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Mani Shankar Aiyar: 'पाकिस्तान का आतिथ्य यादगार, कहीं और इतने खुले दिल नहीं...'; पूर्व राजनयिक अय्यर का बयान
Sun, 11 Feb 2024 10:37 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लाहौर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लाहौर
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 11 Feb 2024 10:37 PM IST
सार
पूर्व राजनयिक मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान में अतिथि सत्कार के मुरीद हैं। लगभग साढ़े चार दशक पहले राजनयिक के तौर पर कराची में सेवाएं देने पहुंचे अय्यर के मुताबिक जितना खुले दिल से पाकिस्तान में उनका स्वागत हुआ, वैसा अनुभव किसी भी दूसरे देश में नहीं मिला।
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पूर्व राजनयिक मणिशंकर अय्यर (फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
मणिशंकर अय्यर की पहचान कांग्रेस नेता के अलावा कई देशों में राजनयिक के रूप में सेवाएं दे चुके विद्वान के रूप में भी है। पूर्व भारतीय राजनयिक पाकिस्तान में भी राजदूत रह चुके हैं। पाकिस्तान में आम चुनाव 2024 को लेकर जारी चर्चाओं के बीच मणिशंकर अय्यर ने इस देश के आतिथ्य की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा किसी और देश में उनका इतने खुले दिल से स्वागत नहीं हुआ। बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में अय्यर पाकिस्तान में राजनयिक के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।
पाकिस्तान से प्रकाशित डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुकाबिक अय्यर ने कहा कि पाकिस्तान से जुड़ा उनका अनुभव थोड़ा अलग है। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तानी ऐसे लोग हैं जो शायद दूसरे पक्ष पर ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया करते हैं। यदि हम मित्रतापूर्ण व्यवहार करते हैं, तो उनकी तरफ से भी अत्यधिक दोस्ताना बर्ताव होता है।' बकौल अय्यर, अगर कोई पक्ष पाकिस्तान के प्रति शत्रुतापूर्ण व्यवहार करता है, तो पाकिस्तान से और अधिक शत्रुतापूर्ण और आक्रामक प्रतिक्रिया सामने आती है।
अय्यर शनिवार को लाहौर के अलहमरा में फैज महोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कार्यक्रम के दूसरे दिन भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर चर्चा के दौरान कहा कि उन्हें कभी किसी ऐसे देश में जाने का मौका नहीं मिला, जहां उनका स्वागत खुली बांहों और गर्मजोशी के साथ पाकिस्तान की तरह उनका स्वागत हुआ हो।
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कराची में महावाणिज्य दूत के रूप में तैनाती के दिनों को याद करते हुए अय्यर ने कहा, हर कोई उनकी और उनकी पत्नी की देखभाल करने को तत्पर था। 46 साल पुरानी घटनाओं को याद कर रोमांचित अय्यर ने कहा, उन्होंने अपनी पुस्तक मेमोयर्स ऑफ ए मेवरिक में कई घटनाओं के बारे में विस्तार से लिखा है। इस किताब में पाकिस्तान की छवि अधिकांश भारतीयों की कल्पना से बिल्कुल अलग देश के रूप में सामने आई है।
दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर कांग्रेस नेता अय्यर ने कहा, सद्भावना की जरूरत थी, लेकिन 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद से पिछले 10 वर्षों के दौरान कुछ उल्टा हुआ है। डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक अय्यर ने कहा, यह उम्मीद करना मूर्खतापूर्ण है कि भारत में हिंदुत्व की मुखर वकालत करने वाली सरकार (Hindutva establishment) पाकिस्तान से बात करना चाहेगी।
बकौल अय्यर 'मैं पाकिस्तान के लोगों से बस यही कहना चाहता हूं कि वे याद रखें कि प्रधानमंत्री मोदी को कभी भी एक तिहाई से अधिक वोट नहीं मिले हैं, लेकिन हमारी प्रणाली ऐसी है कि अगर उनके पास एक तिहाई वोट हैं, तो उनके पास सीटों के मामले में दो तिहाई वोट हैं।' डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व राजनयिक अय्यर ने भारत की अधिकांश आम जनता को पाकिस्तान के प्रति नरम रूख वाला बताया। उन्होंने कहा, दो-तिहाई भारतीय आपकी (पाकिस्तानियों) ओर आने को तैयार हैं।
