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Nepal: नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने पीएम प्रचंड के खिलाफ याचिका दर्ज करने का दिया आदेश, एक दशक पुराना है मामला

Sat, 04 Mar 2023 11:50 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, काठमांडु
पीटीआई, काठमांडु Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 04 Mar 2023 11:50 PM IST
सार

न्यायमूर्ति ईश्वर प्रसाद खातीवाड़ा और हरि प्रसाद फुयाल की खंडपीठ ने शुक्रवार को कोर्ट प्रशासन को याचिका दर्ज करने का आदेश दिया।

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Nepal Supreme Court orders its administration to take petition against PM Prachanda
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' - फोटो : ट्विटर/ कॉमरेड प्रचंड (फाइल)

विस्तार

नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने अपने प्रशासन को एक दशक पुराने विद्रोह के दौरान 5,000 लोगों की मौत की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड के खिलाफ एक रिट याचिका दर्ज करने का आदेश दिया है। खंडपीठ के शुक्रवार के फैसले से रविवार को रिट याचिकाएं दर्ज होंगी। 

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सुप्रीम कोर्ट प्रशासन के उनकी याचिकाओं को खारिज करने के फैसले के खिलाफ दो अधिवक्ताओं द्वारा दायर एक मामले की सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति ईश्वर प्रसाद खातीवाड़ा और हरि प्रसाद फुयाल की खंडपीठ ने शुक्रवार को अदालत प्रशासन को याचिका दर्ज करने का आदेश दिया।
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13 फरवरी, 1996 को शुरू हुआ था विद्रोह
वहीं काठमांडू पोस्ट अखबार ने सुप्रीम कोर्ट के प्रवक्ता बिमल पौडेल के हवाले से कहा कि शुक्रवार खंडपीठ ने याचिकाओं को दर्ज नहीं करने के सुप्रीम कोर्ट प्रशासन के फैसले को रद्द कर दिया। पीड़ितों ने मांग की कि अदालत पीएम प्रचंड के खिलाफ उन हत्याओं के लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई करे, जो उसमें वह खुद शामिल थे 13 फरवरी, 1996 को शुरू हुआ विद्रोह 21 नवंबर, 2006 को तत्कालीन सरकार के साथ व्यापक शांति समझौते के बाद आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया। हालांकि इसमें कई लोगों की मौत हुई थी।
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प्रचंड ने कहा था- मुझ पर 17,000 लोगों की हत्या का आरोप है
15 जनवरी, 2020 को काठमांडू में एक माघी उत्सव समारोह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रचंड ने कहा था मुझ पर 17,000 लोगों की हत्या का आरोप है, जो सच नहीं है। हालांकि, मैं संघर्ष के दौरान 5,000 लोगों की हत्या की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूं। उन्होंने पिछले महीने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था, यदि आप मुझे 5,000 मारे गए लोगों की जिम्मेदारी सौंपते हैं, तो यह मेरा नैतिक दायित्व है।


उन्होंने कहा कि मैं इससे भाग नहीं सकता। लेकिन जो मैंने नहीं किया उसके लिए लोग मुझे दोष नहीं दे सकते। अनुमान है कि लगभग 17,000 लोगों ने एक दशक लंबे उग्रवाद के दौरान अपनी जान गंवाई। प्रचंड ने 'जनयुद्ध' के नाम पर एक दशक तक सशस्त्र संघर्ष चलाया था।

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