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Nepal: माओवादी पार्टी ने SC के फैसले पर जताई आपत्ति, PM प्रचंड के खिलाफ रिट याचिका दायर करने का दिया था आदेश

Sun, 05 Mar 2023 07:45 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 05 Mar 2023 07:45 PM IST
सार

सत्तारूढ़ पार्टी के महासचिव देव गुरुंग ने एक बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश ने नेकपा (माओवादी केंद्र) का गंभीरता से ध्यान आकर्षित किया है। हम ऐसी गतिविधियों की निंदा करते हैं जो नेपाल के संविधान द्वारा गारंटीकृत धर्मनिरपेक्षता, समावेशिता और लोकतांत्रिक गणतंत्र प्रणाली की उपलब्धियों के खिलाफ हैं।

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Maoist party objects to Supreme Court order to register case against PM Prachanda
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' - फोटो : cmprachanda.com

विस्तार

सत्ताधारी नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर आपत्ति जताई है, जिसमें देश के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल को विद्रोह के दौरान हुई पांच हजार मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है और प्रशासन को एक रिट याचिका दाखिल करने को कहा है। 

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पार्टी के महासचिव देव गुरुंग ने प्रेस को दिए एक बयान में कहा कि न्यायमूर्ति ईश्वर प्रसाद खतीवाड़ा और न्यायमूर्ति हरि प्रसाद फुयाल की संयुक्त पीठ द्वारा शुक्रवार को पारित आदेश ने नेकपा (माओवादी केंद्र) का गंभीरता से ध्यान आकर्षित किया है। बयान में कहा गया, हम ऐसी गतिविधियों की निंदा करते हैं जो नेपाल के संविधान द्वारा गारंटीकृत धर्मनिरपेक्षता, समावेशिता और लोकतांत्रिक गणतंत्र प्रणाली की उपलब्धियों के खिलाफ हैं।
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बयान में कहा गया है,  ऐसे समय में जब 'सत्य और सुलह आयोग' और 'गायब होने के मामलों के लिए आयोग' संक्रमणकालीन न्याय के तहत अपना काम कर रहे हैं, ऐसा आदेश शांति प्रक्रिया के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करेगा।
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Nepal: नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने पीएम प्रचंड के खिलाफ याचिका दर्ज करने का दिया आदेश, एक दशक पुराना है मामला

नेकपा (माओवादी केंद्र) के प्रमुख प्रचंड ने 15 जनवरी, 2020 को कहा था कि वह एक दशक से चल रहे विद्रोह का नेतृत्व करने वाली माओवादी पार्टी के नेता के रूप में 5,000 लोगों की मौत की जिम्मेदारी लेंगे और राज्य को शेष मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वकील ज्ञानेंद्र आरन और कल्याण बुधाथोकी ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर कर मांग की कि प्रचंड के बयान की जांच की जाए और उन पर मुकदमा चलाया जाए।

हालांकि, प्रशासन ने पिछले साल नवंबर में यह दावा करते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज करने से इसलिए इनकार कर दिया था कि यह मुद्दा संक्रमणकालीन न्याय से संबंधित है। सत्य और सुलह आयोग मामलों को देख रहा है।


शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने प्रशासन को विद्रोह के दौरान 5,000 मौतों के लिए 'प्रचंड' के खिलाफ रिट याचिकाएं दर्ज करने का आदेश दिया था। व्यस्त कार्यक्रम और श्रमबल की कमी के कारण रविवार को मामला दर्ज नहीं किया जा सका और संभावना है कि सोमवार को होली के त्योहार के बाद मामला दर्ज किया जाएगा।

13 फरवरी, 1996 को शुरू हुआ विद्रोह आधिकारिक तौर पर 21 नवंबर, 2006 को तत्कालीन सरकार के साथ एक व्यापक शांति समझौते के बाद समाप्त हो गया। एक दशक तक चले विद्रोह के दौरान करीब 17,000 लोगों की जान जाने का अनुमान है। 

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