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US: राष्ट्रपति बाइडन ने इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए बनाई खास रणनीति, कहा- मुस्लिमों को भी सम्मान से जीने...
Fri, 13 Dec 2024 08:10 AM IST
काव्या मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Fri, 13 Dec 2024 08:10 AM IST
सार
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान कुछ मुस्लिम बहुल देशों के लोगों की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे जो बाइडन ने अपने कार्यकाल के पहले दिन रद्द कर दिया था।
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जो बाइडन
- फोटो : PTI
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विस्तार
इस्राइल-गाजा जंग शुरू होने के बाद अमेरिका में मुस्लिमों और अरब के खिलाफ नफरत तेजी से बढ़ रही है। इसी का मुकाबला करने के लिए लंबे समय से इंतजार की जा रही रणनीति का राष्ट्रपति जो बाइडन ने गुरुवार को खुलासा किया। उन्होंने भेदभाव को कम करने के लिए निरंतर काम करने का आह्वान किया।
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ट्रंप के शपथ ग्रहण से पहले एलान
64 पन्नों का यह दस्तावेज डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण से कुछ सप्ताह पहले आया है। बता दें, ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान कुछ मुस्लिम बहुल देशों के लोगों की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे बाइडन ने अपने कार्यकाल के पहले दिन रद्द कर दिया था।
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छह साल के बच्चे की हत्या के एक साल बाद...
यह व्हाइट हाउस द्वारा पिछली साल सितंबर से जारी यहूदी-विरोधी भावना से लड़ने की व्यापक रणनीति को दिखाता है। हालांकि, यह कदम छह साल के लड़के वाडिया अल-फयूम की हत्या के एक साल से अधिक समय बाद उठाया गया है, जिसे एक व्यक्ति ने चाकू मार दिया था। उसे और उसकी मां को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया था क्योंकि वे फलस्तीनी-अमेरिकी थे।
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सम्मान से जीने का हकदार
बाइडन ने शिकागो में बच्चे और उसकी मां पर हुए हमले को जघन्य कृत्य बताया। साथ ही मुस्लिम-विरोधी और अरब-विरोधी घृणा अपराधों, भेदभाव और धमकाने के मामलों में तेजी से हुई वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे गलत और अस्वीकार्य बताया। राष्ट्रपति ने कहा, 'मुसलमानों और अरबियों को भी अमेरिकियों के साथ सम्मान के साथ जीने और हर अधिकार का आनंद लेने के हकदार हैं। ऐसी नीतियां जो पूरे समुदायों के खिलाफ भेदभाव का कारण बनती हैं, गलत हैं और हमें सुरक्षित रखने में नाकाम हैं।'
मुस्लिम नागरिक अधिकार समूह नाखुश
मुस्लिम नागरिक अधिकार समूह 'काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस' ने इस रणनीति को बहुत कम और देरी बताया। इसके साथ ही संघीय निगरानी सूची और नो-फ्लाई सूची को समाप्त न करने के लिए व्हाइट हाउस को दोषी ठहराया, जिसमें कई अरब और मुस्लिम अमेरिकी शामिल हैं। वहीं, ट्रंप की ट्रांजिशन टीम ने इस रणनीति पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है या वह इसका समर्थन करेगी या नहीं।
भारत-अमेरिका संबंधों में द्विदलीय समर्थन जारी रहने की उम्मीद: व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस ने कहा कि बाइडन प्रशासन को उम्मीद है कि ट्रंप प्रशासन के अगले कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों के लिए द्विदलीय समर्थन जारी रहेगा। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा संचार सलाहकार जॉन किर्बी ने कहा, 'इस द्विपक्षीय संबंध को बढ़ाने के लिए दोनों दलों का मजबूत समर्थन रहा है। मैं उम्मीद करता हूं कि यह जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन को इस बात पर बहुत गर्व है कि उनके प्रशासन के दौरान भारत के साथ अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध किस तरह बदल गए हैं।'
किर्बी ने एक सवाल के जवाब में कहा, 'मेरा मतलब है, हमने इंडो-पैसिफिक क्वाड को आगे बढ़ाया है। मुझे नहीं पता कि क्वाड के अंदर और प्रधानमंत्री (भारत के नरेंद्र मोदी) के साथ द्विपक्षीय रूप से उनकी अब तक कितनी बैठकें हुई हैं। हमारे संबंधों में बहुत कुछ ऐसा है जिसने सैन्य से सैन्य, संचार ... लोगों से लोगों के संबंधों, आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाया है।'
'बाइडन बांग्लादेश के हालात पर करीब से नजर रख रहे'
व्हाइट हाउस ने कहा है कि राष्ट्रपति बाइडन बांग्लादेश की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और संयुक्त राज्य अमेरिका बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को देश में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेह ठहराएगा।
व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा संचार सलाहकार जॉन किर्बी ने गुरुवार को कहा, 'पूर्व प्रधानमंत्री के निष्कासन के बाद बांग्लादेश में सुरक्षा की स्थिति कठिन हो गई है। हम इस चुनौती से निपटने के लिए उनके कानून प्रवर्तन और सुरक्षा सेवाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए अंतरिम सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।'
किर्बी ने एक सवाल के जवाब में कहा, 'हम सभी बांग्लादेशी नेताओं के साथ अपनी बातचीत में बहुत स्पष्ट रहे हैं कि धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, सभी बांग्लादेशियों को सुरक्षा, चाहे उनका धर्म या जातीयता कुछ भी हो। हम उनसे इस पर भरोसा रखना चाहते हैं।'