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NATO: स्वीडन और फिनलैंड होंगे नाटो में शामिल! नाटो महासचिव बोले- उत्तरी यूरोप में रूस की बढ़ेगी टेंशन
Wed, 29 Jun 2022 08:27 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मैड्रिड
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मैड्रिड
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 29 Jun 2022 08:27 PM IST
सार
उत्तरी अटलांटिक सैन्य संगठन (नाटो) ने फिनलैंड और स्वीडन को औपचारिक रूप से सैन्य संगठन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। नाटो के राष्ट्राध्यक्षों ने बुधवार को इसकी घोषणा की है।
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नाटो
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
उत्तरी अटलांटिक सैन्य संगठन (नाटो) ने फिनलैंड और स्वीडन को औपचारिक रूप से सैन्य संगठन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। नाटो के राष्ट्राध्यक्षों ने बुधवार को इसकी घोषणा की है। गौरतलब है कि इससे पहले तुर्की फिनलैंड और स्वीडन को नाटो में शामिल किए जाने का विरोध कर रहा था। अब तुर्की, फिनलैंड और स्वीडन ने एक-दूसरे की सुरक्षा की रक्षा करने पर सहमति जताई है। गौरतलब है कि ये दोनों देश रूस के पड़ोसी हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की घेराबंदी के लिए इसे नाटो के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद उत्तरी यूरोप में रूस की टेंशन बढ़ेगी।
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बुधवार को नाटो नेताओं द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि फिनलैंड और स्वीडन का विलय उन्हें सुरक्षित, नाटो को मजबूत और यूरो-अटलांटिक क्षेत्र को और अधिक सुरक्षित बनाएगा। फिनलैंड और स्वीडन की सुरक्षा गठबंधन के लिए प्रत्यक्ष महत्व की है।
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नाटो महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि आमंत्रण के बाद दोनों देशों की सत्यापन प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है। उन्होने कहा कि मैं यह भी उम्मीद करता हूं कि यह जल्दी से आगे बढ़ेगा क्योंकि सहयोगी देश सत्यापन प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश करने के लिए तैयार हैं।
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इस दौरान नाटो नेताओं ने एक नई रणनीतिक अवधारणा को भी मंजूरी दी है, जो 2030 तक गठबंधन के काम का मार्गदर्शन करेगी। नाटो महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने बताया कि हमने एक नई रणनीतिक अवधारणा का समर्थन किया है। यह अवधारणा गठबंधन के तीन मुख्य कार्यों को भी निर्धारित करती है, जिसमें निरोध और रक्षा, संकट की रोकथाम और प्रबंधन और सहकारी सुरक्षा शामिल हैं।
इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन-रूस में जारी युद्ध के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रान्साटलांटिक शिखर सम्मेलन शुरू होने के साथ भूमि, वायु और समुद्र में खतरों से निपटने के लिए यूरोप में नाटो बलों के महत्वपूर्ण अमेरिकी सुदृढ़ीकरण की घोषणा की। इतना ही नहीं उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच नए सैन्य आंदोलनों, उपकरण शिपमेंट और सैन्य प्रतिष्ठानों की घोषणा की।
हफ्तों की कोशिश, अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद समझौता
स्वीडन और फिनलैंड को नाटो में शामिल करने का प्रस्ताव अंतिम समय में पारित होने के पीछे यूरोप के देशों की राजधानी में हफ्तों चली राजनीतिक रस्साकशी और अमेरिका का हस्तक्षेप प्रमुख थे। इससे पहले लग रहा था कि इस प्रस्ताव का कुछ होने वाला नहीं है।
फिनलैंड के विदेश मंत्री पेक्का हाविस्तो ने पत्रकारों को बताया, दो घंटे तक चली गर्मागर्म बहस के दौरान हर कोई अपनी बात पर अड़ा था। लग रहा था, सहमति बनना कठिन है। इसी बीच कॉफी ब्रेक हुआ। जैसा कि हमेशा होता है, कुछ समय रुकने से बेहतर नतीजे की संभावना रहती है।
इसके बाद बैठक में फैसला हो गया। यह अप्रत्याशित था। यहां तक कि बैठक में आए अधिकारी भी इसके लिए तैयार नहीं दिखे। कुछ ही देर बाद तुर्की, स्वीडन और फिनलैंड के नेता नाटो के महासचिव जेन स्टोलटेनबर्ग के साथ नजर आए और दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। आखिर तुर्की के अधिकारियों ने वाहवाही लूट ली।