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संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री का अलग अंदाज: चाय से लेकर वैक्सीन तक वो तीन मुद्दे जिन पर मोदी के लिए बजीं तालियां

Sat, 25 Sep 2021 08:03 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 25 Sep 2021 08:03 PM IST
सार

PM Modi in UNGA: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ साल में चौथी बार संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। तीन मुद्दों पर उनके बयान पर महासभा में मौजूद नेताओं ने तालियां बजाईं। भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने तीन हस्तियों का भी जिक्र किया।

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Narendra Modi Recieved applause From UNGC Know PM different style in the United Nations Latest News Update
पीएम मोदी। - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन के दौरान अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत का रुख दुनिया को बताया। साथ ही पाकिस्तान को इशारों में नसीहत दी। भाषण के दौरान तीन बार ऐसे मौके आए, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में मौजूद नेताओं ने तालियां बजाकर प्रधानमंत्री को सराहा। पढ़ें, उनके भाषण की अहम बातें...

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तीन मुद्दे, जिन पर प्रधानमंत्री को तालियां मिलीं

1. भारत कैसा लोकतंत्र है?
प्रधानमंत्री ने कहा, ''मैं उस देश का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं, जिसे मदर ऑफ डेमोक्रेसी का गौरव हासिल है। लोकतंत्र की हमारी हजारों वर्षों की महान परंपरा के तहत भारत ने इस 15 अगस्त को आजादी के 75वें साल में प्रवेश किया। हमारा देश ज्वलंत लोकतंत्र का बेहतरीन उदाहरण है। यह भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा, जो कभी रेलवे स्टेशन पर टी-स्टॉल में अपने पिता की मदद करता था, वह आज चौथी बार भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित कर रहा है। मैं सबसे लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री रहा और पिछले सात साल से देश का प्रधानमंत्री हूं। देशवासियों की सेवा करते हुए बीस साल हो रहे हैं। मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं कि हां, लोकतंत्र काम करके दिखा सकता है और हां, लोकतंत्र ने काम करके दिखाया है।''






2. दुनिया को न्योता- आइए, भारत में आकर वैक्सीन बनाइए
प्रधानमंत्री ने कहा, ''पिछले डेढ़ वर्ष से पूरा विश्व सौ साल में आई सबसे बड़ी महामारी का सामना कर रहा है। ऐसी भयंकर महामारी में जीवन गंवाने वालों को मैं श्रद्धांजलि देता हूं और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। एक और एमआरएनए वैक्सीन बनकर तैयार होने के आखिर चरण में है। भारत ने एक बार फिर दुनिया के जरूरतमंद देशों को वैक्सीन देनी शुरू कर दी है। मैं आज दुनियाभर के वैक्सीन निर्माताओं को भी आमंत्रित करता हूं कि आइए, भारत में आकर वैक्सीन बनाइए।''

3. अफगानिस्तान का आतंकवाद के लिए इस्तेमाल न हो
पीएम मोदी ने कहा, ''दूसरों के कदम पीछे खींचने वाली सोच रखने वाले जो देश आतंकवाद का सियासी हथकंडों तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें यह समझना होगा कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि अफगानिस्तान का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए न हो। हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि कोई भी देश वहां की नाजुक स्थितियों का अपने स्वार्थ के लिए गलत इस्तेमाल न करे। वहां के महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों को मदद की जरूरत है। हमें अपना दायित्व निभाना ही होगा।''

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तीन हस्तियों का जिक्र किया

1. दीनदयाल उपाध्याय: ''एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की आज जयंती है। एकात्म मानव दर्शन यानी यानी स्व से समष्टि तक विकास और विस्तार की सहयात्रा। ये चिंतन अंत्योदय को समर्पित है। इसे आज की परिभाषा में कहा जाता है कि कोई भी पीछे न छूटे। विकास सर्वसमावेशी हो, सर्वस्पर्शी हो, सर्वव्यापी हो, सर्वपोषक हो। यही हमारी प्राथमिकता है।''

2. चाणक्य: ''भारत के महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले कहा था- कालाति क्रमात काल एव फलम पिबति। यानी जब सही समय पर सही कार्य नहीं किया जाता तो समय ही उस कार्य की सफलता को समाप्त कर देता है। संयुक्त राष्ट्र को खुद को प्रासंगिक बनाए रखना है तो उसे अपने असर को बनाए रखना होगा। जलवायु परिवर्तन, कोरोना, छद्म युद्ध, आतंकवाद और अफगानिस्तान के मुद्दे पर हमने संयुक्त राष्ट्र पर सवाल खड़े होते देखे हैं। दशकों से बनी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है।''

3. टैगौर: ''मैं नोबेल सम्मानित गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर के शब्दों के साथ अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। शुभो कर्मोपाथे धोरो निर्भयो गान, शब दुर्बल शंशय होक अभोशान। अपने शुभ कर्मपथ पर निर्भिक होकर आगे बढ़ो, सभी दुर्बलताएं और शंकाएं समाप्त हों। यह बात आज संयुक्त राष्ट्र और हर जिम्मेदार देश के लिए प्रासंगिक है।

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दुनिया से कहा- जलवायु परिवर्तन पर आने वाली पीढ़ियों को जवाब देना है

प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर विकसित देशों के रुख पर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा- जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बड़े और विकसित देशों की तुलना में भारत के प्रयासों को देखकर निश्चित ही दुनिया को गर्व होगा। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को जवाब देना है कि जब फैसले लेने का समय था, तब वो क्या कर रहे थे, जिन पर विश्व को दिशा देने का दायित्व था?

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