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Maldives: सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या घटाने की पहल, संसद ने न्यायपालिका समिति के पास भेजा संशोधन

Tue, 18 Mar 2025 04:41 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, माले
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, माले Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 18 Mar 2025 04:41 AM IST
सार

मालदीव की संसद ने न्यायपालिका अधिनियम में किए गए संशोधन को आगे की जांच के लिए न्यायपालिका समिति को भेज दिया है। इस संशोधन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या सात से घटाकर पांच करने का प्रस्ताव था। यह निर्णय राष्ट्रपति मुइज़ू द्वारा विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेजे जाने के बाद लिया गया।

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Maldives Parliament sends amendment to reduce SC judges' number to Judiciary Committee World News In Hindi
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू - फोटो : ANI

विस्तार

मालदीव की संसद ने न्यायपालिका अधिनियम में किए गए संशोधन को आगे की जांच के लिए न्यायपालिका समिति को भेज दिया है। इस संशोधन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या सात से घटाकर पांच करने का प्रस्ताव था। यह निर्णय राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज़ू द्वारा विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेजे जाने के बाद लिया गया। राष्ट्रपति मुइज़ू ने 11 मार्च को विधेयक को औपचारिक रूप से सांसदों को वापस भेजा था। उनका कहना था कि इस विधेयक में कुछ ऐसे पहलू थे जिन्हें सुधारने की आवश्यकता थी और इसलिए इसे पुनः जांच के लिए न्यायपालिका समिति को भेजा गया।

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इससे पहले, 26 फरवरी को संसद ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या घटाकर पांच करने के लिए संशोधन पारित किया था। साथ ही उसी दिन तीन शीर्ष न्यायाधीशों को निलंबित भी कर दिया था। इससे राजनीतिक विवाद भी खड़ा हुआ था, क्योंकि विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ पार्टी पर आरोप लगाया था कि वह अपने बहुमत का गलत इस्तेमाल कर रहा है।

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न्यायाधीश हुस्नू सूद ने यूरोपीय संघ को सौंपा था मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हुस्नू सूद ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय निकायों, जैसे संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ को सौंपा था। उन्होंने कहा था कि सरकार के द्वारा उठाए जा रहे कदम न्यायिक स्वतंत्रता के खिलाफ हैं और इन कदमों को वापस लिया जाना चाहिए।



इसके बाद राष्ट्रपति मुइज़ू के द्वारा विधेयक को वापस भेजे जाने के बाद, संसद में बहस हुई, जिसमें सत्तारूढ़ पार्टी के सांसदों ने विधेयक के समर्थन में तर्क दिए और इसके उद्देश्य को न्यायिक सुधारों से जोड़ा। वहीं, विपक्षी सांसदों ने अपनी आपत्तियां दोहराईं और इस विधेयक के विरोध में अपनी चिंताओं को साझा किया।

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50 मतों से पारित हुआ था प्रस्ताव
अंत में, विधेयक को न्यायपालिका समिति को भेजने का प्रस्ताव 50 मतों से पारित हो गया। राष्ट्रपति मुइज़ू ने यह निर्णय अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के कानूनी मूल्यांकन के बाद लिया था, जिसमें कहा गया था कि संशोधन में न्यायिक क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए तंत्र की आवश्यकता है, लेकिन प्रस्तावित बदलाव में यह साफ नहीं किया गया था कि यह मूल्यांकन कैसे किया जाएगा। अब न्यायपालिका समिति इस मुद्दे पर विस्तृत समीक्षा करेगी।

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