एक छोटे द्वीप पर मचा महासंग्राम: इस वजह से आमने-सामने आए अमेरिका और चीन
किरिबाटी मध्य प्रशांत क्षेत्र में 33 द्वीपों का एक समूह है। उसके दायरे में 35 लाख वर्ग किलोमीटर का इलाका आता है। यानी क्षेत्रफल के लिहाज से यह भारत से भी बड़ा है। भारत का क्षेत्रफल लगभग 32 लाख 87 हजार वर्ग किलोमीटर है। किरिबाटी की आबादी सिर्फ तकरीबन एक लाख है। मामाउ 2020 में एक नए कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति चुने गए थे...
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प्रशांत महासागर में स्थित छोटा-से द्वीप किरिबाटी एक बड़े संग्राम का स्थल बन गया है। वहां के राष्ट्रपति तनेती मामाउ हाल में अपनी कथित चीन समर्थक नीति के लिए चर्चित रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने पैसिफिक आईलैंड फोरम की ऑनलाइन बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया। इसके पहले वे इस फोरम से अपने देश को हटाने का इरादा जता चुके थे। इस फोरम में 18 प्रशांत क्षेत्र के 18 देश शामिल हैं।
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों ने राय जताई है कि मामाउ के ऐसे कदमों के पीछे चीन का हाथ है। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस आरोप को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। लेकिन चीन ने हाल में प्रशांत क्षेत्र के छोटे देशों को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने की जोरदार मुहिम चला रखी है। इससे इस क्षेत्र में अमेरिकी खेमे के देशों के साथ उसका टकराव बढ़ा है।
मंगलवार को पैसिफिक आईलैंड फोरम की बैठक के मौके पर अमेरिका ने इस क्षेत्र के द्वीपीय देशों के लिए एक खास पैकेज का एलान किया। इसके तहत मछली मारने और अन्य कार्यों के लिए इन द्वीपों को अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। साथ ही अमेरिका इन द्वीपों में अपने दूतावास भी खोलेगा। इस एलान के बाद जो बाइडेन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘अब प्रशांत द्वीपों पर अमेरिका अपनी भूमिका में भारी बढ़ोतरी करने जा रहा है।’
इसके पहले एलान हो चुका था कि बुधवार को इन देशों के नेताओं को अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस संबोधित करेंगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक संभवतः इसी कारण किरिबाटी ने अपने को इस बैठक से अलग किया। अमेरिकी टीकाकारों के मुताबिक किरिबाटी सरकार के इस फैसले से ये बात फिर जाहिर हुई है कि इस क्षेत्र में चीन अपना प्रभाव किस हद तक बढ़ा चुका है।
न्यूजीलैंड की मैसी यूनिवर्सिटी स्थित सेंटर फॉर डिफेंस एंड सिक्युरिटीज में वरिष्ठ अधिवक्ता एना पॉवेल्स ने सीएनएन से कहा- ‘साफ तौर पर क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय समीकरण यहां काम कर रहे हैं। लेकिन ये बात साफ नहीं हुई है कि राष्ट्रपति मामाउ का गेमप्लान क्या है, फोरम की बैठक से किरिबाटी को अलग करके उन्होंने क्या हासिल किया है, और उससे किरिबाटी के लोगों का क्या भला होगा।’
न्यूजीलैंड के ही यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटबरी में चीन विशेषज्ञ प्रोफेसर एनी-मेरी ब्रैडी के मुताबिक चीन का प्रभाव स्पष्ट है। उन्होंने कहा- ऐसा लगता है कि किरिबाटी को बैठक में भाग ना लेने का निर्देश मिला था। इसके पीछे मकसद प्रशांत क्षेत्र की एकता में उस समय अड़चन डालना है, जब फोरम की बैठक से उम्मीद की जा रही थी कि वहां से इस क्षेत्र में सुरक्षा संधि करने की चीन की कोशिशों का सामूहिक जवाब दिया जाएगा।
किरिबाटी मध्य प्रशांत क्षेत्र में 33 द्वीपों का एक समूह है। उसके दायरे में 35 लाख वर्ग किलोमीटर का इलाका आता है। यानी क्षेत्रफल के लिहाज से यह भारत से भी बड़ा है। भारत का क्षेत्रफल लगभग 32 लाख 87 हजार वर्ग किलोमीटर है। किरिबाटी की आबादी सिर्फ तकरीबन एक लाख है। मामाउ 2020 में एक नए कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति चुने गए थे। अब उनकी छवि इस क्षेत्र में चीन के प्रतिनिधि के रूप में बन गई है।