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सऊदी पर हूतियों का वार: पाकिस्तान ने दी धमकी, करेंगे पलटवार; मिर्ची लगने की वजह क्या?
Wed, 09 Sep 2026 11:43 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, इस्लामाबाद।
पीटीआई, इस्लामाबाद।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 09 Sep 2026 11:43 AM IST
सार
सऊदी अरब पर हूतियों के ताजा हमलों ने यमन की लड़ाई को एक बार फिर बड़ा बना दिया है। हमलों के बाद पाकिस्तान ने मक्का रक्षा समझौते का हवाला देकर साफ चेतावनी दी है कि सऊदी पर हमला हुआ तो वह अकेला नहीं होगा। हालांकि पाकिस्तान ने अभी सीधे युद्ध में उतरने की घोषणा नहीं की है। असली सवाल यही है कि अगर हूती हमले जारी रहे तो क्या मक्का रक्षा समझौता वास्तव में सक्रिय होता है?
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ख्वाजा आसिफ, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
यमन के हूतियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन दागे तो पाकिस्तान ने तुरंत अपना रुख साफ कर दिया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब पर हमला हुआ तो इसे सिर्फ सऊदी की लड़ाई नहीं माना जाएगा। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एक सदस्य पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। यानी सऊदी पर संकट आया तो पाकिस्तान पीछे हटने वाला नहीं है। हालांकि पाकिस्तान ने यह भी साफ किया कि समझौता किसी दूसरे देश पर हमला करने के लिए नहीं है।
पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये ने अगस्त में मक्का में रक्षा समझौता किया था। समझौते के तहत एक सदस्य पर हमला तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। ख्वाजा आसिफ ने सऊदी के लिए पाकिस्तान की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने समझौते को रक्षात्मक बताया, आक्रामक सैन्य गठबंधन नहीं।
आखिर ऐसा क्या हुआ?
मंगलवार को ईरान समर्थित हूतियों ने सऊदी अरब के कई इलाकों को निशाना बनाया। मिसाइलों और ड्रोन से हुए हमलों में शहरों के साथ आर्थिक और ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाया गया। कम से कम 73 नागरिक घायल हुए। हमलों के बाद सऊदी अरब ने भी अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही। यानी यमन का संघर्ष अब सऊदी की जमीन और उसके अहम ठिकानों तक पहुंच गया है।
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पाकिस्तान ने हूतियों को आखिर क्या चेतावनी दी?
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी अरब तक फैलाने की कोशिश की गई तो मक्का समझौते की सामूहिक रक्षा वाली धाराएं लागू हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान समझौते की शर्तों से बंधा है और जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब के साथ खड़ा होगा। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि आसिफ ने यह भी कहा कि उन्हें हूती हमलों के बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच किसी संपर्क की जानकारी नहीं है।
यह भी पढ़ें: अमेरिका ने ईरान के पांच तेल टैंकर उड़ाए: जवाब में तेहरान ने जॉर्डन पर दागीं मिसाइलें; क्या फिर बढ़ेगा तनाव?
क्या पाकिस्तान अब हूतियों से सीधी लड़ाई करेगा?
ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। आसिफ ने खुद कहा कि मक्का समझौता आक्रामक समझौता नहीं है। यानी पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये अपनी तरफ से किसी देश पर हमला नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि तीनों देशों की संयुक्त सैन्य ताकत अपने आप में किसी हमलावर के लिए बड़ा संदेश है। आसिफ के मुताबिक हर हमले का जवाब सीधे सैन्य कार्रवाई से देना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमें ईंट का जवाब पत्थर से देने की जरूरत नहीं है।'
हूती सऊदी पर हमला क्यों कर रहे हैं?
