US: यूनुस के खिलाफ न्यूयॉर्क में मोर्चा, अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर बांग्लादेशी नागरिकों का भड़का गुस्सा
मोहम्मद यूनुस संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 79वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका आए हुए हैं। यहां उनके होटल के बाहर विरोध-प्रदर्शन जारी है।
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बांग्लादेश में हिंसा तो थम गई, लेकिन तनाव अभी बना हुआ है। यहां अल्पसंख्यकों और उनके धर्म स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में जब यहां की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस न्यूयॉर्क पहुंचे तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। दरअसल, जिस होटल में यूनुस रुके हैं, उसके बाहर बांग्लादेशी नागरिक जमा हो गए और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर उनके खिलाफ नारेबाजी की।
बता दें, मोहम्मद यूनुस संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 79वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका आए हुए हैं।
#WATCH | New York, US: Bangladeshi nationals gather outside the hotel where Head of Bangladesh's interim government, Mohammad Yunus has arrived and chant slogans against him over attacks on minorities in their country. pic.twitter.com/GPSoQPg8Dv
— ANI (@ANI) September 24, 2024
गंदी राजनीति के साथ सत्ता पर कब्जा किया: जमाल हुसैन
प्रदर्शन कर रहे शेख जमाल हुसैन ने कहा, 'डॉ मोहम्मद यूनुस ने असंवैधानिक रूप और गलत तरीके सत्ता कब्जा ली। उन्होंने गंदी राजनीति के साथ सत्ता पर कब्जा किया और बहुत सारे लोग मारे गए। अभी तक हमारी निर्वाचित प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा नहीं दिया है। हम संयुक्त राष्ट्र से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि वह यहां बांग्लादेशी लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करें।'
बांग्लादेश में हमारे लोग सुरक्षित नहीं: रोनाल्ड
एक अन्य प्रदर्शनकारी डीएम रोनाल्ड ने कहा, 'हम एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। सत्ता में आने के बाद उन्होंने हिंदुओं, मुसलमानों, ईसाइयों को मारना शुरू कर दिया। बांग्लादेश में हमारे लोग सुरक्षित नहीं हैं।'
बांग्लादेश में क्या हुआ?
नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली को लेकर अपनी सरकार के खिलाफ अभूतपूर्व सरकार विरोधी छात्र नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के बाद पांच अगस्त को हसीना ने इस्तीफा दे दिया और भारत चली गईं। हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को अंतरिम सरकार द्वारा प्रतिस्थापित किया गया और 84 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को इसका मुख्य सलाहकार नामित किया गया।
बांग्लादेश में हसीना सरकार के पतन के बाद देश भर में भड़की हिंसा की घटनाओं में 230 से अधिक लोग मारे गए, सरकारी नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्रों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से मरने वालों की संख्या 600 से अधिक हो गई है। यहां लगातार अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है।