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दीपक पालीवाल : दिमाग से नहीं कर पाए मदद तो लिया शरीर का सहारा, वैक्सीन ट्रायल में बने वॉलंटियर

Thu, 16 Jul 2020 06:54 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 16 Jul 2020 06:54 PM IST
सार

ऐसे समय में जब पूरी दुनिया वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के प्रकोप से जूझ रही है और वैक्सीन का इंतजार कर रही है भारतीय मूल के एक ब्रिटिश नागरिक ने वैक्सीन के विकास में अपना योगदान देने का फैसला किया। ये शख्स हैं दीपक पालीवाल। दीपक ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से कोरोना वायरस की एक वैक्सीन के लिए कराए जा रहे ह्यूमन ट्रायल में शामिल होने का फैसला किया। 

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Meet Deepak Paliwal who risked his life to help Oxford University experts develop Coronavirus vaccine
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

दीपक बताते हैं कि उनके दिमाग में लगातार यह बात चल रही थी कि कोरोना के खिलाफ पूरी दुनिया में जो जंग चल रही है उसमें वह अपना योगदान कैसे दे सकते हैं। इसके बाद उन्होंने वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल में शामिल होने के लिए वॉलंटियर बनने का फैसला किया। दीपक कहते हैं कि उन्होंने सोचा, उनका दिमाग भले ही इस मामले में किसी काम का नहीं है लेकिन उनका शरीर निश्चित तौर पर है।

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बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में दीपक ने कहा कि उन्हें इस ट्रायल के बारे में 16 अप्रैल को पता चला था। इसके बाद ट्रायल में शामिल होने के लिए जरूरी जांचों और स्क्रीनिंग के लिए वह 26 अप्रैल को लंदन स्थित एक केंद्र पर गए। वह बताते हैं कि उनकी पत्नी ने पहले उनके इस फैसले का समर्थन नहीं किया। दीपक ने बताया कि उन्होंने इस बारे में केवल अपनी पत्नी और खास दोस्तों को बताया था।  

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खतरे कई थे, लेकिन नहीं मानी हार

पालीवाल कहते हैं कि उनके दोस्तों ने उनके इस फैसले को लेकर उन्हें पूरा समर्थन दिया। ट्रायल के दौरान उन्हें उन खतरों के बारे में बताया गया था जिनका सामना उन्हें करना पड़ सकता था। इसमें उनके बेहोश होकर गिरने या अंगों का काम करना बंद कर देना भी शामिल था। उन्होंने ट्रायल के दौरान एक वॉलंटियर की मौत की रिपोर्ट भी पढ़ी थी, लेकिन पालीवाल का हौसला कमजोर नहीं हुआ।  

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मूलत: जयपुर से हैं दीपक पालीवाल

42 वर्षीय दीपक पालीवाल मूलत: राजस्थान के जयपुर से हैं और फिलहाल अपनी पत्नी के साथ लंदन में रहते हैं। उनका ट्रायल सफल रहने के बाद उनके इस साहसी कदम का उनके परिवार ने स्वागत जरूर किया लेकिन उनकी पत्नी ने कसम खाई कि वह दीपक को कभी भी ऐसा कदम उठाने नहीं देंगी। इस बीच, ऑक्सफोर्ड का कोरोना वैक्सीन के लिए हजारों वॉलंटियर्स पर ट्रायल जारी है। 



पालीवाल और उनके जैसे अन्य लोग शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के उन प्रयासों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं जो इस जानलेवा वायरस की वैक्सीन विकसित करने में लगे हुए हैं। बता दें कि यह वायरस चीन के वुहान शहर से निकला था जो अभी तक पूरी दुनिया में एक करोड़ 37 लाख से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर चुका है और पांच लाख 87 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

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