हूतियों का कहना है कि उनके हमले सऊदी अरब के हालिया हवाई हमलों का जवाब हैं। हूतियों ने आरोप लगाया है कि सऊदी ने उत्तर-पश्चिमी यमन में उनके कब्जे वाले इलाकों पर हमले किए। सोमवार को उन्होंने अल हज्म शहर की एक जेल पर सऊदी बमबारी का आरोप लगाया था। हूतियों के मुताबिक इस हमले में कम से कम 11 लोग मारे गए। दूसरी तरफ सऊदी नेतृत्व वाला अरब गठबंधन एक दशक से ज्यादा समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन कर रहा है। यही पुराना संघर्ष अब सऊदी की जमीन तक पहुंचता दिख रहा है।
भारत ने हूती हमलों की निंदा की
भारत ने सऊदी अरब में तेल प्रतिष्ठानों पर हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों की कड़ी निंदा की है। भारत ने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को कहा कि भारत सऊदी अरब की जमीन पर हुए हमलों की निंदा करता है। खासकर तेल प्रतिष्ठानों और अन्य नागरिक व आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ सकता है। साथ ही, ये हमले लाल सागर से जुड़े बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता के लिए भी खतरा हैं। ईरान समर्थित हूती समूह ने मंगलवार को सऊदी अरब के तेल ठिकानों और कुछ अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया था। इन हमलों से पश्चिम एशिया में संघर्ष और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। हूती विद्रोही मुख्य रूप से यमन में सक्रिय हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव और बढ़ा दिया है।
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पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये ने अगस्त में मक्का में रक्षा समझौता किया था। समझौते के तहत एक सदस्य पर हमला तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। ख्वाजा आसिफ ने सऊदी के लिए पाकिस्तान की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने समझौते को रक्षात्मक बताया, आक्रामक सैन्य गठबंधन नहीं।
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आखिर ऐसा क्या हुआ?
मंगलवार को ईरान समर्थित हूतियों ने सऊदी अरब के कई इलाकों को निशाना बनाया। मिसाइलों और ड्रोन से हुए हमलों में शहरों के साथ आर्थिक और ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाया गया। कम से कम 73 नागरिक घायल हुए। हमलों के बाद सऊदी अरब ने भी अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही। यानी यमन का संघर्ष अब सऊदी की जमीन और उसके अहम ठिकानों तक पहुंच गया है।
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पाकिस्तान ने हूतियों को आखिर क्या चेतावनी दी?
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी अरब तक फैलाने की कोशिश की गई तो मक्का समझौते की सामूहिक रक्षा वाली धाराएं लागू हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान समझौते की शर्तों से बंधा है और जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब के साथ खड़ा होगा। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि आसिफ ने यह भी कहा कि उन्हें हूती हमलों के बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच किसी संपर्क की जानकारी नहीं है।
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क्या पाकिस्तान अब हूतियों से सीधी लड़ाई करेगा?
ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। आसिफ ने खुद कहा कि मक्का समझौता आक्रामक समझौता नहीं है। यानी पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये अपनी तरफ से किसी देश पर हमला नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि तीनों देशों की संयुक्त सैन्य ताकत अपने आप में किसी हमलावर के लिए बड़ा संदेश है। आसिफ के मुताबिक हर हमले का जवाब सीधे सैन्य कार्रवाई से देना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमें ईंट का जवाब पत्थर से देने की जरूरत नहीं है।'
हूती सऊदी पर हमला क्यों कर रहे हैं?
हूतियों का कहना है कि उनके हमले सऊदी अरब के हालिया हवाई हमलों का जवाब हैं। हूतियों ने आरोप लगाया है कि सऊदी ने उत्तर-पश्चिमी यमन में उनके कब्जे वाले इलाकों पर हमले किए। सोमवार को उन्होंने अल हज्म शहर की एक जेल पर सऊदी बमबारी का आरोप लगाया था। हूतियों के मुताबिक इस हमले में कम से कम 11 लोग मारे गए। दूसरी तरफ सऊदी नेतृत्व वाला अरब गठबंधन एक दशक से ज्यादा समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन कर रहा है। यही पुराना संघर्ष अब सऊदी की जमीन तक पहुंचता दिख रहा है।
भारत ने हूती हमलों की निंदा की
भारत ने सऊदी अरब में तेल प्रतिष्ठानों पर हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों की कड़ी निंदा की है। भारत ने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को कहा कि भारत सऊदी अरब की जमीन पर हुए हमलों की निंदा करता है। खासकर तेल प्रतिष्ठानों और अन्य नागरिक व आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ सकता है। साथ ही, ये हमले लाल सागर से जुड़े बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता के लिए भी खतरा हैं। ईरान समर्थित हूती समूह ने मंगलवार को सऊदी अरब के तेल ठिकानों और कुछ अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया था। इन हमलों से पश्चिम एशिया में संघर्ष और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। हूती विद्रोही मुख्य रूप से यमन में सक्रिय हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव और बढ़ा दिया है।