बता दें कि जनवरी 2016 के बाद से पाकिस्तान और भारत के रिश्तों में कड़वाहट घुली हुई है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्ती दिखाई और पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की। इससे पहले पाकिस्तान समर्थित दहशतगर्दों ने भारतीय सैन्य ठिकानों पर कई आतंकी हमले किए। इस कारण भारत और पाकिस्तान के संबंध खराब हो गए। भारत ने दो टूक संदेश दिया है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं की जा सकती। आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।
46 साल पहले पाकिस्तान पहुंचे अय्यर
गौरतलब है कि मणिशंकर अय्यर कराची में भारत के महावाणिज्य दूत (काउंसल जनरल) के रूप में दिसंबर 1978 से जनवरी 1982 तक पदस्थापित रहे। 1989 में अय्यर ने भारतीय विदेश सेवा (IFS) की प्रतिष्ठित नौकरी से इस्तीफा देने का फैसला लिया और राजनीतिक पारी शुरू करने के लिए उन्होंने कांग्रेस पार्टी का दामन थामा।
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पाकिस्तान से प्रकाशित डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुकाबिक अय्यर ने कहा कि पाकिस्तान से जुड़ा उनका अनुभव थोड़ा अलग है। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तानी ऐसे लोग हैं जो शायद दूसरे पक्ष पर ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया करते हैं। यदि हम मित्रतापूर्ण व्यवहार करते हैं, तो उनकी तरफ से भी अत्यधिक दोस्ताना बर्ताव होता है।' बकौल अय्यर, अगर कोई पक्ष पाकिस्तान के प्रति शत्रुतापूर्ण व्यवहार करता है, तो पाकिस्तान से और अधिक शत्रुतापूर्ण और आक्रामक प्रतिक्रिया सामने आती है।
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अय्यर शनिवार को लाहौर के अलहमरा में फैज महोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कार्यक्रम के दूसरे दिन भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर चर्चा के दौरान कहा कि उन्हें कभी किसी ऐसे देश में जाने का मौका नहीं मिला, जहां उनका स्वागत खुली बांहों और गर्मजोशी के साथ पाकिस्तान की तरह उनका स्वागत हुआ हो।
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कराची में महावाणिज्य दूत के रूप में तैनाती के दिनों को याद करते हुए अय्यर ने कहा, हर कोई उनकी और उनकी पत्नी की देखभाल करने को तत्पर था। 46 साल पुरानी घटनाओं को याद कर रोमांचित अय्यर ने कहा, उन्होंने अपनी पुस्तक मेमोयर्स ऑफ ए मेवरिक में कई घटनाओं के बारे में विस्तार से लिखा है। इस किताब में पाकिस्तान की छवि अधिकांश भारतीयों की कल्पना से बिल्कुल अलग देश के रूप में सामने आई है।
दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर कांग्रेस नेता अय्यर ने कहा, सद्भावना की जरूरत थी, लेकिन 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद से पिछले 10 वर्षों के दौरान कुछ उल्टा हुआ है। डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक अय्यर ने कहा, यह उम्मीद करना मूर्खतापूर्ण है कि भारत में हिंदुत्व की मुखर वकालत करने वाली सरकार (Hindutva establishment) पाकिस्तान से बात करना चाहेगी।
बकौल अय्यर 'मैं पाकिस्तान के लोगों से बस यही कहना चाहता हूं कि वे याद रखें कि प्रधानमंत्री मोदी को कभी भी एक तिहाई से अधिक वोट नहीं मिले हैं, लेकिन हमारी प्रणाली ऐसी है कि अगर उनके पास एक तिहाई वोट हैं, तो उनके पास सीटों के मामले में दो तिहाई वोट हैं।' डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व राजनयिक अय्यर ने भारत की अधिकांश आम जनता को पाकिस्तान के प्रति नरम रूख वाला बताया। उन्होंने कहा, दो-तिहाई भारतीय आपकी (पाकिस्तानियों) ओर आने को तैयार हैं।
बता दें कि जनवरी 2016 के बाद से पाकिस्तान और भारत के रिश्तों में कड़वाहट घुली हुई है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्ती दिखाई और पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की। इससे पहले पाकिस्तान समर्थित दहशतगर्दों ने भारतीय सैन्य ठिकानों पर कई आतंकी हमले किए। इस कारण भारत और पाकिस्तान के संबंध खराब हो गए। भारत ने दो टूक संदेश दिया है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं की जा सकती। आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।
46 साल पहले पाकिस्तान पहुंचे अय्यर
गौरतलब है कि मणिशंकर अय्यर कराची में भारत के महावाणिज्य दूत (काउंसल जनरल) के रूप में दिसंबर 1978 से जनवरी 1982 तक पदस्थापित रहे। 1989 में अय्यर ने भारतीय विदेश सेवा (IFS) की प्रतिष्ठित नौकरी से इस्तीफा देने का फैसला लिया और राजनीतिक पारी शुरू करने के लिए उन्होंने कांग्रेस पार्टी का दामन थामा।