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UN: संयुक्त राष्ट्र ने मनाया विश्व ध्यान दिवस, आध्यात्मिक गुरु ने कहा- यह सभी धर्मों और समय से परे
Sat, 21 Dec 2024 12:15 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्वेता महतो
Updated Sat, 21 Dec 2024 12:15 PM IST
सार
आध्यात्मिक नेता गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आजकल ध्यान कोई लक्जरी नहीं है बल्कि एक आवश्यकता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के नेताओं ने आज 21 दिसंबर को न्यूयॉर्क में विश्व ध्यान दिवस मनाया। इस खास मौके पर उन्होंने ध्यान को सभी धर्मों और सीमाओं से परे बताया। उनका कहना है कि मौजूदा समय में जारी संघर्षों और अविश्वास में यह (ध्यान) कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने शुक्रवार को पहले विश्व ध्यान दिवस के मौके पर एक विशेष कार्यक्रम वैश्विक शांति और सद्भाव के लिए ध्यान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के राजदूतों, अधिकारियों, कर्मचारियों, नागरिक समाज के सदस्यों के साथ-साथ भारतीय-अमेरिकी प्रवासी भी शामिल हुए।
श्री श्री रविशंकर ने कार्यक्रम को किया संबोधित
आध्यात्मिक नेता गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "आजकल ध्यान कोई लक्जरी नहीं है बल्कि एक आवश्यकता है। ध्यान एक ऐसी चीज है, जिसे आप कहीं भी लगा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिवस बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।" उन्होंने कहा कि कई लोग जैसे ही ध्यान शब्द सुनते हैं, उन्हें लगता है कि यह अभ्यास या तो किसी धर्म से है या उनके धर्म ने इसे नहीं सिखाया। आध्यात्मिक नेता गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि ध्यान सभी धर्मों और सभी भौगोलिक सीमाओं से परे है, इसलिए यह कई मायनों में बहुत उपयोगी है।
यूएन महासभा के अध्यक्ष ने भी मनाया विश्व ध्यान दिवस
यूएन महासभा के अध्यक्ष फिलेमोन यांग ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "ध्यान सभी सीमाओं, परंपराओं और समय से परे है। आज दुनिया में सभी को शांति चाहिए। दुनिया में तनाव के कारण यह जरूरी हो गया है कि हम शांति और शांति लाने वाली हर चीज को अपनाएं। आइए हम सभी के लिए एक सुरक्षित, अधिक न्यायसंगत भविष्य लाने के लिए अपने द्वारा साझा किए गए इस अभ्यास को आगे बढ़ाएं।"
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इस महीने की शुरुआत में 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस मनाने की घोषणा की। ऑपरेशनल सपोर्ट के अवर महासचिव अतुल खरे ने कहा कि नागरिक और कर्मचारी दुनिया की सबसे गंभीर चुनौतियों पर उच्च दबाव के साथ काम करते हैं। वे अपने परिवार और घर से दूर होते हैं। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। हमारे कर्मियों को हिंसा के खिलाफ नागरिकों की रक्षा करने का काम सौंपा जाता है। इस कार्यक्रम में श्री श्री रविशंकर के नेतृत्व में एक विशेष ध्यान सत्र भी शामिल किया गया था।
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श्री श्री रविशंकर ने कार्यक्रम को किया संबोधित
आध्यात्मिक नेता गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "आजकल ध्यान कोई लक्जरी नहीं है बल्कि एक आवश्यकता है। ध्यान एक ऐसी चीज है, जिसे आप कहीं भी लगा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिवस बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।" उन्होंने कहा कि कई लोग जैसे ही ध्यान शब्द सुनते हैं, उन्हें लगता है कि यह अभ्यास या तो किसी धर्म से है या उनके धर्म ने इसे नहीं सिखाया। आध्यात्मिक नेता गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि ध्यान सभी धर्मों और सभी भौगोलिक सीमाओं से परे है, इसलिए यह कई मायनों में बहुत उपयोगी है।
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यूएन महासभा के अध्यक्ष ने भी मनाया विश्व ध्यान दिवस
यूएन महासभा के अध्यक्ष फिलेमोन यांग ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "ध्यान सभी सीमाओं, परंपराओं और समय से परे है। आज दुनिया में सभी को शांति चाहिए। दुनिया में तनाव के कारण यह जरूरी हो गया है कि हम शांति और शांति लाने वाली हर चीज को अपनाएं। आइए हम सभी के लिए एक सुरक्षित, अधिक न्यायसंगत भविष्य लाने के लिए अपने द्वारा साझा किए गए इस अभ्यास को आगे बढ़ाएं।"
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इस महीने की शुरुआत में 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस मनाने की घोषणा की। ऑपरेशनल सपोर्ट के अवर महासचिव अतुल खरे ने कहा कि नागरिक और कर्मचारी दुनिया की सबसे गंभीर चुनौतियों पर उच्च दबाव के साथ काम करते हैं। वे अपने परिवार और घर से दूर होते हैं। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। हमारे कर्मियों को हिंसा के खिलाफ नागरिकों की रक्षा करने का काम सौंपा जाता है। इस कार्यक्रम में श्री श्री रविशंकर के नेतृत्व में एक विशेष ध्यान सत्र भी शामिल किया गया था।