Iran: ईरान के स्कूलों में लड़कियों को जहर देने के मामले में गहराता ही जा रहा है रहस्य
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ईरान में हाई स्कूल की छात्राओं को जहर दिए जाने का मामला मीडिया में लगातार सुर्खियों में हैं। बीते दो हफ्तों से ऐसी घटनाओं की खबर लगातार आई है। ऐसी पहली खबर पिछले साल 30 नवंबर को कॉम शहर से आई थी। वहां थकान, चक्कर आने और कमजोरी महसूस होने की शिकायत के बाद एक गर्ल्स हाई स्कूल की 18 छात्राओं को अस्पताल ले जाना पड़ा था। तब अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा था कि उन छात्राओं को जहर दिया गया है। उसके बाद ऐसी घटनाएं लगातार होती रही हैं, जिनमें बीते दो हफ्तों में काफी तेजी आ गई है।
वेबसाइट क्रैडल.कॉ पर छपी एक लंबी रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी के अंत तक ऐसी सारी खबरें कॉम शहर से ही आई थीं और सभी मामले गर्ल्स हाई स्कूलों में हुए थे। उन छात्रोँ ने बताया था कि पहले उन्हें दुर्गंध महसूस हुई और फिर सिरदर्द, उल्टी आने या शरीर सूना पड़ने जैसी दिक्कतें उन्हें होने लगीं। तब कॉम के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया था कि उन्होंने मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे। वहां से मिली रिपोर्टों में लड़कियों को हल्का जहर दिए जाने की पुष्टि हुई।
लेकिन पुष्ट खबरों के बावजूद ऐसी घटनाओं को रोकने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। फरवरी के आखिर में ऐसी घटनाओं की खबर पश्चिमी पमरांत लोरेस्तान से भी आई। लेकिन वहां पीड़ित सिर्फ हाई स्कूल की छात्राएं नहीं हुई थीं। बल्कि प्राइमरी स्कूल की छात्राएं और कुछ भी छात्र भी इसका शिकार बने थे।
अब बीते कुछ दिनों में ऐसी घटनाओं की खबर कई प्रांतों से आई है। उनमें अर्देबिन, अल्बरोज, जांजान, खौजेस्तान और तेहरान शामिल हैं। इन सभी प्रांतों में हजारों की संख्या में लड़कियां उल्टी जैसा महसूस होने, सिरदर्द, छाती में दर्द, और कभी-कभी बेहोश हो जाने जैसे लक्षणों से पीड़ित हुई हैं। लेकिन रहस्यमय यह है कि जिन स्कूलों से ऐसी शिकायत आई, वहां अभी एक भी शिक्षक या अन्य कर्मचारी के पीड़ित होने की खबर नहीं है।
पहली ऐसी घटना होने के तीन बाद तक जांच अधिकारी ऐसा कोई ठोस सबूत हासिल नहीं कर पाए हैं, जिनके आधार पर इन घटनाओं का कारण बताया जा सके।
सरकार समर्थक समूहों का आरोप है कि इन घटनाओं के पीछे इस्लामिक रिपब्लिक के विरोधी गुटों का हाथ है, जो ईरान में तख्ता पलटने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इन समूहों का कहना है कि ऐसे ही गुट ही सोशल मीडिया पर इन घटनाओं को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे हैं, जिसका फायदा अमेरिका और सऊदी अरब जैसे ईरान विरोधी उठा रहे हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि इन घटनाओं का कारण ‘मास हिस्टीरिया’ हो सकता है। इनमें कहा गया है कि जिस उम्र वर्ग की लड़कियों शिकार बनी हैं, उनके बीच शक के आधार पर लक्षण महसूस होने लगना एक आम प्रवृत्ति होती है। इन अधिकारियों ने कहा है कि 1999 में बेल्जियम में कोका कोला पीने पर बेहोशी महसूस होने की शिकायतें आने लगी थीं। बाद में विशेषज्ञों की जांच में इसे मास हिस्टीरिया का मामला पाया गया था।