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लॉकडाउन: जर्मनी में भी हर तरफ कोरोना का ही रोना, पड़ोसी देशों की सीमाएं बंद

Wed, 01 Apr 2020 06:33 AM IST
योगेश साहू बॉन से राम यादव की रिपोर्ट
बॉन से राम यादव की रिपोर्ट Published by: योगेश साहू Updated Wed, 01 Apr 2020 06:33 AM IST
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Lockdown: Coronavirus cases everywhere in Germany, neighborhood countries borders closed
जर्मनी में भी कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। - फोटो : PTI

यूरोपीय महाद्वीप की सबसे बड़ी और विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में भी कोरोना का ही रोना है। यहां कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए कमोवेश वही उपाय किए गए हैं जो भारत में हैं।

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तमाम पाबंदियों के बाद 88 प्रतिशत जर्मन सरकार के कदमों से सहमत हैं। 32 प्रतिशत तो और अधिक कठोर नियम चाहते हैं। जर्मन सरकार ने संकट से निपटने के लिए 600 अरब यूरो (4800 अरब रुपये) का पैकेज घोषित किया है।
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पड़ोस की सीमाएं बंद
22 मार्च को कुछ कठोर नियम लागू किए गए। पड़ोसी देशों से सटी सीमाओं को बंद कर दिया गया। विदेशियों के जर्मनी आने पर रोक लगा दी गई। ट्रेनों और बस सेवाओं को 50 प्रतिशत घटा दिया गया।
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विमान सेवाएं भी पूरी तरह ठप हैं, सड़कों, खुले स्थानों पर या पार्कों में दो से अधिक लोग साथ-साथ नहीं दिख सकते। इसके बावजूद जर्मनी में कोरोना वायरस का प्रसार भारत की अपेक्षा कहीं तेज गति से बढ़ा है।  

जर्मनी में पहला मामला 28 जनवरी को दिखा

जर्मनी में कोरोना वायरस के संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि 28 जनवरी को हुई थी। कुछ दिन पहले फ्रांस में भी तीन मामलों की पुष्टि हो चुकी थी। दोनों देशों के प्रथम संक्रमित चीन से आए थे। भारत में पहले मामले की पुष्टि 30 जनवरी को हुई।

जर्मनी की सरकार ने जब देखा कि कोरोना वायरस से होने वाली कोविड-19 बीमारी की रोकथाम के उपाय काम नहीं आ रहे हैं, तो 16 मार्च को बैंकों, डाकघरों, सुपरबाजारों, डॉक्टरों के दवाखानों, दवा की दुकानों, पेट्रोलपंपों और जरूरी सेवाओं को छोड़कर सब बंद करने का आदेश दिया।

स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय, संग्रहालय, सिनेमाघर बंद हो गए। पर रेल, बस और विमान सेवाएं चालू रखी गईं। लोगों से कहा गया कि सार्वजनिक जगहों पर उन्हें दूसरों से कम से कम डेढ़ मीटर की दूरी रखनी होगी। सबको यथासंभव घर में ही रहना होगा।

बेरोजगारी बड़ी चिंता

सांस्कृतिक गतिविधियों, होटल, रेस्त्रां और पर्यटन उद्योग का दीवाला पिटना अभी से सुनिश्चित है। सबसे अधिक निर्यात-आय दिलाने वाले ऑटोमोबाइल, मशीन निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों को भी भारी आंच पहुंचेगी। अनुमान है कि कोरोना की मार से 18 लाख लोग बेरोज़गार हो सकते है। देश में साढ़े पांच प्रतिशत बोरोज़ागारी दर पहले से ही है।

भारत जैसा कठोर नहीं है लॉकडाउन

भारत से भिन्न जर्मनी में एकसमान ‘लॉकडाउन’ नहीं है। सभी मंत्रालय एवं कार्यालय बंद दरवाजों के पीछे काम कर रहे हैं। जनसाधारण उनसे टेलीफोन पर संपर्क कर सकते हैं। ट्रेनें, ट्रॉम, मेट्रो और बसें भी चल रही हैं, हालांकि सामान्य दिनों की अपेक्षा आधी।

महामारी से बचने के आपातकालीन नियमों की अनदेखी करने वालों को भारी अर्थदंड और जेल तक की सजा मिल सकती है। इसके बावजूद एक जनमत सर्वेक्षण के अनुसार, दो-तिहाई जर्मन निजी स्वतंत्रताओं में और अधिक कटौती को भी राजी हैं। केवल 8 प्रतिशत जर्मन मानते हैं कि सरकार जरूरत से ज्यादा कठोरता दिखा रही है।

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