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डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका: जॉर्जिया से सीनेटर जॉन ओसॉफ ने दर्ज की शानदार जीत, रिपब्लिकन पर क्या बोले?
Wed, 04 Nov 2026 07:58 AM IST
अमन मौर्या
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अमेरिका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अमेरिका
Published by: अमन मौर्या
Updated Wed, 04 Nov 2026 07:58 AM IST
सार
अमेरिका के जॉर्जिया में डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन ओसॉफ ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक कॉलिन्स को हराकर दूसरी बार सीनेट में जीत दर्ज की है। इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमेरिका के जॉर्जिया से सीनेटर जॉन ओसॉफ फिर से चुनाव जीतकर दूसरी बार सीनेट पहुंच गए हैं। उन्होंने रिपब्लिकन सांसद माइक कॉलिन्स को हराकर डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए अहम सीट बरकरार रखी। इस जीत के साथ ही सीनेट के सबसे युवा सदस्य ओसॉफ पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए हैं। बता दें कि डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में कार्यकाल के अंतिम वर्षों में उनकी नीतियों को रोकने की कोशिश कर रही है।
39 वर्षीय ओसॉफ चुनावी अभियान की शुरुआत में रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख निशाने पर थे। वह सीनेट के एकमात्र डेमोक्रेटिक सदस्य थे, जो ऐसे राज्य से दोबारा चुनाव लड़ रहे थे, जहां 2024 के चुनाव में ट्रंप को जीत मिली थी। हालांकि, ओसॉफ ने शुरुआत से ही ट्रंप के मुखर आलोचक के रूप में चुनाव प्रचार किया। प्रचार के दौरान उन्होंने ट्रंप को 'नाकाम राष्ट्रपति' बताते हुए तीखा हमला किया। उनकी ये आलोचनाएं देशभर में मतदाताओं के सोशल मीडिया फीड का हिस्सा बन गईं।
ट्रंप पर क्या आरोप लगाया?
ओसॉफ चुनावी चंदा जुटाने में भी बेहद सफल रहे। उन्होंने 100 मिलियन डॉलर (लगभग 948.7 करोड़ भारतीय रुपये) से अधिक की राशि जुटाई। इससे उनके 2028 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने और ट्रंप की जगह लेने की संभावनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। बता दें कि चुनाव प्रचार के दौरान ओसॉफ ने ट्रंप पर आरोप लगाया था कि उन्होंने राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल खुद को आर्थिक रूप से फायदा पहुंचाने और अमेरिका की राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए किया है।
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ट्रंप के लिए बड़ा झटका?
ओसॉफ की जीत ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। यह इस बात की पुष्टि करती है कि उनका राजनीतिक प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है और वह अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में पहुंच रहे हैं। ट्रंप ने रिपब्लिकन उम्मीदवार के रूप में माइक कॉलिन्स का समर्थन किया था। जॉर्जिया वही राज्य है, जहां ट्रंप ने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में अपनी हार को लेकर झूठे दावे किए थे और कहा था कि चुनाव में धांधली हुई थी। हालांकि, दो बार सांसद रह चुके कॉलिन्स चुनाव प्रचार में गति नहीं पकड़ सके। एक बहस के दौरान ओसॉफ ने कॉलिन्स पर निशाना साधते हुए कहा, 'डोनाल्ड ट्रंप जो कुछ भी कहते हैं, माइक कॉलिन्स वही करते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ट्रंप क्या कहते हैं। वह खुद से नहीं सोचते।'
2020 में पहली बार सीनेटर बने थे ओसॉफ
