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MeToo के आरोपः जर्मन सरकार ने दी फिल्म इंडस्ट्री की सब्सिडी रोकने की चेतावनी

Mon, 08 May 2023 02:24 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 08 May 2023 02:24 PM IST
सार

कई अवार्ड जीत चुके अभिनेता और निर्देशक टिल श्वेइगर पर आरोप लगा है कि उन्होंने हाल में एक फिल्म निर्माण के दौरान साथी कलाकारों को धमकाया और उनसे बदजुबानी की। इस फिल्म को श्वेइगर ने निर्देशित भी किया है। मार्च में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई है...

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MeToo allegations: German government threatens to stop subsidy to film industry
Metoo - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

जर्मनी में #MeToo आंदोलन के उठ खड़े होने के बाद अब सरकार को इसमें दखल देना पड़ा है। जर्मनी में इल्जाम लगे हैं कि महिला कलाकारों से दुर्व्यवहार के कारण वहां की फिल्म इंडस्ट्री में ‘भय का माहौल’ बना हुआ है। देश के सबसे बड़े फिल्म स्टारों पर सहकर्मी महिलाओं को डराने-धमकाने और उनसे बदसलूकी करने के आरोप भी लगे हैं।

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कई अवार्ड जीत चुके अभिनेता और निर्देशक टिल श्वेइगर पर आरोप लगा है कि उन्होंने हाल में एक फिल्म निर्माण के दौरान साथी कलाकारों को धमकाया और उनसे बदजुबानी की। इस फिल्म को श्वेइगर ने निर्देशित भी किया है। मार्च में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई है। 50 लोगों ने उनके दुर्व्यवहार के बारे में विवरण दिए हैं। इन विवरणों को जानी-मानी पत्रिका डेर स्पीगेल ने प्रकाशित किया है। इसमें कुछ लोगों ने कहा है कि श्वेइगर एक दशक से ऐसा ही सलूक कर रहे हैं।

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जर्मनी की संस्कृति मंत्री क्लाउडिया रोथ ने इस बारे में ‘व्यापक जांच’ कराने को कहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर फिल्म निर्माण के दौरान फिल्मकारों ने श्रमिक सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन जारी रखा, तो सरकार फिल्म उद्योग को मिलने वाली सब्सिडी पर रोक लगा देगी। उन्होंने कहा कि दुनिया में #MeToo आंदोलन शुरू होने के पांच साल बाद अब जर्मनी को भी इस सच का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए रचना और संस्कृति उद्योग से जुड़े उद्योगों में ऐसे आरोपों पर पूरा ध्यान देना होगा।

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डेर स्पीगेल में रिपोर्ट छपने के बाद से फिल्म उद्योग में काम करने वाले अनेक अन्य लोग भी सामने आए हैं और आरोप लगाया है कि इस इंडस्ट्री में ‘जहरीला’ माहौल है और यह बात सिर्फ श्वेइगर तक सीमित नहीं है। फिल्म और रंगमंच की मशहूर अभिनेत्री केरोलाइन पीटर्स ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘मुझे इस बात की खुशी है कि अब इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चर्चा हो रही है। अब लोगों को ऐसा व्यवहार झेलते हुए अकेले होने का अहसास नहीं होगा।’ अभिनेत्री नोरा ट्शिर्नर ने कहा है कि ऐसे व्यवहार वर्षों से होते रहे हैं और सबको मालूम भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग ऊंचे पदो पर बैठे हैं, उन्हें अब अवश्य कार्रवाई करनी चाहिए।

संस्कृति मंत्री क्लाउडिया रोथ ने कहा कि क्रिएटिव और कल्चरल इंडस्ट्री में ताकत के दुरुपयोग, यौन उत्पीड़न और श्रम कानूनों के उल्लंघन की गुंजाइश रहती है। इसलिए जरूरी है कि फिल्म निर्माण से जुड़े लोग एक आचार संहिता बनाएं, वरना उन्हें सरकारी सब्सिडी से हाथ धोना पड़ेगा।

श्वेइगर के वकील ने तमाम आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि जो घटनाएं नहीं हुईं, उनका आरोप उनके मुवक्किल पर लगाया गया है। उन्होंने पत्रिका डेर स्पीगेल पर अफवाहों को प्रकाशित करने का आरोप लगाया। जबकि सहकर्मियों ने कहा है कि श्वेइगर अक्सर शराब पीकर फिल्म के सेट पर आते हैं और उनका अंदाज आक्रामक होता है। वे सहकर्मियों के साथ गुलाम जैसे व्यवहार करते हैं।


पांच साल पहले जब अमेरिका से शुरू हो कर #MeToo आंदोलन कई देशों में फैला था, तब जर्मनी इससे अछूता रहा था। लेकिन अब आखिरकार वहां होने वाली ऐसी करतूतों की कहानी भी सामने आने लगी है।

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