CJI: सीजेआई ने इंडिपेंडेंस हॉल का दौरा किया, कहा- न्यायपालिका सिर्फ और सिर्फ संविधान के प्रति जवाबदेह
इंडिपेंडेंट हॉल में महाद्वीपीय कांग्रेस ने स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे। 11 साल बाद उसी कमरे में संवैधानिक सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने अमेरिका के संविधान को बनाया गया और उस पर हस्ताक्षर किए थे। इसे इंडिपेंडेंट हॉल के रूप में जाना जाता है।
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मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमण ने कहा, भारत में राजनीतिक दल अपने-अपने हिसाब से न्यायपालिका चलाना चाहते हैं। सत्तारूढ़ दल का मानना है कि हर सरकारी फैसला न्यायिक समर्थन का हकदार है। वहीं, विपक्षी दल न्यायपालिका से अपनी राजनीतिक स्थिति और मसलों को आगे बढ़ाने की उम्मीद करते हैं। लेकिन न्यायपालिका सिर्फ और सिर्फ संविधान के प्रति जवाबदेह है।
सीजेआई रमण अमेरिका में कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में शनिवार को एसोसिएशन ऑफ इंडो अमेरिकन के कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, हम इस साल स्वतंत्रता के 75वें साल का जश्न मना रहे हैं और हमारा गणतंत्र 72 साल का हो गया है, लेकिन कुछ अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि लोग प्रत्येक संस्थान को संविधान की ओर से सौंपी गई भूमिका और जिम्मेदारी को समझ नहीं पाए हैं।
- सीजेआई रमण ने कहा, आम लोगों में बढ़ावा दी गई बेपरवाही से ऐसी ताकतों को मदद मिलती है जो एक मात्र स्वतंत्र संस्था, न्यायपालिका को दबाना चाहते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा, हमें भारत में सांविधानिक संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है।
- सीजेआई रमण ने कहा, आपको अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए योगदान देना होगा। आखिर में सम्मान ही मायने रखता है।
लोकतंत्र सभी की भागीदारी
हमें व्यक्तिगत और संस्थानों की भूमिका और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। लोकतंत्र आखिरकार सभी की भागीदारी है। -एनवी रमण, सीजेआई
ग्रामीण मतदाता लोकतंत्र को मजबूत बनाने में ज्यादा सक्रिय : सीजेआई
भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने कहा कि भारत में राजनीतिक दलों के बीच यह गलत धारणा है कि न्यायपालिका को उनके कार्यों या राजनीतिक एजेंडे का समर्थन करना चाहिए। यह दोषपूर्ण सोच संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज के बारे में समझ के अभाव में पनपती है। सीजेआई ने अब्राहम लिंकन का जिक्र किया और कहा, भारत के संविधान के तहत यही लोग हैं, जो हर पांच साल में एक बार शासकों पर फैसला लेने का काम सौंपते हैं।
भारत के लोगों ने अब तक अपना काम बहुत ही बेहतरीन ढंग से किया है। हमारे पास अपने लोगों की सामूहिक बौद्धिकता पर संदेह करने की कोई वजह नहीं होनी चाहिए। अहम बात यह है कि ग्रामीण भारत में मतदाता अपने शहरी और संपन्न समकक्षों की तुलना में इस कार्य को करने में अधिक सक्रिय हैं।
पैसे का आनंद उठाने के लिए शांति की आवश्यकता
उन्होंने मौजूद लोगों से कहा कि वे करोड़पति और अरबपति बन सकते हैं, लेकिन धन का आनंद उठाने के लिए उन्हें अपने चारो ओर शांति की आवश्यकता है। यदि आप घर में अपने माता-पिता की शांति और कल्याण का ख्याल नहीं रख सकते हैं तो यहां आपके धन और स्थिति का क्या उपयोग है।