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Nepal Gen-Z Protest: नेपाल में जेन-जी प्रदर्शन पर बड़ा खुलासा, 76 लोगों की मौत के पीछे सरकार की लापरवाही

Sun, 08 Mar 2026 06:59 PM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: Pavan Updated Sun, 08 Mar 2026 06:59 PM IST
सार

नेपाल में पिछले साल सितंबर महीने हुए जेन-जी के प्रदर्शन की जांच कर रहे आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। आयोग के अध्यक्ष ने चेतावनी भी दी कि अगर सरकार इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू नहीं करती, तो नेपाल में फिर से जेन-जी जैसा बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है। 

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Kathmandu: Gen Z probe commission submits its report to Nepal govt, News in Hindi
जेन-जी प्रदर्शन के बाद सुधरते हालात (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

नेपाल की राजधानी काठमांडू में पिछले साल सितंबर में हुए जेन-जी आंदोलन और हिंसा की जांच करने वाले एक उच्च स्तरीय आयोग ने अपनी रिपोर्ट रविवार को अंतरिम सरकार को सौंप दी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उस समय की सरकार की खराब शासन व्यवस्था और प्रशासन की अक्षमता ही इस पूरे हिंसक घटनाक्रम की बड़ी वजह थी। यह रिपोर्ट आयोग के अध्यक्ष और नेपाल के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज गौरी बहादुर कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को सिंहदरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में सौंपी। हालांकि रिपोर्ट सौंपते समय आयोग और सरकार ने यह नहीं बताया कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के लिए किन लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
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जेन-जी आंदोलन में 76 लोगों की हुई थी मौत
सितंबर 2025 में हुए इस आंदोलन के दौरान दो दिनों में कुल 76 लोगों की मौत हो गई थी। पहले दिन यानी 8 सितंबर को 22 युवाओं की जान गई, जबकि अगले दिन 54 और लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद नेपाल की राजनीति में भारी उथल-पुथल मच गई थी। 
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जनता में क्यों व्याप्त हुई थी नाराजगी?
आयोग के अध्यक्ष गौरी बहादुर कार्की ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उस समय सरकारी संस्थानों, नौकरशाही और न्यायिक व्यवस्था का राजनीतिकरण हो गया था, जिससे जनता में गहरी नाराजगी पैदा हो गई। इसी असंतोष ने आंदोलन को हिंसक रूप दे दिया। उन्होंने यह भी बताया कि जांच में जिन लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया या जो लोग हिंसा रोकने में नाकाम रहे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। हालांकि उन्होंने किसी भी व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया।


जेन-जी आंदोलन के कारण गिरी थी ओली सरकार
यह जांच आयोग उस समय बनाया गया था जब जेन-जी आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था। उनके इस्तीफे के बाद अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सरकार ने 21 सितंबर को यह न्यायिक जांच आयोग गठित किया था। आयोग को शुरुआत में तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देने का समय दिया गया था, लेकिन जांच लंबी चलने के कारण इसकी अवधि तीन बार बढ़ाई गई और कुल मिलाकर 75 दिन अतिरिक्त समय दिया गया।

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जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में क्या दी चेतावनी?
आयोग के अध्यक्ष ने चेतावनी भी दी कि अगर सरकार इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू नहीं करती, तो नेपाल में फिर से जेन-जी जैसा बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है। यह आंदोलन उस समय भड़का था जब तत्कालीन ओली सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर युवाओं में भारी गुस्सा फैल गया था। इसी वजह से देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जो बाद में हिंसक हो गए।

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