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ब्रिटेन: लॉकडाउन में मदद के लिए किया गया था सम्मानित, अब निर्वासन की लटकी तलवार; अब मिला रॉदरहिथ समुदाय का साथ

Sun, 12 Feb 2023 04:05 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 12 Feb 2023 04:05 PM IST
सार

विमल पांड्या साल 2011 में स्टुडेंट वीजा पर भारत से ब्रिटेन आए थे। लेकिन तीन साल बाद ब्रिटेन के गृह कार्यालय ने विदेशी छात्रों को प्रायोजित करने के उनके कॉलेज के अधिकार को रद्द कर दिया था।

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London resident group pledges to fight on for Indian man facing deportation
विमल पांड्या - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोरोना महामारी के चलते राष्ट्रीय लॉकडाउन के दौरान दक्षिण पूर्व लंदन में एक भारतीय व्यक्ति ने कई परिवारों को निशुल्क भोजन की आपूर्ति की थी। इसके लिए उन्हें दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के द्वारा सम्मानित किया गया था। लेकिन ब्रिटेन में आव्रजन अपील हारने के बाद उसे भारत निर्वासन (डिपोर्टेशन) का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच, रॉदरविद समुदाय का एक समूह उनके समर्थन में आगे आया है। 

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इस समूह ने विमल पांड्या (42 वर्षीय) के समर्थन में एक ऑनलाइन याचिका में 1,77,000 हस्ताक्षर इकट्ठा किए हैं। पांड्या साल 2011 में स्टुडेंट वीजा पर भारत से ब्रिटेन आए थे। लेकिन तीन साल बाद ब्रिटेन के गृह कार्यालय ने विदेशी छात्रों को प्रायोजित करने के उनके कॉलेज के अधिकार को रद्द कर दिया था। 
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पांड्या हाल ही में आव्रजन न्यायाधिकरण में सुनवाई हार गए हैं और कहा जा रहा है कि अब वह आगे के रास्ते के लिए अपने वकीलों के साथ बातचीत कर रहे हैं। निवासियों ने पिछले हफ्ते एक Change.Org पर अपडेट याचिका में कहा, हम इस लड़ाई को नहीं छोड़ेंगे, जब तक आगे का कोई रास्ता नहीं निकलता है।
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उन्होंने कहा, विमल ने दिखाया है कि वह रॉदरहिथ समुदाय की कितनी परवाह करता है, जहां वह 11 साल साल से रह रहा है। हम में से बहुत से लोगों को वर्षों से उनकी मदद और समर्थन से लाभ मिला है, यही कारण है कि हम उन्हें अन्यायपूर्ण तरीके से निर्वासित करने से रोकने के लिए लड़ रहे हैं। 

यूके बॉर्डर फोर्स के अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि जिस कॉलेज में उनका दाखिला हुआ था, उन्होंने प्रायोजन का अपना अधिकार खो दिया था, लेकिन न तो कॉलेज और न ही गृह कार्यालय ने उन्हें इस बारे में सूचित किया था। 

उनके स्थानीय समर्थकों के समूह ने कहा, अपने मूल पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों तक पहुंच के बिना विमल को इस मुद्दे को हल करने के लिए कठिन संघर्ष का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपनी आव्रजन स्थिति को नियमित करने और अपनी शिक्षा पूरी करने के प्रयास में हजारों पाउंड खर्च किए हैं। अपनी पढ़ाई जारी रखने की अनुमति का इंतजार करते हुए विमल रोदरहिथ समुदाय का एक अभिन्न अंग बन गए हैं। अब वह वास्तव में अपरिहार्य हैं, और हम नहीं चाहते कि वह चले जाएं।

महामारी के दौरान, पांड्या को एक स्थानीय दुकानदार के रूप में नियुक्त किया गया था और कहा जाता है कि उन्होंने राष्ट्रीय लॉकडाउन के दौरान आइसोलेशन में रहने वाले लोगों को नियमित भोजन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की।


उनकी यह सामुदायिक सेवा को ग्रेटर लंदन के लॉर्ड लेफ्टिनेंट सर केनेथ ओलिसा के ध्यान में लाया गया। केने ने पिछले फरवरी में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की ओर से उन्हें पत्र लिखा था और उनके असाधार प्रयासों के लिए उनको धन्यवाद दिया था। एक निवासी ने कहा, सब कुछ कानूनी सीमाओं में होता है और हमें देश के फैसले का सम्मान करना भी चाहिए, लेकिन अगर किसी ने देश को इतना कुछ दिया है, जिसे महारानी द्वारा पुरस्कृत किया गया है, तो मुझे नहीं पता कि उन्हें क्यों निर्वासित किया जाना चाहिए। 
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