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कोरोना पर अध्ययन: एक बार चपेट में आने के बाद 10 महीनों के लिए कम हो जाता है दोबारा संक्रमण का खतरा

Fri, 04 Jun 2021 06:16 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, लंदन
पीटीआई, लंदन Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 04 Jun 2021 06:16 PM IST
सार

एक अध्ययन के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के लिए जिम्मेदार सार्स-सीओवी-2 वायरस से पहली बार संक्रमित होने के बाद अगले 10 महीनों तक इस बीमारी से फिर संक्रमित होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। जर्नल लांसेट हेल्दी लॉन्गेविटी में मंगलवार को प्रकाशित एक अनुसंधान में पिछले साल अक्तूबर से इस साल फरवरी के बीच इंग्लैंड में देखभाल गृहों (केयर होम) में रहने वाले 2000 से ज्यादा लोगों और कर्मियों में कोविड-19 संक्रमण की दर देखी गई।

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Lancet Study: Pre infection reduces risk of covid19 infection for 10 months
Coronavirus - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के अनुसंधानकर्ताओं ने एंटीबॉडी जांच द्वारा निर्धारित 10 महीने पूर्व तक संक्रमण का शिकार हो चुके लोगों की तुलना उन लोगों से की जिन्हें पूर्व में कोविड-19 संक्रमण नहीं हुआ था। इस अध्ययन में उन्होंने पाया कि जो लोग पूर्व में संक्रमित हो चुके थे उनके इस चार महीने की अवधि में फिर से संक्रमित होने का जोखिम उन लोगों के मुकाबले 85 फीसदी तक कम था जो अब तक इस संक्रमण से बचे हुए थे।

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देखभाल गृहों के कर्मी जो पूर्व में संक्रमित हो चुके थे उनमें पूर्व में संक्रमित नहीं हुए लोगों के मुकाबले संक्रमित होने का जोखिम 60 फीसदी कम होता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह दोनों समूहों में मजबूत सुरक्षा दर्शाता है लेकिन चेताया कि इन दोनों की प्रत्यक्ष तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि कर्मचारियों ने देखभाल केंद्रों के बाहर परीक्षण का उपयोग किया हो सकता है, जिससे सकारात्मक परीक्षणों को अध्ययन में शामिल नहीं किया जा सकता है।
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यूसीएल के इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स में अध्ययन की मुख्य लेखिका मारिया क्रुतिकोव ने कहा, 'यह वाकई में अच्छी खबर है कि प्राकृतिक संक्रमण इस अवधि में फिर से संक्रमित होने के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। कोरोना से एक बार संक्रमित होने के बाद मिलने वाली उच्च स्तरीय प्रतिरक्षा क्षमता आश्वस्त करने वाली है खासकर इस चिंता के मद्देनजर कि इन व्यक्तियों में बढ़ती उम्र की वजह से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कमजोर हो सकती है।'
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इस अध्ययन के लिए कोविड की पहली लहर के बाद 100 देखभाल गृहों में 682 निवासियों और 1429 कर्मियों की पिछले साल जून व जुलाई में एंटीबॉडी जांच की गई थी। इनमें करीब एक तिहाई में एंटीबॉडी पाई गईं जिसका आशय था कि वे पहले संक्रमित हो चुके थे। इसके करीब 90 दिनों बाद इनकी पीसीआर जांच का विश्लेषण किया गया। 90 दिनों का अंतराल इसलिये रखा गया था ताकि कोई शुरुआती संक्रमण का मामला सामने न आए।


अध्ययन में सामने आया कि अक्तूबर और फरवरी के बीच फिर से संक्रमित पाए जाने वाले कर्मियों और देखभाल गृह के निवासियों की संख्या बेहद कम थी। एंटीबॉडी जांच के नतीजों के आधार पर पूर्व में संक्रमित पाए गए 634 लोगों में से यह संक्रमण सिर्फ चार निवासियों और 10 कर्मचारियों में ही दोबारा हुआ। जबकि 1477 प्रतिभागी जो अब तक संक्रमित नहीं हुए थे उनमें पीसीआर जांच के दौरान 93 निवासी और 111 कर्मचारी संक्रमित पाए गए।

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