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Maldives: 'विदेशी सैनिकों को वापस भेजेंगे', मालदीव के राष्ट्रपति मुइजु का एलान भारत के लिए खतरे की घंटी
Wed, 04 Oct 2023 08:05 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, माले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, माले
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 04 Oct 2023 08:05 AM IST
सार
अपनी पहली जनसभा में मोहम्मद मुइज्जु ने कहा कि 'हम मालदीव में मौजूद विदेशी सैनिकों को वापस भेजेंगे और कानून के मुताबिक यह वापसी होगी। जो लोग विदेशी सैनिकों को लेकर आए, वह इन्हें वापस नहीं भेजना चाहते लेकिन मालदीव के लोगों ने अब तय कर लिया है।'
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मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हाल ही में मालदीव के नए राष्ट्रपति चुने गए मोहम्मद मुइज्जु ने एलान किया है कि वह देश में मौजूद विदेशी सैनिकों को वापस भेजेंगे। मोहम्मद मुइज्जु के इस बयान को भारत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल मालदीव में भारत के सैनिक मौजूद हैं और मोहम्मद मुइज्जु के बयान से साफ है कि अब मालदीव से भारतीय सैनिकों की वापसी हो सकती है।
'विदेशी सैनिकों को वापस भेजेंगे'
बीते शनिवार को घोषित किए गए नतीजों के अनुसार, मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु होंगे। मुइज्जु, चीन समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में मुइज्जु की जीत के बाद से ही आशंका थी कि मालदीव में अब फिर से चीन का दबदबा बढ़ सकता है और मोहम्मद मुइज्जु के ताजा एलान से यह आशंका सच साबित होती दिख रही है। चुनाव जीतने के बाद सोमवार शाम में राजधानी माले में आयोजित अपनी पहली जनसभा में मोहम्मद मुइज्जु ने कहा कि 'हम मालदीव में मौजूद विदेशी सैनिकों को वापस भेजेंगे और कानून के मुताबिक यह वापसी होगी। जो लोग विदेशी सैनिकों को लेकर आए, वह इन्हें वापस नहीं भेजना चाहते लेकिन मालदीव के लोगों ने अब तय कर लिया है।' उल्लेखनीय है कि मालदीव में भारत के ही सैनिक मौजूद हैं।
मोहम्मद मुइज्जु को माना जाता है चीन समर्थक
बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह को भारत का समर्थक माना जाता था लेकिन उनकी हार से भारत और मालदीव के रिश्ते फिर से खराब हो सकते हैं क्योंकि मोहम्मद मुइज्जु पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के समर्थक हैं और उनकी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। अब्दुल्ला यामीन को चीन का कट्टर समर्थक माना जाता है। मुइजु भी चीन समर्थक हैं और चुनाव से पहले चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों के साथ एक बैठक में उन्होंने कहा भी था कि अगर वह राष्ट्रपति बनते हैं तो चीन और मालदीव के रिश्तों का नया अध्याय शुरू होगा।
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राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइजु ने अब्दुल्ला यामीन को तुरंत जेल से रिहा कर घर में नजरबंद कर दिया है। बता दें कि अब्दुल्ला यामीन के शासनकाल में मालदीव में चीन का दखल काफी बढ़ गया था और मालदीव चीन के भारी कर्ज के जाल में फंस गया था। अब्दुल्ला यामीन 11 साल जेल की सजा काट रहे हैं लेकिन अब मोहम्मद मुइजु के राष्ट्रपति बनने से उन्हें राहत मिलना तय है। मोहम्मद मुइजु से जब उनके चीन समर्थक होने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह मालदीव समर्थक हैं, जो भी देश मालदीव का समर्थन करेगा और मालदीव को अपना करीबी दोस्त मानेगा, हम उसकी इज्जत करेंगे। भारत और चीन दोनों ने मोहम्मद मुइजु को जीत की बधाई दी।
भारत के लिए क्यों है झटका