ओसॉफ पहली बार 2020 में सीनेट के लिए चुने गए थे। उन्होंने रिपब्लिकन सीनेटर डेविड पर्ड्यू को हराया था। यह चुनाव उस दिन से एक दिन पहले हुआ था, जब ट्रंप समर्थकों ने अमेरिकी कैपिटल पर हमला किया था। उनका मकसद डेमोक्रेटिक नेता जो बाइडन को निर्वाचित राष्ट्रपति के रूप में प्रमाणित किए जाने की प्रक्रिया को रोकना था। उसी समय ओसॉफ के साथी डेमोक्रेट राफेल वार्नॉक ने भी विशेष चुनाव में जीत हासिल की थी। दोनों की जीत ने ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज की थीं। वार्नॉक जॉर्जिया के पहले अश्वेत सीनेटर बने थे, जबकि ओसॉफ राज्य के पहले यहूदी सीनेटर बने थे।
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39 वर्षीय ओसॉफ चुनावी अभियान की शुरुआत में रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख निशाने पर थे। वह सीनेट के एकमात्र डेमोक्रेटिक सदस्य थे, जो ऐसे राज्य से दोबारा चुनाव लड़ रहे थे, जहां 2024 के चुनाव में ट्रंप को जीत मिली थी। हालांकि, ओसॉफ ने शुरुआत से ही ट्रंप के मुखर आलोचक के रूप में चुनाव प्रचार किया। प्रचार के दौरान उन्होंने ट्रंप को 'नाकाम राष्ट्रपति' बताते हुए तीखा हमला किया। उनकी ये आलोचनाएं देशभर में मतदाताओं के सोशल मीडिया फीड का हिस्सा बन गईं।
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ट्रंप पर क्या आरोप लगाया?
ओसॉफ चुनावी चंदा जुटाने में भी बेहद सफल रहे। उन्होंने 100 मिलियन डॉलर (लगभग 948.7 करोड़ भारतीय रुपये) से अधिक की राशि जुटाई। इससे उनके 2028 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने और ट्रंप की जगह लेने की संभावनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। बता दें कि चुनाव प्रचार के दौरान ओसॉफ ने ट्रंप पर आरोप लगाया था कि उन्होंने राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल खुद को आर्थिक रूप से फायदा पहुंचाने और अमेरिका की राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए किया है।
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ट्रंप के लिए बड़ा झटका?
ओसॉफ की जीत ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। यह इस बात की पुष्टि करती है कि उनका राजनीतिक प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है और वह अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में पहुंच रहे हैं। ट्रंप ने रिपब्लिकन उम्मीदवार के रूप में माइक कॉलिन्स का समर्थन किया था। जॉर्जिया वही राज्य है, जहां ट्रंप ने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में अपनी हार को लेकर झूठे दावे किए थे और कहा था कि चुनाव में धांधली हुई थी। हालांकि, दो बार सांसद रह चुके कॉलिन्स चुनाव प्रचार में गति नहीं पकड़ सके। एक बहस के दौरान ओसॉफ ने कॉलिन्स पर निशाना साधते हुए कहा, 'डोनाल्ड ट्रंप जो कुछ भी कहते हैं, माइक कॉलिन्स वही करते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ट्रंप क्या कहते हैं। वह खुद से नहीं सोचते।'
2020 में पहली बार सीनेटर बने थे ओसॉफ
ओसॉफ पहली बार 2020 में सीनेट के लिए चुने गए थे। उन्होंने रिपब्लिकन सीनेटर डेविड पर्ड्यू को हराया था। यह चुनाव उस दिन से एक दिन पहले हुआ था, जब ट्रंप समर्थकों ने अमेरिकी कैपिटल पर हमला किया था। उनका मकसद डेमोक्रेटिक नेता जो बाइडन को निर्वाचित राष्ट्रपति के रूप में प्रमाणित किए जाने की प्रक्रिया को रोकना था। उसी समय ओसॉफ के साथी डेमोक्रेट राफेल वार्नॉक ने भी विशेष चुनाव में जीत हासिल की थी। दोनों की जीत ने ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज की थीं। वार्नॉक जॉर्जिया के पहले अश्वेत सीनेटर बने थे, जबकि ओसॉफ राज्य के पहले यहूदी सीनेटर बने थे।