निर्वाचन आयोग की साख के लिए भी एक चुनौती हैं।
इस बीच नेत्र बिक्रम चांद विप्लव के नेतृत्व वाले उग्रवादी गुट की धमकी से भी चिंता बढ़ी है। इस गुट ने मतदान में बाधा डालने का एलान कर रखा है।
निर्वाचन आयोग ने भी इन घटनाओं पर चिंता जताई है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश कुमार थपालिया ने कहा है- ‘आयोग हिंसा की घटनाओं से चिंतित है।’ उन्होंने बताया कि तोड़फोड़ और टकराव की हाल में हुई घटनाओं को देखते हुए आयोग ने सभी दलों की एक बैठक बुलाई है, जिसमें सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी हिस्सा लेंगे।