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Mansukh Mandaviya: भारत में टीबी के मामलों में आई कमी, स्विट्जरलैंड में बोले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

Thu, 25 May 2023 10:39 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 25 May 2023 10:39 PM IST
सार

स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 76वीं विश्व स्वास्थ्य संगठन की सभा (WHO) की शुरुआत हुई है। इस दौरान यहां केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जिसने टीबी का अनुमान लगाने के लिए उपकरण तैयार किया है।

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mansukh Mandaviya said India has seen reduction in TB incidence in Switzerland
Mansukh Mandaviya - फोटो : Social Media

विस्तार

ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) एक घातक रोग है, जिसके कारण हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है। एक आंकड़े के मुताबिक, साल 2021 में टीबी से कुल 16 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी। वहीं, भारत ने 2025 तक टीबी को खत्म करने का लक्ष्य बनाया है। इसी को लेकर, भारत ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जिससे तपेदिक यानी टीबी के मामले का अनुमान लगाया जा सके।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की सभा 

स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 76वीं विश्व स्वास्थ्य संगठन की सभा (WHO) की शुरुआत हुई है। इस दौरान यहां केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जिसने टीबी का अनुमान लगाने के लिए उपकरण तैयार किया है। वहीं उन्होंने बताया कि भारत में टीबी के मामलों में कमी दर्ज की गई है। 

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वैश्विक स्तर पर भी आई कमी

मंडाविया के अनुसार, देश में साल 2015 से 2022 तक टीबी के मामलों में 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वहीं, 10 प्रतिशत की वैश्विक कमी दर को पार कर गया है। इसके अतिरिक्त, इसी अवधि के दौरान भारत में टीबी मृत्यु दर में 15 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, वैश्विक स्तर से तुलना करने पर मौतों की दर में करीब 5.9 प्रतिशत की कमी देखी गई है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र देश है, जिसने टीबी के मामले का अनुमान लगाने के लिए अपना तंत्र विकसित किया है। मंडाविया ने कहा कि भारत अब विश्व स्वास्थ्य संगठन की वार्षिक रिपोर्ट से काफी पहले बीमारी का सही आंकड़ा पता कर सकता है।

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2025 तक टीबी को खत्म करना लक्ष्य

उन्होंने वैश्विक सतत विकास लक्ष्य से पांच साल पहले 2025 तक टीबी को खत्म करने के प्रयास में भारत के समर्पण की सराहना की है। मंडाविया ने कहा कि हमने मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए 1.5 लाख से अधिक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। यहां तक कि दूरदराज के क्षेत्रों में भी सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित करता है।

मंत्री ने टीबी के खिलाफ लड़ाई में एक प्रभावी टीका विकसित करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि इस बीमारी को खत्म करने के लिए दुनिया को अधिक से अधिक सहयोग के साथ काम करने की जरूरत है ताकि नवीनतम निदान और उपचार के विकल्पों तक समान पहुंच सुनिश्चित हो सके। 

स्वास्थ्य मंत्री मांडविया ने विश्व स्वास्थ्य सभा में विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय बैठक की 
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 76वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, बैठकों ने एक स्वस्थ कल की खोज में सहयोग के क्षेत्रों और साझा प्राथमिकताओं पर विचार करने का अवसर प्रदान किया। बयान में कहा गया है कि भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं की सराहना करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ टेड्रोस घेब्रेयसस ने जी20 की अध्यक्षता में देश की प्रगति के साथ-साथ डिजिटल स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा को आगे बढ़ाने के प्रयास की प्रशंसा की।

ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक को किया संबोधित
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया ने कहा कि बीमारी की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने कोविड-19 महामारी ने टीके, चिकित्सीय और निदान के विकास में सहयोग और तालमेल बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मंडाविया जिनेवा में विश्व स्वास्थ्य महासभा से इतर ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक संबोधित कर रहे थे। बैठक में ब्रिक्स देशों-ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्रियों ने हिस्सा लिया। 



वैश्विक स्वास्थ्य संकटों को कम करने और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में सहयोगी अनुसंधान के महत्व पर जोर देते हुए मंडाविया ने कहा, "महामारी ने टीकों, चिकित्सीय और निदान के विकास में सहयोग और तालमेल बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स टीका अनुसंधान एवं विकास केंद्र सतत टीका अनुसंधान एवं विकास के साथ-साथ सुरक्षित, प्रभावोत्पादक और किफायती टीकों तक समान पहुंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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