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सख्ती: देश के 700 + नेत्र बैंक जांच के दायरे में, नियमों के उल्लंघन का आरोप; एक महीने में रिपोर्ट देनी होगी
Tue, 29 Oct 2024 07:33 AM IST
शुभम कुमार
परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 29 Oct 2024 07:33 AM IST
सार
सख्ती: देश के दान में मिलीं आंखें या कॉर्निया एकत्रित करने वाले 700 से ज्यादा नेत्र बैंक जांच के दायरे में हैं। ऐसे में प्रत्येक नेत्र बैंक की जांच शुरू की जाए, जिसके तहत दान में मिलने वाले नेत्र और कॉर्निया का पांच साल का ब्योरा लिया जाएगा। NOTTO मुख्यालय को रिपोर्ट एक महीने में देनी होगी।
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700 से ज्यादा नेत्र बैंक जांच के दायरे में
- फोटो : ani
विस्तार
दान में मिलीं आंखें या कॉर्निया एकत्रित करने वाले देश के 700 से ज्यादा नेत्र बैंक जांच के दायरे में हैं। केंद्र सरकार ने सभी नेत्र बैंक की जांच के आदेश जारी किए हैं। राज्यों को मिले आदेश में कहा है कि मान्यता प्राप्त कई नेत्र बैंक नियमों के तहत प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नेत्र बैंक की जांच शुरू की जाए, जिसके तहत दान में मिलने वाले नेत्र और कॉर्निया का पांच साल का ब्योरा लिया जाएगा।
सख्त हुई केंद्र सरकार
केंद्र ने साफ तौर पर कहा है कि जिन नेत्र बैंक के पास पर्याप्त आंकड़े और बेहतर प्रदर्शन के साक्ष्य नहीं हैं, उन्हें तत्काल नोटिस जारी किया जाए और उनके लाइसेंस के रिन्यूवल पर भी रोक लगाई जाए। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (National Organ & Tissue Transplant Organisation या NOTTO) के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने राज्यों को जारी आदेश में कहा है कि मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण नियम 2014 के तहत प्रत्येक नेत्र बैंक को एक साल में कम से कम 50 नेत्र या फिर 100 कॉर्निया दान में एकत्रित करना अनिवार्य है।
नेत्र बैंक की निगरानी का विवरण
कई बैंक के प्रदर्शन की निगरानी में पता चला है कि इनके पास पर्याप्त लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है और इनका लाइसेंस भी इस साल रिन्यू हुआ है। ऐसे में प्रत्येक नेत्र बैंक की जांच करना जरूरी है। पांच साल के दौरान 250 नेत्र और 500 कॉर्निया का डाटा लेकर उसका सत्यापन करना अनिवार्य है।
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एक महीने में दें कार्रवाई रिपोर्ट
राज्यों को दिए आदेश में डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि इस साल 14 मई को केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में प्रत्यारोपण, अंगदान और नेत्रदान को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान यह तय हुआ है कि राज्यों में नेत्र बैंक की जांच के लिए अलग-अलग टीमें गठित की जाएं और अगले एक महीने के भीतर इसकी पूरी कार्रवाई रिपोर्ट दिल्ली स्थित नोटो मुख्यालय भेजी जाए। ताकि केंद्रीय स्तर पर जांच का मूल्यांकन किया जा सके। इस बैठक में 19 से ज्यादा विशेषज्ञों ने अपनी सहमति जताई है। राज्यों से प्राप्त डाटा को केंद्रीय रजिस्ट्री के जरिए सार्वजनिक किया जाएगा।
रजिस्ट्री हुई शुरू, राज्यों को देनी है जानकारी
डॉ. अनिल कुमार ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्री कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत सभी राज्यों को उन सभी अस्पतालों की जानकारी देनी है जहां प्रत्यारोपण किया जाता है। इन अस्पतालों में मरीजों की वेटिंग, प्रत्यारोपण कराने की संख्या, दान में मिलने वाले अंग सहित सभी जानकारी डिजिटल स्वरूप में देना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि राज्यों को जारी आदेश के साथ समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में भी जानकारी दी है।
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सख्त हुई केंद्र सरकार
केंद्र ने साफ तौर पर कहा है कि जिन नेत्र बैंक के पास पर्याप्त आंकड़े और बेहतर प्रदर्शन के साक्ष्य नहीं हैं, उन्हें तत्काल नोटिस जारी किया जाए और उनके लाइसेंस के रिन्यूवल पर भी रोक लगाई जाए। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (National Organ & Tissue Transplant Organisation या NOTTO) के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने राज्यों को जारी आदेश में कहा है कि मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण नियम 2014 के तहत प्रत्येक नेत्र बैंक को एक साल में कम से कम 50 नेत्र या फिर 100 कॉर्निया दान में एकत्रित करना अनिवार्य है।
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नेत्र बैंक की निगरानी का विवरण
कई बैंक के प्रदर्शन की निगरानी में पता चला है कि इनके पास पर्याप्त लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है और इनका लाइसेंस भी इस साल रिन्यू हुआ है। ऐसे में प्रत्येक नेत्र बैंक की जांच करना जरूरी है। पांच साल के दौरान 250 नेत्र और 500 कॉर्निया का डाटा लेकर उसका सत्यापन करना अनिवार्य है।
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एक महीने में दें कार्रवाई रिपोर्ट
राज्यों को दिए आदेश में डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि इस साल 14 मई को केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में प्रत्यारोपण, अंगदान और नेत्रदान को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान यह तय हुआ है कि राज्यों में नेत्र बैंक की जांच के लिए अलग-अलग टीमें गठित की जाएं और अगले एक महीने के भीतर इसकी पूरी कार्रवाई रिपोर्ट दिल्ली स्थित नोटो मुख्यालय भेजी जाए। ताकि केंद्रीय स्तर पर जांच का मूल्यांकन किया जा सके। इस बैठक में 19 से ज्यादा विशेषज्ञों ने अपनी सहमति जताई है। राज्यों से प्राप्त डाटा को केंद्रीय रजिस्ट्री के जरिए सार्वजनिक किया जाएगा।
रजिस्ट्री हुई शुरू, राज्यों को देनी है जानकारी
डॉ. अनिल कुमार ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्री कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत सभी राज्यों को उन सभी अस्पतालों की जानकारी देनी है जहां प्रत्यारोपण किया जाता है। इन अस्पतालों में मरीजों की वेटिंग, प्रत्यारोपण कराने की संख्या, दान में मिलने वाले अंग सहित सभी जानकारी डिजिटल स्वरूप में देना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि राज्यों को जारी आदेश के साथ समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में भी जानकारी दी है।