मोहम्मद मुइजु को चीन समर्थक माना जाता है तो पूरी आशंका है कि मालदीव में फिर से चीन का दखल बढ़ेगा और भारत से मालदीव के रिश्ते कमजोर हो जाएंगे। मालदीव, हिंद महासागर में मौजूद एक द्वपीय देश है। यह देश जनसंख्या और क्षेत्रफल के लिहाज से छोटा है लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में एक मार्ग मालदीव के पास से ही होकर गुजरता है। ऐसे में हिंद महासागर में व्यापारिक माल की आवाजाही के लिहाज से मालदीव बेहद अहम है। मालदीव से थोड़ी दूरी पर ही डिएगो गार्सिया नामक द्वीप है, जिस पर अमेरिका और ब्रिटिश नौसेना तैनात रहती है। साथ ही पास ही मौजूद रियूनियन द्वीप समूह पर फ्रांसीसी सेना मौजूद है। ऐसे में मालदीव पर प्रभुत्व जमाकर चीन भारत समेत उक्त देशों की सेनाओं की भी जासूसी कर सकता है।
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'विदेशी सैनिकों को वापस भेजेंगे'
बीते शनिवार को घोषित किए गए नतीजों के अनुसार, मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु होंगे। मुइज्जु, चीन समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में मुइज्जु की जीत के बाद से ही आशंका थी कि मालदीव में अब फिर से चीन का दबदबा बढ़ सकता है और मोहम्मद मुइज्जु के ताजा एलान से यह आशंका सच साबित होती दिख रही है। चुनाव जीतने के बाद सोमवार शाम में राजधानी माले में आयोजित अपनी पहली जनसभा में मोहम्मद मुइज्जु ने कहा कि 'हम मालदीव में मौजूद विदेशी सैनिकों को वापस भेजेंगे और कानून के मुताबिक यह वापसी होगी। जो लोग विदेशी सैनिकों को लेकर आए, वह इन्हें वापस नहीं भेजना चाहते लेकिन मालदीव के लोगों ने अब तय कर लिया है।' उल्लेखनीय है कि मालदीव में भारत के ही सैनिक मौजूद हैं।
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मोहम्मद मुइज्जु को माना जाता है चीन समर्थक
बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह को भारत का समर्थक माना जाता था लेकिन उनकी हार से भारत और मालदीव के रिश्ते फिर से खराब हो सकते हैं क्योंकि मोहम्मद मुइज्जु पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के समर्थक हैं और उनकी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। अब्दुल्ला यामीन को चीन का कट्टर समर्थक माना जाता है। मुइजु भी चीन समर्थक हैं और चुनाव से पहले चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों के साथ एक बैठक में उन्होंने कहा भी था कि अगर वह राष्ट्रपति बनते हैं तो चीन और मालदीव के रिश्तों का नया अध्याय शुरू होगा।
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राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइजु ने अब्दुल्ला यामीन को तुरंत जेल से रिहा कर घर में नजरबंद कर दिया है। बता दें कि अब्दुल्ला यामीन के शासनकाल में मालदीव में चीन का दखल काफी बढ़ गया था और मालदीव चीन के भारी कर्ज के जाल में फंस गया था। अब्दुल्ला यामीन 11 साल जेल की सजा काट रहे हैं लेकिन अब मोहम्मद मुइजु के राष्ट्रपति बनने से उन्हें राहत मिलना तय है। मोहम्मद मुइजु से जब उनके चीन समर्थक होने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह मालदीव समर्थक हैं, जो भी देश मालदीव का समर्थन करेगा और मालदीव को अपना करीबी दोस्त मानेगा, हम उसकी इज्जत करेंगे। भारत और चीन दोनों ने मोहम्मद मुइजु को जीत की बधाई दी।
भारत के लिए क्यों है झटका
मोहम्मद मुइजु को चीन समर्थक माना जाता है तो पूरी आशंका है कि मालदीव में फिर से चीन का दखल बढ़ेगा और भारत से मालदीव के रिश्ते कमजोर हो जाएंगे। मालदीव, हिंद महासागर में मौजूद एक द्वपीय देश है। यह देश जनसंख्या और क्षेत्रफल के लिहाज से छोटा है लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में एक मार्ग मालदीव के पास से ही होकर गुजरता है। ऐसे में हिंद महासागर में व्यापारिक माल की आवाजाही के लिहाज से मालदीव बेहद अहम है। मालदीव से थोड़ी दूरी पर ही डिएगो गार्सिया नामक द्वीप है, जिस पर अमेरिका और ब्रिटिश नौसेना तैनात रहती है। साथ ही पास ही मौजूद रियूनियन द्वीप समूह पर फ्रांसीसी सेना मौजूद है। ऐसे में मालदीव पर प्रभुत्व जमाकर चीन भारत समेत उक्त देशों की सेनाओं की भी जासूसी कर सकता है।
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