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Hamas: इस्माइल हानिया की जगह इस शख्स को मिल सकती है हमास की बागडोर, ईरान हो सकता है नाराज

Thu, 01 Aug 2024 12:59 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजा Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 01 Aug 2024 12:59 PM IST
सार

साल 1997 में खालेद मशाल पहली बार चर्चा में उस वक्त आया था, जब इस्राइल ने जॉर्डन की राजधानी अम्मान में मशाल को जहर देकर मारने की कोशिश की थी। हालांकि इस हमले में मशाल बच गया था।

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khaled mashaal could replace ismail haniyeh as hamas chief but iran may upset
हमास नेता खालेद मशाल, जिसने वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान केरल में कार्यक्रम को संबोधित किया था - फोटो : Social Media

विस्तार

हमास की राजनीतिक शाखा के प्रमुख इस्माइल हानिया की ईरान में हत्या के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर लगी हैं कि हानिया की जगह अब कौन ले सकता है? अब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस्माइल हानिया की जगह खालेद मशाल को हमास का नया प्रमुख बनाया जा सकता है।  
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कौन है खालेद मशाल
रामल्लाह के सिलवाद में पैदा हुआ खालेद मशाल बचपन में अपने परिवार के साथ कुवैत में रहने लगा था। 15 साल की उम्र में खालेद मशाल मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ जुड़ा और मुस्लिम ब्रदरहुड ने ही 1980 के दशक के अंत में हमास को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। खालेद मशाल ने हमास के साथ जुड़कर कई वर्षों तक आतंकी संगठन के लिए विदेशों से फंडिंग जुटाई। जॉर्डन में अंतरराष्ट्रीय फंडिंग का प्रमुख होते हुए ही खालेद मशाल पर जानलेवा हमला हुआ।
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साल 1997 में खालेद मशाल पहली बार चर्चा में उस वक्त आया था, जब इस्राइल ने जॉर्डन की राजधानी अम्मान में मशाल को जहर देकर मारने की कोशिश की थी। हालांकि इस हमले में मशाल बच गया। 68 वर्षीय मशाल निर्वासन में हमास की राजनीतिक शाखा का नेतृत्व कर चुका है। बता दें कि हमास की राजनीतिक शाखा का प्रमुख ही दुनिया भर के देशों के सामने हमास का प्रतिनिधि होता है। खालेद मशाल ने ही बीते दिनों फलस्तीन के मुद्दे पर केरल में हुई एक जनसभा को वर्चुअल तरीके से संबोधित किया था। जिसके बाद भारत में भी खालेद मशाल के नाम की चर्चा खूब हुई थी।
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ईरान हो सकता है नाराज
मशाल ने कई वर्षों तक सीरिया की राजधानी दमिश्क में रहकर हमास के लिए फंडिंग जुटाई। हालांकि जब सीरिया के राष्ट्रपति असद ने उनके खिलाफ विद्रोह करने वाले सुन्नी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की तो मसाल दमिश्क छोड़कर चला गया और फिलहाल दोहा और काइरो में रह रहा है। ऐसा कहा जाता है कि दमिश्क के अचानक छोड़कर जाने के चलते हमास में खालेद मशाल की स्थिति कमजोर हुई। साथ ही इससे ईरान भी नाराज हुआ, जो कि हमास का प्रमुख हथियार निर्यातक और फंड देने वाला देश है। ईरान की सरकार सीरिया के राष्ट्रपति असद की सरकार की समर्थक है, लेकिन खालेद मशाल द्वारा असद के खिलाफ बगावत ने ईरान को भी नाराज कर दिया। 


हमास के एक शीर्ष नेता खलील अल हय्या के भी इस्माइल हानिया की जगह लेने की चर्चा है। कतर में रह रहा हय्या ही बंधकों की रिहाई और युद्ध विराम के लिए बातचीत का नेतृत्व कर रहा है। हय्या को ईरान का पसंदीदा भी बताया जाता है। ऐसे में अगर खालेद मशाल के साथ ही खलील अल हय्या के नाम की भी चर्चा तेज है। 
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